आपका पैसा- बिना फॉर्म 16 भी भर सकते हैं ITR:  ये 10 डॉक्यूमेंट्स रखें तैयार, जानें फाइल करने का पूरा प्रोसेस, 8 गलतियां न करें
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आपका पैसा- बिना फॉर्म 16 भी भर सकते हैं ITR: ये 10 डॉक्यूमेंट्स रखें तैयार, जानें फाइल करने का पूरा प्रोसेस, 8 गलतियां न करें

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8 घंटे पहलेलेखक: अदिति ओझा

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इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। वेतनभोगी और सामान्य टैक्सपेयर्स के लिए ITR भरने की आखिरी तारीख 31 जुलाई है। ज्यादातर नौकरीपेशा लोग फॉर्म 16 के जरिए रिटर्न फाइल करते हैं। इसमें सैलरी, TDS, टैक्स छूट और टैक्सेबल इनकम जैसी सारी जरूरी जानकारी एक जगह मिल जाती है। हालांकि, कई बार यह देर से मिलता है और कुछ लोगों को तो मिलता ही नहीं।

ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि क्या फॉर्म 16 के बिना भी ITR फाइल किया जा सकता है? जवाब है- ‘हां।’ बस इसके लिए कुछ डॉक्यूमेंट्स की जरूरत होती है।

इसलिए आज ‘आपका पैसा’ में जानेंगे कि बिना फॉर्म 16 के ITR कैसे फाइल करें। साथ ही जानेंगे कि-

  • इसके लिए कौन से डॉक्यूूमेंट्स चाहिए?
  • इसका प्रोसेस क्या है?

एक्सपर्ट: सीए अमर जैन, फाउंडर– चार्टर्ड अकाउंटेंट कंपनी ‘टैक्स प्रोवाइजर’ इंदौर

सवाल- फॉर्म 16 क्या होता है?

जवाब- फॉर्म 16 एक TDS (टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स) सर्टिफिकेट है, जिसे इंप्लॉयर अपने कर्मचारियों को देता है। इसमें पूरे फाइनेंशियल ईयर के दौरान कर्मचारी को मिली सैलरी, सैलरी से काटे गए TDS और सरकार के पास जमा किए गए उस TDS का पूरा ब्यौरा होता है। यही वजह है कि ITR भरते समय इसे सबसे जरूरी डॉक्यूमेंट में से एक माना जाता है।

सवाल- फॉर्म 16 में कौन-कौन सी जानकारी होती है?

जवाब- फॉर्म 16 दो भागों (पार्ट A और पार्ट B) में होता है। इसमें कर्मचारी की सैलरी, टैक्स और TDS से जुड़ी अहम जानकारी होती है। पूरी डिटेल नीचे ग्राफिक में देखिए-

सवाल- फॉर्म 16 मिलने पर क्या चेक करना चाहिए?

जवाब- फॉर्म 16 मिलने के बाद उसे बिना देखे ITR फाइल नहीं करना चाहिए। पहले इसमें दर्ज जानकारी का अपने डॉक्यूमेंट्स से मिलान कर लें। खासतौर पर चेक करें कि-

  • नाम, PAN और दूसरी पर्सनल डिटेल्स सही है या नहीं।
  • इंप्लॉयर का नाम और TAN (टैक्स डिडक्शन और कलेक्शन अकाउंट नंबर) सही दर्ज है या नहीं।
  • फाइनेंशियल ईयर (FY) और असेसमेंट ईयर (AY) सही हैं या नहीं।
  • कुल सैलरी आपकी सैलरी स्लिप से मेल खाती है या नहीं।
  • HRA, स्टैंडर्ड डिडक्शन और अन्य टैक्स छूट सही दिखाई गई हैं या नहीं।
  • 80C, 80D, 80CCD जैसी कटौतियां सही जोड़ी गई हैं या नहीं।
  • टैक्सेबल इनकम की गणना सही है या नहीं।
  • काटे गए TDS का अमाउंट फॉर्म 16, सैलरी स्लिप और फॉर्म 26AS में एक जैसा है या नहीं।
  • अगर आपने नौकरी बदली है, तो सभी इंप्लॉयर के फॉर्म 16 मौजूद हैं या नहीं।
  • किसी तरह की गलती मिलने पर ITR फाइल करने से पहले इंप्लॉयर से रिवाइज्ड फॉर्म 16 जारी करने को कहें।

ध्यान रखें-

फॉर्म 16 और फॉर्म 26AS/AIS में TDS की जानकारी का मिलान करना सबसे जरूरी है। इससे गलत टैक्स क्रेडिट मिलने या ITR प्रोसेसिंग में देरी जैसी समस्याओं से बचा जा सकता है।

सवाल- क्या ITR भरने के लिए फॉर्म 16 जरूरी है?

जवाब- नहीं। ITR फाइल करने के लिए फॉर्म 16 जरूरी नहीं है। हालांकि, अगर आप सैलरीड कर्मचारी हैं, तो यह सबसे उपयोगी डॉक्यूमेंट्स में से एक माना जाता है। इसमें सैलरी, टैक्सेबल इनकम, टैक्स छूट और TDS की जानकारी एक ही जगह पर आसानी से मिल जाती है।

सवाल- अगर फॉर्म 16 नहीं है तो क्या करें?

जवाब- अगर किसी कारण से फॉर्म 16 नहीं मिला है, तब भी ITR दाखिल किया जा सकता है। इसके लिए कुछ डॉक्यूमेंट्स जरूरी होते हैं। ग्राफिक में सभी डॉक्यूमेंट्स की लिस्ट देखिए-

सवाल- ITR कैसे दाखिल करें?

जवाब- स्टेप-बाय-स्टेप पूरा प्रोसेस समझते हैं-

स्टेप-1: जरूरी डॉक्यूमेंट्स जुटाएं

  • सैलरी स्लिप, बैंक स्टेटमेंट, PAN और आधार रखें।
  • फॉर्म 26AS और AIS डाउनलोड करें।
  • निवेश, टैक्स बचत और अन्य इनकम से जुड़े डॉक्यूमेंटस जुटाएं।

स्टेप-2: टोटल इनकम कैलकुलेट करें

  • पूरे साल की सैलरी जोड़ें।
  • बैंक/पोस्ट ऑफिस से मिली ब्याज आय जोड़ें।
  • किराया, कैपिटल गेन और अन्य आय (यदि हो) शामिल करें।

स्टेप-3: इनकम और TDS का मिलान करें

  • सैलरी स्लिप का TDS, फॉर्म 26AS से मिलाएं।
  • AIS में दर्ज सभी इनकम चेक करें।
  • कोई जानकारी गलत हो, तो पहले उसे ठीक करवाएं।

स्टेप-4: टैक्स छूट और कटौतियां जोड़ें

  • 80C, 80D, 80CCD जैसी लागू टैक्स डिडक्शन का क्लेम करें।
  • अगर HRA, LTA या कोई दूसरी टैक्स छूट मिलती है, तो उसे भी जोड़ें।
  • इन सभी दावों के लिए जरूरी डॉक्यूमेंट्स पहले से तैयार रखें।

स्टेप-5: टैक्स कैलकुलेट करें

  • अपनी कुल इनकम से सभी लागू टैक्स डिडक्शन घटाएं।
  • इसके बाद बचे हुए अमाउंट पर टैक्स कैलकुलेट करें।
  • अगर TDS, एडवांस टैक्स या बाकी टैक्स एडजस्ट होने के बाद भी कुछ टैक्स बचता है, तो ITR फाइल करने से पहले सेल्फ-असेसमेंट टैक्स जमा कर दें।

स्टेप-6: ITR दाखिल करें

  • सही ITR फॉर्म चुनकर रिटर्न भरें।
  • सभी जानकारी एक बार फिर चेक करें।
  • ITR जमा करने के बाद समय पर e-वेरिफाई जरूर करें।

सवाल- किन लोगों को फॉर्म 16 नहीं मिलता?

जवाब- फॉर्म 16 सिर्फ सैलरीड कर्मचारियों को इंप्लॉयर जारी करता है। इसलिए जिन लोगों की आय सैलरी का बजाय किसी अन्य सोर्स से होती है या जिनका कोई इंप्लॉयर नहीं होता, उन्हें फॉर्म 16 नहीं मिलता है। ग्राफिक में देखिए, किन्हें फॉर्म 16 नहीं मिलता है-

ध्यान रखें-

फॉर्म 16 न मिलने का मतलब यह नहीं है कि ITR नहीं भरना है। अगर आपकी इनकम आयकर नियमों के तहत ITR दाखिल करने योग्य है, तो दूसरे डॉक्यूमेंट्स की मदद से भी रिटर्न दाखिल किया जा सकता है।

सवाल- अगर जॉब बदल रहे हैं तो किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

जवाब- अगर फाइनेंशियल ईयर के दौरान नौकरी बदली है, तो ITR भरते समय इन बातों का ध्यान रखें-

  • अगर दोनों कंपनियों में TDS कटा है तो दोनों से फॉर्म 16 जरूर लें।
  • दोनों कंपनियों से मिली सैलरी जोड़कर अपनी कुल इनकम निकालें।
  • फॉर्म 26AS और AIS में दिख रहे TDS का दोनों फॉर्म 16 से मिलान करें।
  • अगर नई कंपनी को पुरानी नौकरी की सैलरी की जानकारी नहीं दी थी तो ITR में दोनों जगह की इनकम खुद जोड़कर दिखाएं।
  • अगर दोनों कंपनियों ने अलग-अलग टैक्स कैलकुलेट किया है, तो कुछ टैक्स बाकी रह सकता है। ऐसे में ITR फाइल करने से पहले जरूरत हो तो सेल्फ-असेसमेंट टैक्स जमा कर दें।
  • दोनों फॉर्म 16 में PAN, सैलरी और TDS की डिटेल्स सही हैं या नहीं, यह भी चेक कर लें।
  • सभी जानकारी का मिलान करने के बाद ही ITR फाइल करें।

ध्यान रखें-

नौकरी बदलने पर सबसे बड़ी गलती दोनों कंपनियों की सैलरी को जोड़कर नहीं दिखाना है। इससे टैक्स कम जमा हो सकता है और बाद में ब्याज या इनकम टैक्स विभाग का नोटिस भी आ सकता है।

सवाल- अगर ITR भरने के बाद फॉर्म 16 मिले और उसमें अंतर हो तो क्या करें?

जवाब- सबसे पहले यह चेक करें कि गलती कहां है। इसके बाद स्थिति के अनुसार कार्रवाई करें।

  • सबसे पहले फॉर्म 16, ITR, फॉर्म 26AS और AIS का आपस में मिलान करें।
  • अगर फर्क सिर्फ टाइपिंग या डेटा एंट्री की गलती का है तो अपने इंप्लॉयर से रिवाइज्ड फॉर्म 16 जारी करने के लिए कहें।
  • अगर सैलरी, TDS या टैक्स छूट की जानकारी अलग है और इससे टैक्स पर असर पड़ रहा है तो जरूरत के मुताबिक रिवाइज्ड या अपडेटेड ITR फाइल करें।
  • अगर आपके नाम पर ज्यादा TDS जमा हुआ है, तो संशोधित रिटर्न के जरिए रिफंड का क्लेम कर सकते हैं।
  • अगर टैक्स कम जमा हुआ है, तो बकाया टैक्स के साथ लागू ब्याज भी चुकाना पड़ सकता है।
  • अगर समझ नहीं आ रहा कि फर्क क्यों है, तो कंपनी के पेरोल विभाग या किसी टैक्स एक्सपर्ट से सलाह लें।

सवाल- बिना फॉर्म 16 ITR भरते समय कौन-सी गलतियां होती हैं?

जवाब- फॉर्म 16 के बिना ITR भरना मुश्किल नहीं है, लेकिन थोड़ी-सी लापरवाही भी परेशानी का कारण बन सकती है। इसलिए ये गलतियां करने से बचें-

  • अनुमान के आधार पर इनकम या TDS की जानकारी भर देना।
  • गलत ITR फॉर्म चुन लेना।
  • गलत फाइनेंशियल ईयर (FY) या असेसमेंट ईयर (AY) चुन लेना।
  • नौकरी बदलने पर किसी एक कंपनी की सैलरी जोड़ना भूल जाना।
  • बैंक ब्याज या दूसरी इनकम घोषित न करना।
  • शेयर, म्यूचुअल फंड या प्रॉपर्टी बेचने से हुई आय शामिल न करना।
  • PAN, बैंक अकाउंट या IFSC जैसी जानकारी गलत भर देना।
  • ITR फाइल करने के बाद e-वेरिफिकेशन भूल जाना।

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