UPSC की तैयारी के लिए घर से भागी लड़की:  पिता शादी का दबाव बना रहे थे, एमपी हाईकोर्ट ने IAS ऑफिसर को बनाया मेंटोर
शिक्षा

UPSC की तैयारी के लिए घर से भागी लड़की: पिता शादी का दबाव बना रहे थे, एमपी हाईकोर्ट ने IAS ऑफिसर को बनाया मेंटोर

Spread the love


8 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के फैसले से भोपाल की एक लड़की का IAS बनने का सपना साकार होगा। कोर्ट ने बिहार की एक महिला IAS ऑफिसर को उसका UPSC मेंटॉर और गाइड बनाया है, ताकि वो सिविल सर्विस की प्रिपरेशन कर सके।

दरअसल, अपने पिता द्वारा जबरन शादी के लिए दबाव डालने पर लड़की घर से भाग गई थी। वो पढ़ाई जारी रखना चाहती थी और सिविल सेवा परीक्षा देना चाहती थी, जबकि पिता उस पर शादी का दबाव बना रहे थे।

चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने उसे एक ‘ब्राइट चाइल्ड यानी होशियार बच्ची’ माना है।

शादी से बचने के लिए घर से भागी

जनवरी 2025 में भोपाल के बजरिया इलाके की लड़की घर छोड़कर इंदौर चली गई थी। उसका आरोप है कि उसके पिता उसे पढ़ाई जारी रखने नहीं दे रहे थे और शादी का दबाव बना रहे थे। उसे कथित रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। परेशान होकर वो घर से निकल गई और इंदौर में एक निजी कंपनी में नौकरी करके अपना खर्च निकालने लगी और वहीं सिविल सर्विस की तैयारी के लिए कोचिंग करने लगी।

इसके बाद, लड़की के परिवार वालों ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। लेकिन महीनों तक उसका कोई सुराग नहीं मिला। इस पर पिता ने जबलपुर हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण यानी हैबियस कॉर्पस याचिका दायर की।

हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस को युवती का पता लगाने के निर्देश दिए। पुलिस ने इंदौर से उसे 10 महीने बाद बरामद किया। तब पता चला कि वो किराए पर रहते हुए एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी कर रही है और UPSC सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी में जुटी है।

इंदौर से भोपाल लाई पुलिस

इंदौर शिफ्ट होने के कुछ महीने बाद लड़की 18 साल की हुई थी। अक्टूबर महीने में उसने अपने आधार कार्ड में मोबाइल नंबर अपडेट करवाया था। इसी से पुलिस को उसकी लोकेशन का पता चला। पुलिस की टीम लड़की को इंदौर से भोपाल ले आई।

परिवार समेत वापस बिहार लौट गए थे पिता

लड़की के घर से गायब होने के बाद उसके पिता अपने अन्य 3 बच्चों की भी पढ़ाई छुड़वाकर पत्नी के साथ वापस बिहार अपने गांव चले गए थे। जब पुलिस ने युवती को उसके परिवार से मिलाने की कोशिश की, तो उसने साफ इनकार कर दिया। उसने पुलिस को बताया कि वह IAS अधिकारी बनना चाहती है और उसने स्कूल में ही पढ़ाई के साथ UPSC की तैयारी शुरू कर दी थी।

एमपी हाईकोर्ट में पेश किया गया

हैबियस कॉर्पस याचिका पर हाईकोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने 5 नवंबर को लड़की को जबलपुर उच्च न्यायालय में पेश किया। चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा और न्यायमर्ति अतुल श्रीधरन की पीठ के सामने लड़की ने पिता के साथ नहीं भेजने की गुहार लगाई। वहीं, पिता ने उसे फिर से प्रताड़ित नहीं करने का आश्वासन देकर घर भेजने का आग्रह किया।

उसके बाद कोर्ट ने कहा कि वो 4-5 दिनों तक पेरेंट्स के साथ रहकर देखे। अगर माहौल बेहतर लगे तो ठीक, नहीं तो कलेक्टर को आदेश देंगे कि वो बाहर रहने और पढ़ाई की समुचित व्यवस्था कराएं।

हाईकोर्ट ने IAS बंदना प्रेयशी को मेंटोर बनाया

कोर्ट ने अगली सुनवाई में लड़की के भविष्य को लेकर अंतिम फैसला लिया। हेबियस कॉर्पस याचिका पर हाईकोर्ट ने कहा कि लड़की ब्राइट स्टूडेंट है और सिविल सर्विस परीक्षा देने के अपने लक्ष्य को लेकर प्रतिबद्ध है।

कोर्ट ने बिहार के मुजफ्फरपुर में तैनात सामाजिक कल्याण विभाग की सचिव, IAS बंदना प्रेयशी से अनुरोध किया कि वे लड़की की ‘मेंटॉर और गाइड’ बनकर उसकी तैयारी में सहायता करें।

बंदना बिहार कैडर के 2003 बैच की IAS ऑफिसर हैं।

बंदना बिहार कैडर के 2003 बैच की IAS ऑफिसर हैं।

IAS बंदना- यह मेरे लिए बहुत सम्मान की बात

मेंटॉर और गाइड चुने जाने के बाद IAS बंदना ने कहा, ‘मुझे नहीं पता कि हाईकोर्ट ने इतने अधिकारियों में से मुझे ही क्यों चुना, लेकिन यह मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है कि मैं उस लड़की की मेंटोर बनूं।

बतौर मेंटोर बंदना एक मित्र, मार्गदर्शक और सलाहकार के रूप में रहेंगी। उसे जिस भी तरीके से जरूरत होगी, उसकी मदद करनी होगी। अगर जरूरत पड़ी तो मैं उसकी कोचिंग या पढ़ाई से जुड़ी किसी भी चीज के लिए फाइनेंशियल सहायता भी दे सकती हैं।

————————–

ये खबर भी पढ़ें…

छत्‍तीसगढ़ में स्‍कूल प्रिंसिपल करेंगे आवारा कुत्‍तों की निगरानी: काटने पर इलाज भी कराएंगे; कांग्रेस ने कहा-शिक्षक पढ़ाने के अलावा हर काम कर रहे हैं

छत्तीसगढ़ में अब स्‍कूलों के आसपास आवारा कुत्‍तों की निगरानी का काम स्‍कूल प्रिंसिपल करेंगे। राज्य स्कूल शिक्षा विभाग ने इसके निर्देश जारी किए हैं। जारी दिशानिर्देशों के तहत अब स्कूल के अंदर या आसपास के कुत्तों की निगरानी और रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी स्‍कूल प्रिंसिपल पर होगी। विभाग ने बताया कि ये दिशानिर्देश हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेशों के पालन में जारी किए गए हैं। पढ़ें पूरी खबर…

खबरें और भी हैं…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *