टिपण्णी

श्रीप्रकाश श्रीधरन का कॉलम: अनुशासन ‘नाजुक’ होता है, उसका ख्याल रखना जरूरी

हाल ही में बद्रीनाथ की यात्रा के दौरान मैंने एक ऐसी घटना देखी, जिसका मुझ पर गहरा प्रभाव पड़ा। ज्योतिर्मठ के पास सड़क का एक संकरा हिस्सा है, जहां पहाड़ी इलाके में जाम से बचने के लिए वाहनों की आवाजाही को सावधानीपूर्वक नियंत्रित किया जाता है। यातायात को व्यवस्थित ढंग से चलने दिया जाता है […]