एन. रघुरामन का कॉलम:  प्लेटफॉर्माइजेशन’ बिजनेस को री-इन्वेंट करने का नया अवसर बन रहा है
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एन. रघुरामन का कॉलम: प्लेटफॉर्माइजेशन’ बिजनेस को री-इन्वेंट करने का नया अवसर बन रहा है

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सैलरी आने के बाद पहला शनिवार है, कल्पना करें कि आज रात आप जीवनसाथी के साथ डिनर पर जा रहे हैं। आपके जीवनसाथी ने काफी सर्च के बाद नया रेस्तरां चुना, क्योंकि सर्च इंजन से पता चला कि नए रेस्तरांओं में वही सबसे पॉपुलर है। ग्राहकों ने इसे सर्वाधिक फाइव-स्टार रेटिंग दी है। लेकिन डिनर के बाद तेज बारिश शुरू हो जाती है और घर लौटने के लिए आपको एक भी कैब नहीं मिलती। बड़ी मुश्किल से आप देर रात घर पहुंचते हैं और थक कर सो जाते हैं। अब सोचिए, रविवार को आप मेहमानों को क्या बताएंगे- रेस्तरां का, या सड़क पर मिला अनुभव? भले ही आप दोनों की बात करें, लेकिन मुझे यकीन है कि आप अच्छे के बजाय बुरे अनुभव की बात ज्यादा करेंगे। अब कार या प्रॉपर्टी खरीदने का एक और उदाहरण लें। घर बैठे ऐसे व्यक्ति को कार या प्रॉपर्टी बेचने वाली विभिन्न वेबसाइटों पर जाना पड़ता है। ये साइटें अपनी कीमत बताएंगी। व्यक्ति को एक कागज पर उन कीमतों का कम्पेरेटिव चार्ट बनाना पड़ेगा। इन साइटों पर जाना कष्टदायक भले ही न हो, लेकिन यकीनन यह काम समय खाता है। ऐसी कोई अकेली साइट नहीं, जहां सभी वाहनों की कीमतें साथ में दिखाई जाएं। इंश्योरेंस कीमत, आरटीओ शुल्क और अन्य जरूरी चार्जेस भी बताए गए हों। लेकिन अब ऐसा नहीं है। सिंगापुर का डीबीएस बैंक यह करता है। उसने उत्पाद-केंद्रित रणनीति से आगे बढ़कर अनुभव-आधारित रणनीति अपनाई है। मतलब, वह अपने अलग-अलग फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स बेचने के बजाय ग्राहकों की विभिन्न जरूरतों के अनुसार इंटीग्रेटेड ऑफर पेश करता है। कार खरीदने वालों को केवल वाहन की कीमत ही नहीं मिलती, बल्कि वे अलग-अलग वाहनों की इंश्योरेंस कीमत, आरटीओ फीस की तुलना भी कर सकते हैं। साथ में बैंक की फाइनेंसिंग सुविधा भी मिलती है। इन सभी चीजों के लिए एक ही ‘प्लेटफॉर्म’ बनाकर डीबीएस बैंक अब सिर्फ कर्ज देने वाला बैंक नहीं रह गया, बल्कि उसने खुद को ग्राहक की एंड-टु-एंड जर्नी का केंद्र बना लिया है। इसका मतलब है कि ग्राहक की यात्रा को बाहर से भीतर की ओर री-डिजाइन करना, जो शुरू होती है इससे कि ‘ग्राहक क्या हासिल करना चाहता है?’ डीबीएस बैंक अब इस बात पर फोकस नहीं कर रहा कि अपने फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स कैसे बेचे। प्रॉपर्टी या कार के लिए ऋण देने को लक्ष्य बनाने के बजाय वह ऐसा कोई बन गया है, जो चाहता है कि आप कार या घर खरीदें। बैंक ने अपनी फाइनेंसिंग ऑफरिंग के साथ प्रॉपर्टी सर्च, विधिक सेवाएं, इंश्योरेंस और सामान शिफ्ट करने तक की जानकारियां जोड़कर खुद को किसी फाइनेंस प्रोवाइडर के बजाय एक ऑर्केस्ट्रेटर बना लिया है। इससे वह ग्राहक की पूरी निर्णय प्रक्रिया का डेटा कैप्चर करता है। ग्राहक से संबंध गहरे होते हैं और ग्राहक के लिए उसकी साइट को छोड़ना मुश्किल हो जाता है। ज्यादातर सर्विस प्रोवाइडर साइट पर अपनी विजिबिलिटी बढ़ाने के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। जैसे होटल पहले पांच या दस परिणामों में दिखने के लिए, या फिर रेस्तरां की तरह फाइव-स्टार रिव्यू पाने के लिए कम्पीट करते हैं। लेकिन उनमें से कितने इस बारे में सोचते हैं कि बुकिंग डेटा से जानकारी लेकर ग्राहक को पिक-अप सुविधा दी जाए। ऊपर बताए गए रेस्तरां के पास यदि अतिरिक्त शुल्क लेकर भी ड्रॉप-इन सुविधा होती और रेस्तरां मैनेजर आपको भारी बारिश की जानकारी देकर अच्छी परिवहन सुविधा का भरोसा दिलाता तो क्या आपको नहीं लगता कि रेस्तरां का अनुभव आपके लिए फाइव-स्टार से भी बेहतर होता? फंडा यह है कि कारोबार यदि डिजिटल दुनिया में सिर्फ अपने प्रोडक्ट्स प्रमोट करने के बजाय उसी साइट पर ग्राहकों को अनुभव देने लगें, तो यह ‘प्लेटफॉर्माइजेशन’ बहुत-से ग्राहकों को आकर्षित करेगा। क्योंकि यह एक ही जगह पर अलग-अलग फूलों का बुके ऑफर करने जैसा है।



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