नई जगह पर क्यों नहीं आती चैन की नींद?:  वैज्ञानिक बोले-अनजान बिस्तर पर दिमाग का बायां हिस्सा रहता है सतर्क, पसंदीदा चीजें साथ रहें तो समस्या कम होगी
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नई जगह पर क्यों नहीं आती चैन की नींद?: वैज्ञानिक बोले-अनजान बिस्तर पर दिमाग का बायां हिस्सा रहता है सतर्क, पसंदीदा चीजें साथ रहें तो समस्या कम होगी

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आप किसी शानदार यात्रा पर हैं। दिन भर की दौड़-धूप के बाद थकान से शरीर टूट रहा है। शाम को होटल रूम के मखमली बिस्तर पर नींद लेना चाहते हैं, लेकिन अजीब लग रहा है। मिनी फ्रिज की हल्की गूंज भी शोर लगने लगती है या हल्की लाइट भी आंखों में चुभती सी महसूस होती है या सड़क से गुजरती गाड़ियों की हल्की आवाज भी नींद उड़ा देती है। अगर ऐसा होता है, तो ये महसूस करने वाले आप अकेले नहीं हैं और न ही ये कोई बीमारी है। वैज्ञानिकों के अनुसार, जब हम किसी नई या अनजान जगह पर होते हैं, तो हमारा दिमाग सतर्क हो जाता है। इसे ‘फर्स्ट-नाइट इफेक्ट’ कहते हैं। शोध बताते हैं कि नई जगह पर पहली रात गहरी नींद के दौरान भी हमारे मस्तिष्क का बायां हिस्सा ‘चौकीदार’ की तरह पहरा देता रहता है। वह अपरिचित आवाजों के प्रति इतना सतर्क होता है कि हल्का सा शोर भी आपको जगा देता है। अच्छी खबर यह है कि जैसे ही दिमाग उस जगह को सुरक्षित मान लेता है, दूसरी रात से आप चैन की नींद सो पाते हैं। अमेरिकी नींद विशेषज्ञ व कोच डॉ. डेयना ईस्टन बताती हैं कि नींद के लिए शरीर को दो संकेतों की जरूरत होती है- पहला आंतरिक और दूसरा बाहरी। आंतरिक सं​केत में शरीर के तापमान का गिरना और मेलाटोनिन हार्मोन का बढ़ना प्रमुख है। बाहरी संकेत में अंधेरा, शांति और जाना-पहचाना वातावरण। नई जगह पर बाहरी संकेत बदल जाते हैं। होटल का तेज प्रकाश, अलग तरह का गद्दा और अनजानी गंध हमारे उत्तेजक तंत्र को सक्रिय रखती है। सफर का तनाव या अगले दिन की मीटिंग की चिंता इस स्थिति को और गंभीर बना देती है। वहीं, कुछ लोग घर के मुकाबले बाहर बेहतर सोते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा तब होता है, जब घर का माहौल काम के तनाव या जिम्मेदारियों से भरा हो। अच्छी नींद लेना है तो सफर में भी अपनी दिनचर्या न बदलें अपना तकिया साथ रखें-परिचित गंध और स्पर्श दिमाग को ‘सुरक्षा’ का अहसास कराते हैं। रूटीन न बदलें: घर पर सोने से पहले जो किताब पढ़ते हैं या संगीत सुनते हैं, उसे सफर में भी जारी रखें। लाइट, शोर का प्रबंधन: आई-मास्क और ईयर प्लग का इस्तेमाल करें। सफर के अगले दिन ज्यादा व्यस्त कार्यक्रम न रखें, क्योंकि पहली रात की नींद अधूरी रहने की संभावना 80% होती है।



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