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4 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल
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दिवाली का त्योहार नजदीक है। घरों में रंगाई-पुताई और पुराने फर्नीचर को नया लुक देने की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस रंग से घर की खूबसूरती बढ़ती है, वही रंग सेहत के लिए खतरा भी बन सकता है?
दरअसल कुछ पेंट में लेड यानी सीसा होता है। साल 2019 की ‘टॉक्सिक लिंक’ की एक स्टडी के मुताबिक, भारतीय बाजार में बिक रहे 17 में से लगभग 13 पेंट में लेड की मात्रा 10,000 ppm (पार्ट्स पर मिलियन) से ज्यादा थी। जबकि भारत सरकार द्वारा पेंट में लेड की तय सीमा 90 ppm है। लेड एक ऐसा हानिकारक तत्व है, जिसका बच्चों के ब्रेन डेवलपमेंट पर बहुत खतरनाक असर पड़ता है।
यूनिसेफ और ‘प्योर अर्थ’ की 2020 की रिपोर्ट ‘द टॉक्सिक ट्रुथ’ के अनुसार, दुनिया में करीब 80 करोड़ बच्चों (हर 3 में से 1) के ब्लड में लेड का लेवल 5 माइक्रोग्राम प्रति डेसीलीटर या उससे ज्यादा था। जबकि बच्चों में इसका कोई भी लेवल सुरक्षित नहीं माना जाता।
वहीं ‘इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन’ (IHME) की ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (GBD) की स्टडी के मुताबिक, साल 2021 में दुनिया भर में लेड एक्सपोजर के कारण लगभग 15 लाख लोगों की मौत हुई थी।
इसलिए आज ‘जरूरत की खबर‘ में दिवाली पर घर की रंगाई-पुताई से जुड़ी सावधानियाें पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- पेंट में मौजूद केमिकल्स के क्या हेल्थ रिस्क हैं?
- इनसे बचने के लिए कौन-सी सावधानियां बरतनी चाहिए?
एक्सपर्ट– डॉ. अली शेर, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली
सवाल- घर की रंगाई-पुताई के दौरान सेहत को क्या खतरे हो सकते हैं?
जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-
- पेंट से निकलने वाले केमिकल्स के बारीक कण और रासायनिक गैस हवा से सांस के जरिए शरीर में पहुंचते हैं।
- पुराने पेंट को खुरचने या घिसने से धूल उड़ती है। इसमें लेड जैसे जहरीले तत्व मौजूद हो सकते हैं।
- इन केमिकल्स के संपर्क में आने से आंखों, स्किन और रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट में जलन हो सकती है।
- बंद कमरे में पेंट के खतरनाक बारीक केमिकल्स और रासायनिक गैस जमा होती है। इससे सिरदर्द, चक्कर और सांस लेने में परेशानी हो सकती है।
- लेड एक्सपोजर खासकर बच्चों के लिए खतरनाक है। इससे उनके ब्रेन डेवलपमेंट पर नेगेटिव असर पड़ सकता है।
सवाल- पेंट में कौन-से खतरनाक केमिकल होते हैं और इसका सेहत पर क्या असर है?
जवाब- पेंट में कई तरह के खतरनाक केमिकल्स यूज किए जाते हैं, जिनके एक्सपोजर से सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। इसे ग्राफिक में देखिए-

सवाल- लेड यानी सीसा शरीर को किस तरह नुकसान पहुंचाता है?
जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-
- बच्चों में ब्रेन डेवलपमेंट के साथ लर्निंग एबिलिटी और बिहेवियर पर बुरा असर पड़ता है।
- प्रेग्नेंसी में लेड गर्भस्थ शिशु तक पहुंच सकता है और उसकी ग्रोथ को प्रभावित कर सकता है।
- लंबे समय में लेड शरीर में जमा होता है। इससे ब्रेन, किडनी, हार्ट और नर्वस सिस्टम सहित कई अंगों को नुकसान पहुंचता है।
सवाल- क्या पेंट में लेड की मौजूदगी का पता उसकी स्मेल या रंग से लगाया जा सकता है?
जवाब- नहीं, सिर्फ स्मेल या रंग से पेंट में लेड होने का पता नहीं लगाया जा सकता। इसके लिए ये तरीके अपनाएं-
- पेंट के डिब्बे पर दी गई सामग्री और सुरक्षा संबंधी जानकारी पढ़ें।
- कंपनी की वेबसाइट पर पेंट में मौजूद केमिकल्स की जानकारी देखें।
- सिर्फ ‘इको-फ्रेंडली’ या ‘नॉन-टॉक्सिक’ लिखे होने से पेंट को लेड-फ्री न मानें।
- शक होने पर मान्यता प्राप्त लैब से पेंट की जांच कराएं।
सवाल- VOC (वोलेटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड्स) क्या हैं और ये क्यों खतरनाक हैं?
जवाब- ये ऐसे केमिकल हैं, जिनका यूज कुछ पेंट, वार्निश और थिनर में होता है। इसे पेंट को जल्दी सूखने, सतह पर आसानी से फैलने उसकी फिनिश बेहतर बनाने के लिए किया जाता है। इनके एक्सपोजर से-
- आंख, नाक और गले में जलन हो सकती है।
- सिरदर्द, चक्कर आना या मतली हो सकती है।
- सांस लेने में परेशानी हो सकती है।
- लिवर, किडनी और नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुंच सकता है।
- कुछ VOC से कैंसर का रिस्क भी बढ़ता है।
सवाल- क्या वाटर-बेस्ड पेंट सॉल्वेंट बेस्ड-पेंट से ज्यादा सुरक्षित हैं?
जवाब- आमतौर पर वाटर-बेस्ड पेंट में कई सॉल्वेंट-बेस्ड प्रोडक्ट्स की तुलना में VOC’s कम हो सकते हैं। लेकिन ध्यान रखें-
- वाटर-बेस्ड का मतलब यह नहीं कि पेंट पूरी तरह केमिकल-फ्री है।
- इसमें भी प्रिजर्वेटिव्स या दूसरे केमिकल्स हो सकते हैं।
ऐसे में पेंट खरीदते समय इन बाताें का ध्यान रखें-

सवाल- पुराने पेंट को खुरचने या घिसने में ज्यादा रिस्क क्यों है?
जवाब- पुराने पेंट को खुरचने या घिसने से उसमें मौजूद लेड के बारीक कण धूल में मिल सकते हैं। इससे घर की हवा और सतहें दूषित हो सकती हैं। यह धूल बच्चों के खिलौनों, हाथों और खाने-पीने की चीजों तक पहुंचकर शरीर में लेड पहुंचने का खतरा बढ़ाती है।
सवाल- घर की पुताई के दौरान बच्चों और गर्भवती महिलाओं को क्या सावधानी रखनी चाहिए?
जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-
- पुताई शुरू होने से पहले बच्चों और प्रेग्नेंट महिलाओं के रहने की दूसरी जगह तय करें।
- इन दौरान उन्हें उस कमरे से दूर रखें।
- खिड़कियां-दरवाजे खोलें, ताकि पर्याप्त वेंटिलेशन बना रहे।
- पेंट, थिनर और पेंटिंग के औजार बच्चों की पहुंच से दूर रखें।
- पेंटिंग के दौरान खिलौने और बच्चों का सामान उस जगह से हटा दें।
- काम के बाद सतहों की उचित सफाई होने तक बच्चों को वहां न खेलने दें।
सवाल- पेंटिंग के दौरान घर में वेंटिलेशन कैसे बनाए रखें?
जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-
- कमरे की खिड़कियां-दरवाजे खुले रखें।
- एग्जॉस्ट फैन चलाएं, ताकि पेंट की गंध, हवा में फैले बारीक केमिकल्स और रासायनिक गैसें बाहर निकल सकें।
- सिर्फ एयर कंडीशनर पर निर्भर न रहें, क्योंकि यह बाहर की ताजी हवा नहीं लाता।
- पुताई पूरी होने के बाद भी निर्देशों के मुताबिक कमरे में वेंटिलेशन का इंतजाम बनाए रखें।
सवाल- दिवाली पर घर की पुताई करवाते समय सबसे जरूरी सावधानियां क्या हैं?
जवाब- इस दौरान ग्राफिक में दी गई कुछ बातों का खास ख्याल रखें-

सवाल- क्या पुताई के दौरान सिर्फ मास्क पहनना पर्याप्त है?
जवाब- नहीं, सामान्य मास्क पेंट की रासायनिक गैसों और केमिकल्स के बारीक कणों से पूरी सुरक्षा नहीं देता। इसके लिए सही रेस्पिरेटर, अच्छा वेंटिलेशन और पेंट के संपर्क को कम करना भी जरूरी है।
सवाल- वुडन फर्नीचर, खिड़की और दरवाजों की पॉलिश से क्या रिस्क हो सकता है?
जवाब- इसमें VOCs और दूसरे केमिकल हो सकते हैं। इनके संपर्क में आने से हेल्थ प्रॉब्लम्स होती हैं, जैसेकि–
- आंखों और त्वचा में जलन।
- सिरदर्द और चक्कर।
- सांस लेने में परेशानी हो सकती है।
लंबे समय में कुछ केमिकल्स लिवर, किडनी और नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
सवाल- पेंटिंग के कितनी देर बाद घर में लौटना सुरक्षित है?
जवाब- इसका कोई एक निश्चित समय नहीं है। यह पेंट की किस्म, इस्तेमाल की मात्रा, वेंटिलेशन, तापमान और नमी पर निर्भर करता है। आमतौर पर 5-7 दिन बाद जोखिम काफी कम हो जाता है।

सवाल- क्या पेंट की धूल और बचे हुए केमिकल की सफाई के लिए खास सावधानी जरूरी है?
जवाब- हां, इस दौरान इन बातों का ध्यान रखें-
- धूल को सूखे कपड़े या झाड़ू से न उड़ाएं।
- प्रोफेशनल्स से उचित सफाई करवाएं।
- पेंट और थिनर के बचे हुए हिस्सों को नाली में न बहाएं।
- पेंट, थिनर और क्लीनिंग केमिकल्स को बच्चों की पहुंच से दूर रखें।
सवाल- पुताई के दौरान किन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?
जवाब- केमिकल वेपर्स या धूल के संपर्क में आने पर ये लक्षण दिख सकते हैं-
- आंखों, नाक या गले में तेज जलन।
- सिरदर्द, चक्कर या मतली।
- खांसी, सांस लेने में परेशानी या सीने में जकड़न।
- त्वचा पर खुजली या चकत्ते।
ऐसे में तुरंत उस जगह से बाहर निकलें और ताजी हवा में जाएं। सांस लेने में परेशानी होने पर तत्काल मेडिकल हेल्प लें।
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ग्राफिक्स- विपुल शर्मा
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