टिपण्णी

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: बाहर की दुनिया में गतिमान होकर भी शांत रहने का प्रयोग

तन कोमल हो तो फूलों से भी जख्मी होगा। मन मजबूत हो तो चट्टानें भी टूट जाएंगी। अब मन पर काम करने का समय आ गया है। लोग अलग-अलग तरीके से परेशान हैं। और एक परेशानी यह है कि मन पर काम करने के लिए भी उनके पास समय नहीं है। टेक्नोलॉजी से समय बचाया […]