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कॉलेज खत्म कर जॉब मार्केट के कंक्रीट के जंगल में कदम रखना हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है। लेकिन आज की युवा पीढ़ी- जेन जी के लिए यह रास्ता और भी पथरीला हो गया है। एक तरफ एआई शुरुआती नौकरियों को खत्म कर रहा है, तो दूसरी तरफ लिंक्डइन पर एआई से तराशे गए रिज्यूमे को कंपनियों के एआई-सॉफ्टवेयर चुटकी में खारिज कर रहे हैं। न्यूयॉर्क फेड के एक सर्वे के अनुसार, 40% नए कॉलेज ग्रेजुएट्स ऐसी नौकरियों में काम करने को मजबूर हैं जहां डिग्री की जरूरत ही नहीं है। ऐसे में युवाओं को दी जाने वाली दशकों पुरानी सलाह… ‘अपने सपनों और पैशन का पीछा करो’ बेअसर और भ्रमित करने वाली साबित हो रही है। सिलिकॉन वैली के दिग्गज बिल गुरली और पुलित्जर पुरस्कार विजेता पत्रकार जोडी कैंटर ने अपनी किताबों में युवाओं को वही काम करने की सलाह दी है, जिससे वे प्यार करते हैं। लेकिन दोनों लेखक एक बुनियादी गलती करते हैं, जिसे सर्वाइवरशिप बायस कहते हैं। जो लोग किसी क्षेत्र में संघर्ष कर शीर्ष पर पहुंच गए, वे यह भूल जाते हैं कि लाखों लोग उसी पैशन के चक्कर में नाकाम हो गए। उदाहरण के लिए, कनाडाई छात्रों पर हुए एक सर्वे में 90% युवाओं ने कहा कि वे संगीत, कला या खेल से प्यार करते हैं, जबकि देश के कुल जॉब मार्केट में इन क्षेत्रों की हिस्सेदारी महज 3% थी। हर किसी का शौक उसका प्रोफेशन नहीं बन सकता। बेंजामिन टॉड अपनी किताब 80,000 ऑवर्स में करियर को लेकर प्रचलित सोच को चुनौती देते हैं। उनका मानना है कि ‘अपने पैशन को फॉलो करो’ हमेशा सही सलाह नहीं है। वे कहते हैं कि पहले ऐसा कौशल विकसित करें जो दूसरों के लिए उपयोगी हो और समाज में मूल्य जोड़ सके। किसी क्षेत्र में दक्षता व प्रभाव पैदा करने से ही संतुष्टि और जुनून जन्म लेता है। टॉड कहते हैं,‘करियर की सही दिशा खोजने में समय लगना सामान्य है। टोनी ब्लेयर राजनीति से पहले रॉक-म्यूजिक प्रमोटर थे और कर्नल सैंडर्स ने 62 वर्ष की उम्र में ‘केएफसी’ शुरू की। इसलिए अपने 80,000 वर्क ऑवर्स को लेकर चिंतित होने के बजाय, किसी उपयोगी कौशल में महारत हासिल करना ही समझदारी है।’ सही रणनीति यही कि समय की लहर पर सवार हुआ जाए ख्यात लेखक बेंजामिन टॉड कहते हैं,‘माता-पिता ने बच्चों को कंप्यूटर और लॉ जैसे विषयों की पढ़ाई के लिए प्रेरित किया, लेकिन आज यही क्षेत्र एआई के कारण सबसे ज्यादा खतरे में है। टॉड का मानना है कि ऐसी नौकरी खोजने की कोशिश बेकार है जो कभी ऑटोमेट न हो। ऐसे में सही रणनीति यह है कि ‘समय की लहर पर सवार हुआ जाए।’ जैसे एटीएम आने के बाद शुरुआत में बैंक क्लर्कों की मांग बढ़ी थी, वैसे ही एआई की शुरुआत में मॉडल-ट्रेनिंग, साइबर सुरक्षा और हेल्थकेयर जैसे क्षेत्रों में नए कौशल की मांग बढ़ेगी। युवाओं को समय के साथ अपनी स्किल्स को अपग्रेड करते रहना होगा।
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