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दिल्ली विकास प्राधिकरण ने लैंड पूलिंग नीति को गति देने के लिए गांवों में जागरूकता शिविर शुरू किए हैं। उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू के निर्देश पर महीनेभर चलने वाले सुधार उत्सव अभियान के तहत किसानों और भूमि मालिकों को नीति के फायदे और विकास योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। डीडीए के मुताबिक, लैंड पूलिंग नीति करीब 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में लागू है, जहां लगभग 12 लाख नए घर बनाने की क्षमता है। इसके तहत भूमि मालिक डीडीए के साथ साझेदारी में स्वेच्छा से अपनी जमीन नियोजित विकास के लिए दे सकेंगे। तीन गांवों में शिविर, पांच और जगह लगेंगे डीडीए ने बक्करवाला, तिगीपुर और सुल्तानपुर डबास में जागरूकता शिविर आयोजित किए हैं। इनमें भूमि मालिकों ने अधिकारियों से नीति के क्रियान्वयन और जमीन से जुड़े सवाल पूछे। अधिकारियों के अनुसार, जमीन के भूखंडों के विवरण सहित सड़क नेटवर्क योजना जल्द अधिसूचित होगी। अगले चरण में छावला, सारंगपुर, नेब सराय, खेड़ा कलां और मुखमेलपुर में शिविर लगेंगे। वहीं, गढ़ी खसरो और इब्राहिमपुर गांवों का सेक्टर 8बी नीति के तहत पहला अधिसूचित कार्यान्वयन योग्य क्षेत्र बना है। मास्टर प्लान-2047 के तहत विकास डीडीए के अनुसार, नीति का उद्देश्य नियोजित आवासीय क्षेत्रों के साथ बेहतर सड़कें, व्यावसायिक केंद्र और रोजगार के अवसर विकसित करना है। इसके लिए 20 हेक्टेयर की छोटी नियोजन योजनाओं के जरिए चरणबद्ध विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। 600 किमी सड़कें और हाई डेंसिटी कॉरिडोर योजना के तहत 30 मीटर या उससे अधिक चौड़ी सड़कों का नेटवर्क विकसित करने की योजना है, जिसमें 600 किमी से ज्यादा सड़कें बनेंगी। इससे छोटे क्षेत्रों में भी चरणबद्ध विकास संभव होगा। यूईआर-II के किनारे आवास, व्यावसायिक गतिविधियों और वेयरहाउसिंग को बढ़ावा मिलेगा। करीब 200 वर्ग किमी क्षेत्र में आवास निर्माण की संभावित क्षमता।
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