टिपण्णी

रुचिर शर्मा का कॉलम: एआई ‘बूम’ बढ़ते कर्ज के बोझ से ‘बबल’ साबित न हो जाए

अमेरिका के बढ़ते कर्ज को लेकर 1970 के दशक से ही चेतावनियां दी जा रही हैं, लेकिन कोई भी चेतावनी सच साबित नहीं हुई। अलबत्ता अब बेलगाम बढ़ता कर्ज मायने रखने लगा है। पिछले महीने इसने दुनिया भर में सरकारी बॉन्ड की बिकवाली शुरू करा दी। और इसका पहला ठोस असर यह हो सकता है […]