मुकेश माथुर का कॉलम:  विकसित भारत के केंद्र में इकोनॉमी तो है, पर इंसान?
टिपण्णी

मुकेश माथुर का कॉलम: विकसित भारत के केंद्र में इकोनॉमी तो है, पर इंसान?

शून्य से शिखर तक पहुंचने वाला एक व्यक्ति अपना ‘विकास’ किसे मानेगा? पैसे, पद, प्रतिष्ठा को या अच्छी गुणवत्ता वाले जीवन-स्तर, बौद्धिक विकास, मन की शांति और खुशी को? इससे भी आगे, अपने दायरे में आने वाले लोगों की जिंदगियां बेहतर करने को? शायद इस सभी को, लेकिन सिर्फ बड़ा बंगला, बड़ी गाड़ी विकास नहीं […]