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एन. रघुरामन का कॉलम: क्या हम जिंदगी के व्यापक नजरिए को लेकर मायोपिक हो रहे हैं?

Hindi News Opinion N Raghuraman Column | Mumbai Police Dispute & Life Myopia Perspective 1 घंटे पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु पिछले हफ्ते मुंबई पुलिस में काम करने वाले खताल दम्पती लंबी नाइट शिफ्ट के बाद घर लौटे थे, जो अगले दिन लगभग दोपहर तक चली थी। थके हुए, चिड़चिड़े और सोने के […]

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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: मन नियंत्रित हो तो शरीर में भी स्वास्थ्य उतर आएगा

अब तो मेडिकल साइंस भी मानता है कि तन की बीमारी के पीछे मन का भी अदृश्य हाथ होता है। भले ही मेडिकल साइंस को मन पकड़ में नहीं आता, लेकिन उसके प्रभाव पकड़े जा सकते हैं, क्योंकि मन अंग नहीं, एक अवस्था है और उसे हमने ही निर्मित किया है। इस मामले में मन […]

सेल्फ हेल्प किताबों से:  अपनी भावनाओं को समझना शुरू करें
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सेल्फ हेल्प किताबों से: अपनी भावनाओं को समझना शुरू करें

किताबों से जानिए, मन को शांत होने का समय देना क्यों जरूरी है? छोटे कदम भी प्रगति ही हैं, निरंतर आगे बढ़ते रहें अधिकांश लोग अपनी खुशी की तुलना उस जगह से करते हैं जहां वे अभी तक नहीं पहुंचे हैं। इसलिए उपलब्धियां भी उन्हें अधूरी लगती हैं। लेकिन यदि नजर इस बात पर जाए […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  ‘अनफिल्ड टाइम’ का इस्तेमाल करें, तो क्रिएटिविटी बाहर आएगी
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एन. रघुरामन का कॉलम: ‘अनफिल्ड टाइम’ का इस्तेमाल करें, तो क्रिएटिविटी बाहर आएगी

परिवार की एक शादी में शामिल होने बुधवार रात जब मैं बेंगलुरु जा रहा था तो मैंने तय किया कि इस बार लैपटॉप साथ नहीं ले जाऊंगा। मुझे सिर्फ मैरिज हॉल में उसकी सुरक्षा की चिंता ही नहीं सता रही थी, बल्कि रिश्तेदार मुझे ‘स्क्रीन मैन’ कहने लगे थे तो मैंने डिजिटल उपवास की योजना […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  मन को हटाने से ही वह स्पेस बनेगा, जो हमें शांत करता है
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: मन को हटाने से ही वह स्पेस बनेगा, जो हमें शांत करता है

Hindi News Opinion Pt. Vijayshankar Mehta’s Column: Only By Withdrawing The Mind Will That Space Be Created Which Brings Us Peace. 3 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता जीवन में दु:ख आना और दु:खी हो जाना, ये दो अलग बातें हैं। ऐसा कोई दु:ख बना ही नहीं, जो बिना सुख के आए और ऐसा […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  कला में डूबे रहें, ये आपकी उम्र बढ़ने की रफ्तार घटाएगा
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एन. रघुरामन का कॉलम: कला में डूबे रहें, ये आपकी उम्र बढ़ने की रफ्तार घटाएगा

क्या आपको दादाजी-नानाजी का दौर याद है? वे हर शाम कहां जाते थे- किसी मंदिर में, स्कूल या सामुदायिक सांस्कृतिक मीटिंग में। हमारी दादी-नानी अकसर रसोई में कहती रहती थीं- ‘पता नहीं उन जगहों पर ऐसा क्या है कि दिनभर के काम से लौटने के बाद 15 मिनट भी घर नहीं रुकते।’ दूसरों के बारे […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  कला में डूबे रहें, ये आपकी उम्र बढ़ने की रफ्तार घटाएगा
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एन. रघुरामन का कॉलम: कला में डूबे रहें, ये आपकी उम्र बढ़ने की रफ्तार घटाएगा

क्या आपको दादाजी-नानाजी का दौर याद है? वे हर शाम कहां जाते थे- किसी मंदिर में, स्कूल या सामुदायिक सांस्कृतिक मीटिंग में। हमारी दादी-नानी अकसर रसोई में कहती रहती थीं- ‘पता नहीं उन जगहों पर ऐसा क्या है कि दिनभर के काम से लौटने के बाद 15 मिनट भी घर नहीं रुकते।’ दूसरों के बारे […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  बुढ़ापे में कम से कम इतना जरूर करें कि मन हल्का रखें
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: बुढ़ापे में कम से कम इतना जरूर करें कि मन हल्का रखें

आजकल की पीढ़ी के मुंह से कभी-कभी यह बात सुनाई देती है कि मैं चीजों को दिल पर नहीं लेता या लेती हूं। यानी ये लोग जिम्मेदारियों को भी बहुत लाइटली ले लेते हैं। कहते हैं कि दिल पर लेना भी फायदेमंद होता है। कभी-कभी दर्द भी जुनून पैदा करता है। अब हम इसी बात […]

Editorial: Every sixth person is lonely, broken from relationships, cut off from communication; WHO claims – inner silence is taking millions of lives every year – संपादकीय: हर छठा इंसान अकेला है, रिश्तों से टूटा, संवाद से कटा; WHO का दावा- हर साल लाखों जिंदगियां ले रही भीतर की खामोशी
राज्य

Editorial: Every sixth person is lonely, broken from relationships, cut off from communication; WHO claims – inner silence is taking millions of lives every year – संपादकीय: हर छठा इंसान अकेला है, रिश्तों से टूटा, संवाद से कटा; WHO का दावा- हर साल लाखों जिंदगियां ले रही भीतर की खामोशी

Editorial: Every sixth person is lonely, broken from relationships, cut off from communication; WHO claims – inner silence is taking millions of lives every year – संपादकीय: हर छठा इंसान अकेला है, रिश्तों से टूटा, संवाद से कटा; WHO का दावा- हर साल लाखों जिंदगियां ले रही भीतर की खामोशी | Jansatta Source link