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अगर आपकी उम्र 30 साल के पार है और आप खुद को पूरी तरह फिट मानकर कोलेस्ट्रॉल की जांच टाल रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। मेडिकल जगत की प्रतिष्ठित संस्था ‘अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी’ (एसीसी) ने कोलेस्ट्रॉल प्रबंधन की गाइडलाइंस में बड़ा बदलाव किया है। नई गाइडलाइन के मुताबिक 19 साल की उम्र से हर 5 साल में लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कराना चाहिए। 30 साल की उम्र के बाद डॉक्टर 10 साल ही नहीं, अगले 30 साल तक का हार्ट रिस्क भी निकालेंगे। इसके लिए नया प्रिवेंट-एएससीवीडी कैलकुलेटर लाया गया है। यह बीएमआई, किडनी रोग के आधार पर खतरे का स्तर बताता है। यानी डॉक्टर अगले 30 साल के ‘जोखिम’ को आधार मानकर इलाज करेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि धमनियों में कोलेस्ट्रॉल का जमाव ‘स्मोकिंग’ की तरह है। जितने लंबे समय तक इसके संपर्क में रहेंगे, नुकसान उतना ज्यादा होगा। नई गाइडलाइंस में ‘नस्लीय जोखिम’ को ध्यान में रखा गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश मूल के लोगों में हार्ट डिजीज का खतरा अन्य नस्लों के मुकाबले 40% से 50% अधिक होता है। भारतीयों में ‘लिवर’ कोलेस्ट्रॉल को प्रोसेस करने में अलग तरह से व्यवहार करता है, जिससे कम उम्र में ही धमनियां ब्लॉक होने लगती हैं। इसके अलावा, लिपोप्रोटीन (ए) नाम के जेनेटिक कोलेस्ट्रॉल की जांच अब एक बार जरूर करवाने की सलाह दी गई है, क्योंकि इसे आहार या एक्सरसाइज से नहीं बदला जा सकता है। वैश्विक आंकड़ों के अनुसार, हर 5 में से 1 व्यक्ति में यह जेनेटिक खतरा मौजूद होता है। कोलेस्ट्रॉल के नए लक्ष्य सामान्य बचाव के लिए: एलडीएल का स्तर 100 mg/dL से नीचे हो। उच्च जोखिम वाले लोग: एलडीएल का लक्ष्य 70 mg/dL से कम। हार्ट अटैक या स्ट्रोक झेल चुके लोग: बहुत आक्रामक लक्ष्य, 55 mg/dL से नीचे ही रखा जाए। एपोलिपोप्रोटीन‑बी (ApoB) टेस्ट: सटीक पैमाना। अगले 10 वर्षों के जोखिम को मापता है। अगले 30 साल के दीर्घकालिक जोखिम का भी अनुमान लगाता है। कब और क्या जांच कराएं 9-11 वर्ष: एक बार जांच जरूरी (जेनेटिक खतरे का आकलन)। 19 वर्ष से ऊपर: हर 5 साल में ‘लिपिड प्रोफाइल’ टेस्ट जरूर कराएं। 30 वर्ष से ऊपर: ‘PREVENT’ कैलकुलेटर से 10 और 30 साल का रिस्क स्कोर की जांच।
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