कानपुर के युवाओं को लाखों की तनख्वाह वाली नौकरी दिलाने का झांसा दे कंबोडिया भेजने वाले दो एजेंटों फैसल और अमस काे पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने बेकनगंज इलाके के युवक को कंबोडिया भेजा था जहां उसे बंधक बना लिया गया। इसके बाद उससे लोगों को कॉल करवा कर साइबर ठगी करने के लिए मजबूर किया गया। विरोध करने पर पीट गया।
डीसीपी सेंट्रल अतुल कुमार श्रीवास्तव ने रविवार को खुलासा करते हुए बताया कि दोनों को दलेलपुरवा चौराहे के पास से गिरफ्तार किया गया है। बेकनगंज हीरामनका पुरवा निवासी मो. नावेद सिलाई कारीगर हैं। बेनाझाबर के फैसल वारसी ने कंबोडिया में ई-कामर्स कंपनी में 1.50 लाख रुपये तनख्वाह पर नौकरी का झांसा दिया था। बदले में उनसे करीब तीन लाख रुपये लिए। उन्हें लखनऊ, बैंकाक, थाईलैंड होते हुए कंबोडिया ले जाया गया। वहां अंग्रेजी में हुए इंटरव्यू में फेल हो गया। इसपर उन्होंने कर्नलगंज के कागजी मोहाल निवासी एजेंट अमस जोकि वहीं था से शिकायत की।
इस पर हिंदी में इंटरव्यू हुआ। इसके बाद उनसे लोगों को डिजिटल अरेस्ट करने, अश्लील वीडियो देखने की बात कह कर धमकाने को कहा गया। इन्कार करने पर तीन दिन तक अंधेरे कमरे में रखा गया। किसी तरह छूटकर एक माह बाद घर पहुंचा। सात अप्रैल को फैसल और अमस ने उसे यतीमखाने के पास बुलाकर 2.5 लाख रुपये की रंगदारी मांगी। न देने पर हत्या की धमकी दी। इसके बाद नावेद ने दोनों के खिलाफ बेकनगंज थाने में शिकायत की थी।
स्टूडियों में बना है कोर्ट और पुलिस ऑफिस का सेटअप
कंबोडिया में शातिरों के चंगुल से बचकर लौटे नावेद ने बताया कि वहां पर एक स्टूडियो बना रखा है। इसमें कोर्ट रूम, कमिश्नर कार्यालय, बैंक कार्यालय जैसे सेटअप लगे हैं। जहां से लोगों को डराकर डिजिटल अरेस्ट कर साइबर ठगी की जाती है। सभी को एक आईडी दी गई है। गैंग के सदस्य नौकरी की तलाश में पहुंचे युवकों से फोन कॉल करवाते थे। एजेंटों ने काकादेव, बेकनगंज और चमनगंज के युवकों को वहां भेजा है।डीसीपी ने कहा कि पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वह छह युवकों को वहां भेज चुके हैं इनमें तीन लौट आए हैं। पुलिस अब गैंग के सरगना इरफान और उसके सहयोगियों के बारे में जानकारी जुटा रही है।








