{“_id”:”679117253599cbd134084cd5″,”slug”:”a-widow-woman-struggling-with-financial-crisis-in-etah-committed-suicide-2025-01-22″,”type”:”story”,”status”:”publish”,”title_hn”:”UP: बच्चों का पेट नहीं भर सकी तो मां ने जहर खाकर दे दी जान, पति की हो चुकी है माैत; अब इस हाल में है परिवार”,”category”:{“title”:”City & states”,”title_hn”:”शहर और राज्य”,”slug”:”city-and-states”}}
मां की माैत के बाद गुमसुम बच्चे। – फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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एटा के नगला पवल की रहने वाली सुमन गरीबी के आगे घुटने टेक दुनिया छोड़ गई। वजह थी कि अपने बच्चों को भरपेट रोटी मुहैया नहीं करा पा रही थी। जब घर में हर शख्स भूखा था तो रोटियों का इंतजाम नहीं था, आज उस घर की रसोई में रोटियों के ढेर लगे हैं, लेकिन उन्हें खाने के लिए भूख नहीं है। मां को खोने के बाद बच्चों के गले से निवाला नहीं उतर रहा है। रिश्तेदार बराबर खाना भिजवा रहे हैं और ढेर लगते जा रहे हैं।
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बच्चों के सिर से पिता ओमकार का साया क्या उठा, सारी खुशियां ही रूठ गईं। जैसे-तैसे परिवार को पालने का जिम्मा मां सुमन ने उठाया, लेकिन उसके कंधे इतने मजबूत नहीं थे कि आठ सदस्यों के परिवार का बोझ अधिक समय तक उठा पाते। पति की मौत के डेढ़ साल बाद ही वह हिम्मत हार गई। लगातार हाड़तोड़ मेहनत के बाद भी बच्चों के लिए पेट भर रोटी न जुटा पाने की टीस उसे अंदर ही अंदर खाए जा रही थी।
रविवार की रात की स्थिति उसके लिए हृदय विदारक हो गई, जब आटा कम होने पर कुल छह रोटियां बनीं और खाने वाले आठ लोग थे। बच्चे भूखे थे, और रोटियां देने की मांग कर रहे थे। मां रोटियां कहां से लाती, घर में आटा ही नहीं था।
उसकी मौत के बाद मंगलवार से आसपड़ोस और रिश्तेदारियों से सामान्य रिवाज और सहानुभूति में खाना पहुंचाया जा रहा था। आज इस घर की उस रसोई में रोटियों के ढेर लगे थे, जो कल तक एक-एक रोटी के लिए तरस रही थी। उन रोटियों के लिए आज किसी को चाह नहीं थी। उनको देखकर भी बच्चे नजरें फेर रहे थे। उस मां का इंतजार था जो अपने हाथों से रोटी बनाती और खिलाती थी। अफसोस अब मां नहीं, केवल रोटियां ही उनके नसीब में रह गईं।
अब कोई पानी देने वाला भी नहीं रहा
इस घर की सबसे उम्रदराज सदस्य सुमन की 70 वर्षीय सास रामबेटी हैं। बीमार भी रहती हैं। घर के बरामदे में एक तख्त पर लेटी-बैठी रहती हैं। उनके आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। कहती हैं कि पहले लला (ओमकार) की बीमारी में जान चली गई, अब बहू…। इतना कहते ही गला रुंध गया और आवाज जाम हो गई। कुछ समय बाद भावनाओं का ज्वार संभालते हुए बोलीं कि बहू ही तो सेवा करती थी। अब तो कोई पानी देने वाला नहीं रहा।
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