रीता कोठारी का कॉलम:  अपने अनुभवों के लिए हमारे पास क्या हमेशा शब्द होते हैं?
टिपण्णी

रीता कोठारी का कॉलम: अपने अनुभवों के लिए हमारे पास क्या हमेशा शब्द होते हैं?

कई साल पहले मैं अपनी चाची को एक प्रख्यात होम्योपैथ के पास ले गई थी। जैसा कि होम्योपैथी में अकसर होता है, मेरी चाची से कई सवाल पूछे गए- आप कहां रहती हो, घर में कौन-कौन है, आप को चिंता करने की आदत है, आप गुस्से में आ जाती हो या नहीं? मेरे परिवार के […]