मैं साहित्य पढ़ाती हूं किंतु साहित्य से मेरा रिश्ता कब और कैसे जुड़ा? इस सवाल पर गौर करते हुए मुझे याद है वह वाकया जब मैं मुश्किल से दस-बारह साल की थी। सिंधी घर की एक सांवली लड़की- जिसके बारे में मां कहती रहती- ‘रीटा सांवरी आ’। पिताजी को लगा होगा बेटी का आत्मविश्वास टूट […]
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रीटा कोठारी का कॉलम: हम पराये लोगों की कहानियों में भी अपना कुछ ढूंढ लेते हैं
मैं साहित्य पढ़ाती हूं किंतु साहित्य से मेरा रिश्ता कब और कैसे जुड़ा? इस सवाल पर गौर करते हुए मुझे याद है वह वाकया जब मैं मुश्किल से दस-बारह साल की थी। सिंधी घर की एक सांवली लड़की- जिसके बारे में मां कहती रहती- ‘रीटा सांवरी आ’। पिताजी को लगा होगा बेटी का आत्मविश्वास टूट […]
रीटा कोठारी का कॉलम: क्या हम कभी केवल अपनी ही कहानी सुना सकते हैं?
साहित्य के इतिहास में एक खूब जाना-माना वाक्य है- ‘द पास्ट इज अ डिफ्रेंट कंट्री, दे डु थिंग्स डिफ्रेंटली देयर’ (‘अतीत एक अलग देश है, जिसका अपना भूगोल है, अपने रीति-रिवाज हैं’)। 1953 में हार्टले द्वारा लिखे गए उपन्यास ‘द गो-बिटवीन’ का यह पहला वाक्य है। यहां अतीत को दूसरा देश कहकर शायद हमें बताया […]






