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- N. Raghuraman’s Column – Engineering Is A Blueprint For Expressing One’s Love For Every Child.
1 घंटे पहले
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एन. रघुरामन मैनेजमेंट गुरु
कहते हैं कि आवश्यकता आविष्कार की जननी है। लेकिन पारंपरिक और मेहनतकश परिवारों में पल-बढ़ रहे कई बच्चों के लिए आविष्कार की असली जननी उनकी मां ही होती हैं। पीढ़ियों से बच्चे देखते आए हैं कि उनकी मांएं रसोई और घर के दूसरे कामों में लगातार और अकेले मुश्किलों का सामना करती हैं। बचपन में उनके लिए हमारा प्यार छोटे-छोटे कामों में दिखता था- छोटे बर्तनों में पानी लाना, मैले कपड़ों की सफाई की कोशिश, सब्जियां छीलना या किसी कोने में झाड़ू लगाना।
लेकिन समय के साथ कॉलेज और जॉब ने हमें उनसे दूर कर दिया और हमारी मांएं शारीरिक मेहनत का बोझ अकेले उठाती रहीं। जिनके पास अतिरिक्त पैसे थे, उन्होंने इसका हल पैसे से निकाला- वॉशिंग मशीन, मिक्सर-ग्राइंडर या आधुनिक कुकिंग स्टोव खरीदे। लेकिन उन परिवारों का क्या, जिनके पास महंगे कंज्यूमर अप्लायंसेस खरीदने के पैसे नहीं हों, लेकिन मां के लिए बच्चे का प्यार उतना ही गहरा हो?
ऐसे ही हैं केरलम के 12 वर्षीय स्कूली छात्र लेविन पॉलोज। अपनी मां की रोज की थकान कम करने की गहरी इच्छा से प्रेरित होकर लेविन ने साबित कर दिखाया कि गहरे प्रेम में वैज्ञानिक सोच को जन्म देने की अनोखी ताकत होती है। किसी बजट और आधुनिक लैब के बिना उन्होंने घर को इंजीनियरिंग की ‘डू इट योरसेल्फ’ वाली जगह में बदल दिया। अपने विशुद्ध समर्पण और बेकार चीजों के जरिए उन्होंने कारगर रोबोटिक्स उपकरण बना डाले। जहां दूसरे लोगों को कचरा दिखता था, वहां लेविन को अपनी मां की थकान दूर करने के उपाय दिखते।
अपनी कल्पनाशक्ति के जरिए उन्होंने स्क्रैप मटेरियल से मां को राहत देने वाले ऑटोमेटेड उपकरण बनाए। महज कार्डबोर्ड, पुराने तारों, यूज्ड बैटरियों, छोटी इलेक्ट्रिक मोटरों, धागों और प्लास्टिक स्क्रैप से उन्होंने घरेलू कामकाज में मदद करने वाली कई चीजें बनाईं। इनमें से कुछ यहां पेश हैं:
ऑटोमेटेड फूड स्ट्रिरर और रोटी मेकर: लगातार खाना बनाने की शारीरिक मेहनत कम करने के लिए लेविन ने एक मोटराइज्ड डिवाइस बनाई, जिसे बर्तनों के ऊपर रखा जा सकता है। यह अपने आप खाने को चलाता रहता है, जिससे मां गर्म स्टोव से दूर रह सकती हैं। साथ ही उन्होंने फूड-स्ट्रेनिंग टूल्स और एक ‘डू इट योरसेल्फ’ रोटी-मेकर भी बनाया।
रोबोटिक फ्लोर क्लीनर: साधारण प्लास्टिक कंटेनरों, सामान्य पुर्जों और छोटी मोटरों के इस्तेमाल से बना कारगर वैक्यूम क्लीनर झाड़ू लगाते वक्त झुकने से होने वाली तकलीफ को दूर करता है।
वेस्ट एंड वॉटर असिस्टेंट: उन्होंने अपनी इंजीनियरिंग घर के बाहर भी आजमाई। पानी लाने और घरेलू कचरे के निपटारे के लिए उन्होंने ऑटोमेटेड सिस्टम बनाया, जिसने हाथों की मेहनत को काफी घटा दिया।
कार्डबोर्ड ह्यूमनॉइड: अपने प्रयासों को एक मुकाम देते हुए उन्होंने यह दिखाने के लिए कार्डबोर्ड का एक पूरा ह्यूमनॉइड रोबोट स्ट्रक्चर बनाया कि कैसे एकीकृत इलेक्ट्रॉनिक सर्किट इंसानी काम भी कर सकते हैं।
रिमोट-कंट्रोल्ड कर्टेन मूवर: भारी पर्दों को खींचने में होने वाली परेशानी को समझ कर लेविन ने खिड़कियों के ऊपर एक मोटराइज्ड ट्रैक लगा दिया। इससे रिमोट का बटन दबाते ही पर्दे आसानी से खुल और बंद हो सकते हैं। लेविन की कहानी इंटरनेट सेंसेशन बन गई, क्योंकि उन्होंने अपनी मुश्किलों को छिपाया नहीं। यह कोशिश और गलतियां करने की एक सहज खूबसूरती थी। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वह स्वाभाविक इंजीनियरिंग प्रोसेस शेयर करते हैं।
दर्शक महज चमकदार और तैयार गैजेट ही नहीं देखते, बल्कि जटिल वायरिंग, विफल कोशिशें, नाकाम हुए स्पार्क्स भी देखते हैं और यह भी कि लेविन अपनी गलतियों को कितने धैर्यपूर्वक पहचानते हैं। उनके इसी जुझारुपन ने सरकार के उच्चतम स्तर का ध्यान खींचा। केरलम के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने उन्हें सम्मानित किया और लगभग बिना किसी संसाधन के हाई-लेवल ऑटोमेशन के उपकरण बनाने के लिए इस यंग इनोवेटर की तारीफ की।
इंजीनियरिंग को एक ऑब्जर्वेशन सब्जेक्ट के तौर पर बच्चों को इंट्रोड्यूस कराना चाहिए। उनसे कहिए कि घर के आसपास नजरें घुमाएं और देखें कि पैरेंट्स, ग्रैंड पैरेंट्स और भाई-बहनों को किन कामों में परेशानी हो रही है। कौन से ऐसे बार-बार किए जाने वाले और थकाऊ काम हैं, जिनसे दिन खत्म होते-होते वे आहें भरने लगते हैं? फिर बच्चों की हमदर्दी को इनोवेशन में बदलने में उनकी मदद कीजिए।
फंडा यह है कि इंजीनियरिंग सिर्फ अ कादमिक विषय ही नहीं, बल्कि आपके प्रियजनों की केयर करने का साधन भी है। यह हर उस बच्चे के लिए एक ब्लूप्रिंट है, जो इंजीनियरिंग के जरिए दूसरों की मदद करना चाहता है।








