8 मिनट पहले
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मलयालम एक्टर मोहनलाल ने केरल वन विभाग के सामने 10 हाथी के दांत और हाथी दांत से बनी 13 मूर्तियां घोषित की हैं। यह घोषणा एक्टर ने सरकार की एमनेस्टी (माफी) योजना के तहत की है। मोहनलाल पर हाथी दांत गैर-कानूनी तरीके से रखने का 15 साल पुराना मामला चल रहा है।
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक इन सभी मूर्तियों का कुल वजन करीब 46 किलोग्राम है, जिनमें भगवान कृष्ण, राम और तिरुपति बालाजी की मूर्तियां शामिल हैं। एक्टर ने कहा कि यह चीजें उन्हें विरासत या तोहफे में मिली थीं।
वन अधिकारियों के अनुसार, मोहनलाल ने पहले केवल चार हाथी के दांत होने की जानकारी दी थी। अब उन्होंने छह और हाथी दांत के साथ 13 मूर्तियों की घोषणा की है। वन विभाग इन चीजों की जांच के लिए डीएनए टेस्ट भी करा सकता है।

एक्टर ने 10 हाथी के दांत और उनसे बनी 13 मूर्तियां घोषित की हैं।
2011 में रेड के दौरान मिली थीं यह पूरा मामला साल 2011 का है। तब इनकम टैक्स के अधिकारियों ने कोच्चि के थेवारा इलाके में स्थित मोहनलाल के घर पर रेड की थी। टीम वहां वित्तीय दस्तावेज और कैश तलाशने गई थी, लेकिन उन्हें घर में हाथी दांत और उससे बनी कलाकृतियां सजी हुई मिलीं।
सरकार की मंजूरी के बिना हाथी दांत रखना वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 के तहत गैर-कानूनी है। इसके बाद वन विभाग ने इन चीजों को जब्त कर पेरुम्बावूर कोर्ट में मामला दर्ज कराया था।

मोहनलाल पर हाथी दांत गैर-कानूनी तरीके से रखने का 15 साल पुराना मामला चल रहा है। (फाइल फोटो)
एक्टर ने कहा था- कानून की जानकारी नहीं थी डाउन टू अर्थ की रिपोर्ट के मुताबिक, मोहनलाल ने तब दावा किया था कि यह हाथी दांत एक ऐसे पालतू हाथी के हैं, जिसकी मौत प्राकृतिक कारणों से हुई थी। उन्होंने इसे केवल याद के तौर पर अपने पास रखा था। एक्टर का कहना था कि उन्हें इसे रखने के गैर-कानूनी होने की जानकारी नहीं थी। इसके बाद साल 2015 में सरकार ने उन्हें इन हाथी दांतों की घोषणा करने की अनुमति दे दी और साल 2016 में उन्हें ओनरशिप सर्टिफिकेट भी जारी कर दिया गया।

मोहनलाल एक प्रोफेशनल रेसलर थे। वह 1977 से 1978 तक स्टेट रेसलिंग चैंपियन रहे।
कोर्ट के फैसले के बाद रद्द हुआ सर्टिफिकेट मोहनलाल ने पेरुम्बावूर कोर्ट के आदेश को केरल हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जहां से उन्हें साल 2025 तक अंतरिम रोक मिल गई थी। एक्टर ने साल 2016 और 2019 में सरकार से केस वापस लेने की अपील भी की थी, जिसे साल 2023 में खारिज कर दिया गया।
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2025 में हाई कोर्ट ने रिटायर्ड फॉरेस्ट अफसरों और वन्यजीव संरक्षकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए मोहनलाल के ओनरशिप सर्टिफिकेट को अवैध घोषित कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने एक्टर पर मुकदमा चलाने का आदेश नहीं दिया। अब वन विभाग इन हाथी दांतों और मूर्तियों की असलियत का पता लगाने के लिए इनका डीएनए टेस्ट करा सकता है।










