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अमेरिका की लेखिका बेथ पिंस्कर ने अपनी चर्चित किताब ‘माय मदर्स मनी’ में अपनी मां के आर्थिक मामलों को संभालने का पूरा अनुभव साझा किया है। इसमें उन्होंने मां के अधिकारों के लिए 20 हजार मील यात्रा की। सैकड़ों घंटे फोन पर बात और ढेर सारी कागजी कार्रवाई की। उनका यह सफर आसान नहीं था। किताब से 5 ऐसी बातें पढ़ें जो भारतीय बुजुर्गों और उनके परिवारों के लिए बेहद उपयोगी हो सकती हैं। दरअसल देश में अभी भी संयुक्त परिवार मजबूत हैं, लेकिन आर्थिक जिम्मेदारी को लेकर बच्चों-बुजुर्गों के बीच स्पष्टता नहीं है। बुजुर्ग अपने अधिकारों की जानकारी जरूर रखें, ताकि आर्थिक नुकसान से बच सकें 1. अधिकारों को जानिए बुजुर्ग मां के लिए बेथ को कई मोर्चे पर लड़ना पड़ा। वे कहती हैं कि बुजुर्गों को अपने अधिकारों की जानकारी होना चाहिए, ताकि आर्थिक नुकसान से बच सकें। 2. पैसों को संभालिए माता-पिता का पैसा संभालना थकान भरा काम है, लेकिन यह प्यार की वजह से किया जाता है। भारतीय संस्कृति में तो यह और भी पवित्र है। बुजुर्गों की इच्छाओं को सुनिए, और उनकी बात मानिए। 3. आराम का ख्याल रखिए आखिरी दिनों में बेथ ने मां की आरामदायक सुविधाओं का ध्यान रखा। पैसे बचाने के बजाय बुढ़ापे में बुजुर्गों की गरिमा और आराम का ख्याल रखना चाहिए। 4. पावर ऑफ अटॉर्नी बनवाएं बेथ ने बीमारी के वक्त पावर ऑफ अटॉर्नी को वसीयत से ज्यादा अहम माना है। 60+ में पावर ऑफ अटॉर्नी बनवा लें, ताकि बैंक, प्रॉपर्टी, मेडिकल फैसले आसानी से लिए जा सकें। 5. पहले बातचीत कर लें प्रॉपर्टी, बैंक, कागजात को लेकर कई अड़चनें आएंगी, लेकिन पहले प्यार व बातचीत हो तो प्रॉपर्टी आदि पर उत्तराधिकार को लेकर परिवार में झगड़े नहीं होंगे।
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