पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  उत्साह को उदासी में बदलने वाले मन पर काम करते रहें
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: उत्साह को उदासी में बदलने वाले मन पर काम करते रहें

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3 घंटे पहले

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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar

पं. विजयशंकर मेहता

कहा तो जाता है कि हर काम उत्साह से किया जाए। और यह भी सत्य है कि बिना दबाव के इन दिनों कोई काम हो ही नहीं सकता। तो उत्साह को समझा जाए। हम अपने अतीत का बोझ लेकर न चलें, वर्तमान पर हमारी पकड़ हो और भविष्य में होने वाले परिवर्तनों से हम अपने को जोड़ें।

ये तीन काम सही ढंग से करें तो इसका परिवर्तन उत्साह में होता है। कोई भी उत्साह में तभी रह सकता है, जब भूत, वर्तमान और भविष्य पर ठीक से काम करे। छोटा-सा काम भी हो, पर उत्साह बना रहे। तुलसीदास जी ने लिखा- बालचरित कहि बिबिधि बिधि मन महँ परम उछाह।

काकभुशुंडि जी ने मन में परम उत्साह भरकर बाल लीला बोली। अब इस प्रसंग में तो वो कथा सुना रहे थे, लेकिन फॉर्मूला उन्होंने यही अपनाया कि जो करो, उत्साह से करो। शरीर भले थक जाए, उत्साह भंग नहीं होना चाहिए। उत्साह को उदासी में बदलता है मन। इसलिए मन पर काम करते रहिए। जो भी काम करो, भूत, वर्तमान और भविष्य पर दृष्टि रखो, पकड़ रखो- उत्साह बना रहेगा।

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