क्या आपको भी ऐसा लगता है कि कई बार आपसे बात करते वक्त सामने वाला व्यक्ति आपसे ज्यादा अपने फोन को देखता रहता है? घर में भी कोई व्यक्ति आपसे बात करते-करते ही अपने मोबाइल फोन में व्यस्त हो जाता है। इसके लिए एक शब्द ईजाद कर लिया गया है- “फबिंग’। यह फोन और स्नबिंग […]
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रीटा कोठारी का कॉलम: चीजों के पूरा होने और उनके धीरे-धीरे खुलने में फर्क है
Hindi News Opinion Reeta Kothari Column | Understanding Half Love & Modern Relationships 5 घंटे पहले कॉपी लिंक रीटा कोठारी अशोका यूनिवर्सिटी में अंग्रेजी की प्रोफेसर और भाषाविद् ‘प्यार’ कोई भौतिक चीज नहीं है। इसलिए जब हम ‘आधा इश्क’ या ‘हाफ लव’ कहते हैं, तो इसका क्या अर्थ होता है? जब प्यार या इश्क ‘आधा’ […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: रोज अपनी मित्रताओं को अपनेपन का एक आकार दें
Hindi News Opinion Pt. Vijayshankar Mehta Column | Tips To Improve Friendship & Relationships 47 मिनट पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता इन दिनों हमारी जीवनशैली में एक रिश्ता और अलग रूप ले रहा है- वह है मित्रता का। आज दोस्ती भी सोशल मीडिया के कारण इफेक्टेड है, लेकिन इमोशनली कनेक्टेड नहीं है। मित्रता टाइम-पास […]
एन. रघुरामन का कॉलम: पिता कब आपके अच्छे दोस्त बन जाते हैं?
बचपन में, मैं कभी उनके बैठने से पहले नहीं बैठता था। इसलिए उस दिन जब वे मेरे बाद बैठे, तो यह कुछ अजीब-सा लगा। लेकिन कोई विकल्प नहीं था। मुझे अपनी पहली कार- एक सेकंड-हैंड फिएट पार्किंग से निकालकर उनके पास लानी थी। उन्होंने अपना हाथ कार की छत पर ऐसे रखा, जैसे उसे आशीर्वाद […]
एन. रघुरामन का कॉलम: पिता कब आपके अच्छे दोस्त बन जाते हैं?
बचपन में, मैं कभी उनके बैठने से पहले नहीं बैठता था। इसलिए उस दिन जब वे मेरे बाद बैठे, तो यह कुछ अजीब-सा लगा। लेकिन कोई विकल्प नहीं था। मुझे अपनी पहली कार- एक सेकंड-हैंड फिएट पार्किंग से निकालकर उनके पास लानी थी। उन्होंने अपना हाथ कार की छत पर ऐसे रखा, जैसे उसे आशीर्वाद […]
एन. रघुरामन का कॉलम: रिश्तों में बेवजह की मदद एहसान नहीं, अहसास होती है
Hindi News Opinion N Raghuraman Column: Accepting Help In Relationships Is A Feeling, Not A Favor 2 घंटे पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु इस रविवार को जरा सोचिए कि कितनी बार मां ने अपनी दोस्त के हाथों आपका पसंदीदा अचार भेजने की पेशकश की होगी? आपको मना करने का अपना तर्क भी याद […]
एन. रघुरामन का कॉलम: प्रेम के कई रूप हैं, इसे किसी भी तरह से व्यक्त कर सकते हैं
लगभग तीन दशकों से मेरा हर शनिवार एक ही तरह से शुरू होता आ रहा है। डिजिटल अलार्म दखल दे, इससे पहले ही मैं जाग जाता हूं। पूरा घर भोर की खास मखमली शांति में लिपटा रहता है। मैं एक कप फिल्टर कॉफी बनाता हूं और एक शांत कोने में बैठ जाता हूं। मद्धम रोशनी […]









