इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शादी का झांसा देकर चार साल तक दुष्कर्म करने और पीड़िता को सांप से कटवाकर जान से मारने की कोशिश करने के आरोपी पुलिस कांस्टेबल को अंतरिम राहत देने से इन्कार कर दिया। मामले की जांच पुलिस अधीक्षक बाराबंकी को सौंपते हुए 16 मार्च को सीलबंद लिफाफे में जांच रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की एकल पीठ ने यूपी पुलिस में सिपाही आरोपी और अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर दिया है। मामला कानपुर नगर के थाना रैउना का है। पीड़िता का आरोप है कि सिपाही ने 2020 में उसके साथ पहली बार नाबालिग थी तब दुष्कर्म किया और शादी का वादा कर चार साल तक शोषण करता रहा। इस दौरान पीड़िता गर्भवती भी हुई, जिसका जबरन गर्भपात करा दिया गया। 19 फरवरी 2025 को आरोपी ने पीड़िता के साथ दुष्कर्म के बाद दो सपेरों को बुलवाकर उसे सांप से कटवाया और मरी समझकर भाग गया।
याची ने मुकदमे को रद्द करने की मांग के साथ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। पीड़िता के अधिवक्ता ने आरोपी पर कोर्ट को गुमराह करने का आरोप लगाया। कहा कि याची ने बचाव के लिए पारिवारिक अदालत में विदाई संबंधित पीड़िता का संपादित फोटो पेश कर उसे पहले से शादीशुदा साबित करने का प्रयास किया है।








