UP: ‘पापा मेरे शव को हाथ न लगाएं’, कड़वी यादों और अपमान ने छीनीं प्रियांशु की सांसें, दो पन्नों में लिखा दर्द
होम

UP: ‘पापा मेरे शव को हाथ न लगाएं’, कड़वी यादों और अपमान ने छीनीं प्रियांशु की सांसें, दो पन्नों में लिखा दर्द

Spread the love


कानपुर में कचहरी की पांचवीं मंजिल से छलांग लगाकर जान देने से पहले प्रशिक्षु अधिवक्ता प्रियांशु श्रीवास्तव ने दो पेज के सुसाइड लोट लिखा है कि उनकी आखिरी इच्छा है कि सुसाइड नोट जो भी देखे उसे आखिरी तक पढ़े। पिता राजेंद्र कुमार की डांट, उलाहने और निर्वस्त्र कर घर से निकालने की धमकी उन्हें जिंदगी भर सालती रही। पिता से रिश्ते में इस कदर दूरी आ गई कि उन्हें लिखना पड़ गया… ऐसे पिता भगवान किसी को भी न मिले। पिता उसका शव भी न छू पाएं… पापा जीत गए, उन्हें जीत मुबारक हो।



करीब 24 वर्ष की उम्र में जान देने वाले प्रियांशु ने लिखा कि लॉ 2025 में किया है। बचपन में छह साल की उम्र में चुपके से फ्रिज में रखा मैंगोशेक पी लेने पर पिता ने निर्वस्त्र कर घर से निकाल दिया था। वह शर्मिंदगी जहन में बैठ गई। आगे लिखा कि पढ़ाई के लिए दबाव, अधूरी तैयारी पर पीटना तो फिर भी ठीक था लेकिन हर पल शक की नजर से देखना हर मिनट का हिसाब लेना, कहीं न कहीं मानसिक टार्चर ही रहा।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *