Fact Check: हमास के लड़ाकों द्वारा भारतीय सैनिकों को मारने का झूठा वीडियो वायरल, पड़ताल में जानें सच
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Fact Check: हमास के लड़ाकों द्वारा भारतीय सैनिकों को मारने का झूठा वीडियो वायरल, पड़ताल में जानें सच

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इस्राइल और हमास के बीच चल रहे युद्ध के दौरान सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में नजर आ रहा है कि कुछ लड़ाके सैनिकों को मार रहे हैं। इसके साथ ही उनके साथ गलत व्यवहार कर रहे हैं। वीडियो की आखिरी क्लिप में नजर आ रहा है कि लड़ाके सैनिकों को गोली मार देते हैं। वीडियो को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि यह सैनिक भारतीय हैं, जो इस्राइल और हमास के युद्ध में इस्राइल के साथ मिलकर हमास के खिलाफ लड़ रहे हैं।

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अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में इस दावे को गलत पाया है। हमने पड़ताल में पाया कि यह वीडियो सीरिया का है। सीरिया में बीते साल 2024 में राजनीतिक उथल- पुथल देखने को मिली थी। इस दौरान आतंकवादियों ने सीरियाई सेना के सैनिकों की सामूहिक हत्या की थी। यह वीडियो उसी समय का है। 

क्या है दावा

सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर दावा किया जा रहा है कि इस्राइल और हमास के बीच चल रहे युद्ध में भारतीय सैनिक शामिल हुए हैं। हमास के लड़ाकों ने उन्होंने पकड़ लिया है। 

 एमडी सिराजुल हक सिकंदर नाम के फेसबुक यूजर ने वीडियो शेयर कर लिखा “ हमास ने इस्राइली  के ओर से लड़ रहे भारतीय सैनिकों को गिरफ्तार कर लिया है। हमास इस्राइली सैनिक को तब तक नहीं मारती  हैं, जब तक वह हमला ना करे या वे आक्रामक न हो। वीडियो में अच्छी तरह से देखें, उनके शरीर और चेहरे इस्राएलियों के जैसे नहीं हैं। इसके साथ ही  इस्राइली सैनिक मूंछ नहीं रखते हैं। हम सभी जानते हैं कि बड़ी संख्या में भारतीय सैनिक इस्राइल की ओर से फिलिस्तीन से लड़ रहे हैं। इसलिए हमास ने उन्हें तभी गोली मारी जब उन्होंने पुष्टि की कि वे भारतीय हैं। पाकिस्तान से हारने के बाद अब फिलिस्तीन के साथ भी खेलें“। पोस्ट का लिंक आप यहां और आर्काइव लिंक यहां देख सकते हैं। 

 

इसी तरह के कई और दावों के लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इसकी आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।

पड़ताल 

इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने सबसे पहले वीडियो के कीफ्रेम्स को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। इस दौरान हमें केबना के एक रिपोर्ट मिली। रिपोर्ट में हमें वायरल वीडियो देखने को मिला। यह रिपोर्ट 1 दिसंबर 2024 को प्रकाशित किया गया था। रिपोर्ट में बताया गया था जैसे-जैसे आतंकवादी सीरिया के विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ रहे हैं और सेना इन क्षेत्रों से पीछे हट रही है। इन आतंकवादियों ने सीरियाई सेना के सैनिकों की सामूहिक हत्या की भयावह तस्वीरें जारी की गई हैं। 

इसके बाद हमें तबनक की एक रिपोर्ट मिली, जिसमें वीडियो के साथ बताया गया था कि आतंकवादी समूह तहरीर अल-शाम के नेतृत्व ने अपने आतंकवादियों को यातना और नरसंहार के दृश्यों की तस्वीरें प्रकाशित न करने का आदेश दिया है, फिर भी कुछ आतंकवादियों ने पकड़े गए सीरियाई सैनिकों की सामूहिक हत्या की तस्वीरें प्रकाशित की हैं। 

 

 

इस से स्पष्ट होता है कि यह वीडियो भारतीय सैनिकों की नहीं है। इसके साथ ही हमें भारतीय सेना को इस्राइल के साथ मिल कर हमास से लड़ने से सबंधित कोई रिपोर्ट नहीं मिली है। कीवर्ड से सर्च करने पर इस तरह की कोई मीडिया रिपोर्ट नहीं मिली कि भारत के सैनिकों को इस्राइल में लड़ने के लिए भेजा गया है। हालांकि यह रिपोर्ट मिली कि भारतीय सेना की एक चिकित्सा निकासी टीम ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच संयुक्त राष्ट्र विघटन पर्यवेक्षक बल (यूएनडीओएफ) के गोलान हाइट्स से एक घायल सैनिक को सफलतापूर्वक एयरलिफ्ट किया।   

भारतीय फौज संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के तहत इस्राइल-लेबनान के अशांत बॉर्डर पर उपस्थिति है। वर्तमान में 600 भारतीय सैनिक ब्लू लाइन पर तैनात हैं। यह फोर्स लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (यूएनआईएफआईएल) का हिस्सा है, जो युद्ध क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने काम करते हैं। 

 

 

पड़ताल का नतीजा

पड़ताल से साफ है कि वायरल वीडियो को भ्रामक दावे के साथ शेयर किया जा रहा है। इस वीडियो का भारतीय सैनिकों से कोई संबंध नहीं पाया गया। 

 





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