मेरे पिताजी साइंटिस्ट थे, और मैं बंबई में पली-बढ़ी। हमारी कॉलोनी में हर तरह के लोग थे- बंगाली, मराठी, साउथ इंडियन। मेरी पढ़ाई भी ऐसे स्कूल में हुई, जहां हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई- सब साथ पढ़ते थे। मिल-जुल कर रहना हमारे लिए आम बात थी। हां, मेरे पड़ोसी सांभर खाते हैं, और हम अरहर की […]




