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1 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल
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डिजिटल दौर में स्मार्टफोन के एक क्लिक पर सबकुछ उपलब्ध है। कई लोग तो अपनी सेहत के लिए भी स्मार्टफोन या स्मार्टवॉच पर निर्भर हैं। लोग हार्ट रेट, स्लीप पैटर्न, कैलोरी काउंट से लेकर ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल तक सबकुछ हेल्थ एप से मॉनिटर कर रहे हैं।
‘प्रसार भारती’ की एक हालिया रिपोर्ट मुताबिक, पिछले कुछ सालों में भारत में हेल्थ एप्स के इस्तेमाल में लगभग 249% की बढ़ोत्तरी हुई है। यानी लोग हेल्थ सॉल्यूशन के लिए एप्स का सहारा ले रहे हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हेल्थ एप्स कैसे काम करते हैं और इन पर भरोसा करना कितना सही है।
इसलिए ‘जरूरत की खबर‘ में आज हेल्थ एप्स पर विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे-
- हेल्थ एप्स कैसे काम करते हैं?
- इन्हें यूज करते समय क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?
एक्सपर्ट: डॉ. रोहित शर्मा, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, जयपुर
सवाल- स्मार्टफोन हेल्थ एप्स क्या हैं?
जवाब- ये एप्स रोजमर्रा की फिजिकल एक्टिविटीज को ट्रैक और मैनेज करने में मदद करते हैं। ये फोन के सेंसर, एल्गोरिद्म या वियरेबल डिवाइस (जैसे स्मार्टवॉच/फिटनेस बैंड) से मिले डेटा के आधार पर जानकारी देते हैं।
सवाल- हेल्थ एप्स कितनी तरह के होते हैं?
जवाब- हेल्थ एप्स अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से तैयार किए जाते हैं। जैसेकि-
- फिटनेस ट्रैकिंग एप्स।
- वेलनेस और लाइफस्टाइल ट्रैकिंग एप्स।
- मेडिकल/हेल्थ मॉनिटरिंग एप्स।
- मेंटल हेल्थ मॉनिटरिंग एप्स।
- वियरेबल कनेक्टेड एप्स।
सवाल- हेल्थ एप्स कैसे काम करते हैं?
जवाब- हेल्थ एप्स डेटा के आधार पर अनुमान लगाते हैं। जैसेकि-
- वियरेबल डिवाइस यानी स्मार्टवॉच/बैंड के सेंसर यूजर की मूवमेंट, स्टेप्स और एक्टिविटी को रिकॉर्ड करते हैं।
- एप कैमरे और फ्लैश की मदद से ब्लड फ्लो का पता लगाते हैं, जिससे हार्ट रेट का अनुमान लगाया जाता है।
- एप यूजर की उम्र, वजन, लंबाई, जेंडर जैसी जानकारी के आधार कैलोरी बर्न और स्लीप स्कोर का पता लगाते हैं।
- एप इस डेटा को प्रोसेस करके ग्राफ, रिपोर्ट या अलर्ट के रूप में दिखाता है।

सवाल- क्या हेल्थ एप्स का डेटा सचमुच भरोसेमंद होता है?
जवाब- डॉ. रोहित शर्मा के मुताबिक, हेल्थ एप्स अनुमान के आधार पर काम करते हैं। इसलिए इन पर पूरी तरह भरोसा करना सही नहीं है। इन्हें मेडिकल रिजल्ट या इलाज का बेस बनाना रिस्की हो सकता है।
सवाल- लोग इन एप्स पर भरोसा क्यों करते हैं?
जवाब- इसके कई कारण हैं-
- कुछ सेकेंड में डेटा मिल जाता है, जो इसे सुविधाजनक बनाता है।
- लोग मानते हैं कि ‘डिजिटल मतलब सटीक,’ जबकि हमेशा ऐसा नहीं होता है।
- ग्राफ, स्कोर, ‘रेड अलर्ट‘ जैसे फीचर्स भरोसा पैदा करते हैं, जबकि ये अनुमानित होते हैं।
- समय और मेहनत बचाने के लिए लोग एप को आसान विकल्प मानते हैं।
सवाल- क्या ये एप्स डॉक्टर की जगह ले सकते हैं?
जवाब- नहीं, ये केवल यूजर की एक्टिविटीज या कुछ पैरामीटर्स का अनुमान दिखाते हैं। जबकि सही इलाज के लिए क्लिनिकल एक्सपर्ट की जरूरत होती है।
सवाल- डॉक्टर और मेडिकल एक्सपर्ट इन एप्स के बारे में क्या कहते हैं?
जवाब- डॉ. रोहित शर्मा के मुताबिक, हेल्थ एप्स सुविधाजक जरूर हैं, लेकिन ये डॉक्टर और क्लिनिकल टेस्ट का विकल्प नहीं हो सकते हैं।
- ज्यादातर एप्स एल्गोरिदम पर काम करते हैं। इसलिए इनकी रीडिंग पूरी तरह सटीक नहीं होती है।
- एप के डेटा के आधार पर इलाज या दवा तय करना खतरनाक हो सकता है।
- इनका इस्तेमाल फिटनेस, रूटीन और ट्रेंड देखने तक ही सीमित रखें।
सवाल- क्या WHO या अन्य हेल्थ ऑर्गनाइजेशंस की इन एप्स पर कोई एडवाइजरी है?
जवाब- ‘वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन’ (WHO) के मुताबिक, स्मार्टफोन में ऐसा स्पेशलाइज्ड मेडिकल हार्डवेयर नहीं होता, जो ब्लड प्रेशर या शुगर की सटीक रीडिंग बता सके। इसलिए इन एप्स के डेटा को मेडिकल डिसीजन का आधार नहीं बनाना चाहिए।
सवाल- अलग-अलग एप्स का डेटा अलग क्यों होता है?
जवाब- हर एप का काम करने का तरीका और तकनीक अलग होती है। इसलिए डेटा अलग होना सामान्य है।
- हर एप अपने अलग एल्गोरिदम से डेटा प्रोसेस करता है। इसलिए एक ही इनपुट पर अलग-अलग रिजल्ट आ सकते हैं।
- हर स्मार्टफोन या वियरेबल डिवाइस के सेंसर अलग होते हैं। कैमरा, लाइट और सेंसिंग क्षमता में फर्क से रीडिंग बदल सकती है।
- इन एप्स पर उम्र, वजन, हाइट जैसी डिटेल्स हम खुद भरते हैं। इसमें थोड़ी सी गलती से डेटा बदल सकता है।
सवाल- क्या इन एप्स से बीपी, शुगर मापना ठीक है? क्या इनके डेटा पर भरोसा कर सकते हैं?
जवाब- नहीं, स्मार्टफोन हेल्थ एप्स से बीपी या शुगर मापना भरोसेमंद नहीं है। इसके लिए लैब टेस्ट जरूरी होता है। हेल्थ एप्स पर भरोसा करके इलाज या दवा लेना खतरनाक हो सकता है।
सवाल- हेल्थ एप्स के डेटा पर भरोसा करने के क्या रिस्क हो सकते हैं?
जवाब- हेल्थ एप्स पर जरूरत से ज्यादा भरोसा रिस्की हो सकता है, क्योंकि इनका डेटा सटीक नहीं होता और ये गलत डिसीजन का कारण बन सकता है। सभी रिस्क ग्राफिक में देखिए-

सवाल- क्या हेल्थ एप्स हमारे डेटा को सुरक्षित रखते हैं?
जवाब- नहीं, कई हेल्थ एप्स सेंसिटिव डेटा कलेक्ट करते हैं।
- इन एप्स में हेल्थ रिकॉर्ड, लोकेशन, डिवाइस डिटेल्स, यहां तक कि यूजर की आदतों से जुड़ा डेटा भी लिया जाता है।
- यह डेटा विज्ञापन कंपनियों के साथ शेयर किया जा सकता है।
- यूजर्स अक्सर बिना शर्तें पढ़े सेंसिटिव डिटेल्स की परमिशन दे देते हैं, जो रिस्की हो सकता है।
- कमजोर सिक्योरिटी या अनवेरिफाइड एप्स में डेटा चोरी या लीक होने का रिस्क हो सकता है।
सवाल- हेल्थ एप्स का सही इस्तेमाल कैसे करें?
जवाब- हेल्थ एप्स का उपयोग समझदारी से करें। ग्राफिक में देखिए, हेल्थ एप्स का इस्तेमाल किन कामों के लिए करें और किन कामों के लिए नहीं-

सवाल- हेल्थ एप चुनते समय क्या ध्यान रखें?
जवाब- हेल्थ एप चुनते समय फीचर्स के साथ उसकी विश्वसनीयता और डेटा सिक्योरिटी का ध्यान रखें। सभी जरूरी सावधानियां ग्राफिक में देखिए-

सवाल- अगर एप से गलत जानकारी मिली और नुकसान हुआ तो क्या करें?
जवाब- सबसे पहले घबराएं नहीं। डॉक्टर से कंसल्ट करें और जरूरी टेस्ट करवाएं। साथ ही उस एप का इस्तेमाल बंद कर दें।
- संबंधित प्लेटफॉर्म पर शिकायत दर्ज करें।
- भारत सरकार के साइबर क्राइम पोर्टल पर रिपोर्ट करें।
- बैंक या पेमेंट से जुड़ा मामला हो तो तुरंत अपने बैंक को सूचित करें।
- ऐसे एप्स से बचने के लिए उनकी प्राइवेसी पॉलिसी और विश्वसनीयता जरूर जांचें।
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