पेरेंटिंग- मेरी बेटी को लगता है, वो मोटी है:  अपनी तुलना सोशल मीडिया वाली लड़कियों से करती है और दुखी होती है, उसे कैसे समझाऊं?
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पेरेंटिंग- मेरी बेटी को लगता है, वो मोटी है: अपनी तुलना सोशल मीडिया वाली लड़कियों से करती है और दुखी होती है, उसे कैसे समझाऊं?

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17 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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सवाल- मैं दिल्ली से हूं। मेरी 14 साल की बेटी है। पिछले कुछ महीनों से मैं नोटिस कर रही हूं कि वह अपने लुक्स और बॉडी को लेकर काफी इनसिक्योर महसूस करने लगी है। कभी वह अपने वजन को लेकर परेशान रहती है, तो कभी अपनी स्किन या हाइट को लेकर।

वह अक्सर अपनी तुलना सोशल मीडिया पर दिखने वाली लड़कियों से करती है और कई बार खुद को कमतर महसूस करती है। मुझे उसकी चिंता हो रही है। उसे कैसे समझाऊं कि असली खूबसूरती क्या होती है और उसका आत्मविश्वास कैसे बढ़ाऊं?

एक्सपर्ट: डॉ. अमिता श्रृंगी, साइकोलॉजिस्ट, फैमिली एंड चाइल्ड काउंसलर, जयपुर

जवाब- सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। किशोरावस्था यानी टीनएज वह समय है, जब बच्चे अपनी बॉडी, लुक्स और दूसरों की राय को लेकर सेंसिटिव होते हैं। प्यूबर्टी की एज यानी 13-18 साल की उम्र में तेजी से शारीरिक और मानसिक बदलाव होते हैं।

इस उम्र में सोशल मीडिया ट्रेंड्स और दोस्तों से वैलिडेशन पाने की चाहत बढ़ती है। इसके कारण परफेक्ट दिखने का दबाव बनता है।

ऐसे में अपने लुक्स को लेकर इनसिक्योर महसूस करना कॉमन है। हालांकि इसे सिर्फ एक फेज कहकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि लगातार नेगेटिव बॉडी इमेज बच्चे के आत्मविश्वास और मेंटल हेल्थ को प्रभावित कर सकती है।

पहले समझिए, बॉडी इमेज क्या होती है?

  • व्यक्ति अपने शरीर, चेहरे, वजन, रंग और लुक्स को लेकर जैसा महसूस करता है, उसे बॉडी इमेज कहते हैं। यह पॉजिटिव भी हो सकती है और नेगेटिव भी।
  • जब कोई खुद को दूसरों से कम सुंदर या कम आकर्षक समझने लगे तो इसे नेगेटिव बॉडी इमेज कहा जाता है।

टीनएज में बॉडी इमेज को लेकर चिंता क्यों होती है?

इस फेज में शरीर और भावनाओं दोनों में बदलाव आते हैं। इस दौरान बच्चे खुद को दूसरों की नजर से देखने लगते हैं। उन्हें लगता है कि लोग उनके लुक्स को जज कर रहे हैं। सोशल मीडिया ने इस समस्या को और बढ़ा दिया है।

इंस्टाग्राम, स्नैपचैट और शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म्स पर बच्चे हर समय ऐसे चेहरे देखते हैं, जो फिल्टर, मेकअप, एडिटिंग और कैमरा एंगल की मदद से ‘परफेक्ट’ बनाए जाते हैं। बच्चे असल जिंदगी और सोशल मीडिया के बीच फर्क नहीं कर पाते हैं। टीनएज में बॉडी इमेज को लेकर चिंता के पीछे कई अन्य वजहें भी हैं। इसे ग्राफिक में देखिए-

सोशल मीडिया का बॉडी इमेज पर प्रभाव

टीनएज बॉडी इमेज पर अब तक कई स्टडीज हो चुकी हैं, जो बताती हैं कि सोशल मीडिया और इंटरनेट किशोर लड़कियों के आत्मविश्वास, मेंटल हेल्थ और खुद को देखने के नजरिए को गहराई से प्रभावित कर रहे हैं।

  • साल 2023 में ‘अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन‘ (APA) की एक स्टडी के मुताबिक, टीनएज लड़कियां सोशल मीडिया पर जितना ज्यादा समय बिताती हैं, उनमें बॉडी इमेज को लेकर असंतोष उतना ही बढ़ता है।
  • एडिटेड तस्वीरें, ब्यूटी फिल्टर्स और ‘परफेक्ट बॉडी’ कंटेंट देखने से टीनएजर्स में खुद की तुलना करने की आदत बढ़ती है। इससे एंग्जाइटी, लो सेल्फ-एस्टीम और ईटिंग डिसऑर्डर का रिस्क बढ़ता है।
  • वहीं साल 2021 में ‘मेटा’ की इंटरनल रिसर्च लीक होने के बाद सामने आया कि इंस्टाग्राम टीनएज लड़कियों की बॉडी इमेज पर नेगेटिव असर डाल रहा है।
  • इस स्टडी में करीब 32% किशोरियों ने माना कि जब वे अपनी बॉडी को लेकर पहले से परेशान होती थीं, तब इंस्टाग्राम उनकी समस्या और बढ़ा देता था।

आइए, अब इस समस्या के समाधान पर बात करते हैं-

बेटी की भावनाओं को हल्के में न लें

अक्सर माता-पिता अपनी टीनएज बेटी को समझाने के लिए तुरंत बोल देते हैं-

  • “तुम बिल्कुल ठीक लगती हो।”
  • “तुम बेवजह सोच रही हो।”
  • “इतनी छोटी बात पर परेशान मत हो।”

हालांकि ऐसा कहने के पीछे प्यार होता है, लेकिन कई बार बेटी ये सोच सकती है कि उसकी भावनाओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। इसलिए सबसे पहले उसकी बात सुनिए। अगर वह कहती है कि उसे अपनी स्किन, वजन या हाइट पसंद नहीं है, तो तुरंत समझाने की बजाय पूछें कि-

  • “तुम ऐसा क्यों महसूस कर रही हो?”
  • “क्या किसी ने कुछ कहा है?”
  • “क्या सोशल मीडिया देखकर ऐसा लगता है?”

जब बच्चे अपनी बात खुलकर कह पाते हैं, तो उन्हें भावनात्मक रूप से सुरक्षा का अहसास होता है।

सोशल मीडिया की ‘परफेक्ट दुनिया’ का सच समझाएं

बेटी काे बताएं कि सोशल मीडिया पर हर कोई अपनी जिंदगी का ‘सबसे अच्छा हिस्सा’ दिखाता है। कोई अपनी परेशानियां और इनसिक्योरिटीज नहीं दिखाता। बच्चे यह नहीं समझ पाते कि-

  • ज्यादातर तस्वीरें फिल्टर्ड और एडिट की हुई होती हैं।
  • तस्वीरों में कैमरा एंगल, मेकअप और लाइटिंग बहुत फर्क डालते हैं।
  • सोशल मीडिया पर लोग अपनी जिंदगी का सिर्फ ‘बेस्ट पार्ट’ दिखाते हैं।

बेटी से खुलकर इस बारे में बात करें कि-

  • सोशल मीडिया रियल लाइफ नहीं है।
  • हर इंसान अपने आप में खूबसूरत होता है।
  • हर किसी की ग्रोथ अलग स्पीड से होती है।
  • सुंदरता का कोई एक तय पैमाना नहीं होता।
  • व्यक्ति मन से सुंदर होता है।

सोशल मीडिया को रियल लाइफ मानने के संभावित खतरे ग्राफिक में देखिए-

सिर्फ लुक्स की तारीफ न करें

अगर बच्चों को हमेशा सिर्फ “तुम बहुत सुंदर लग रही हो” जैसे कॉम्प्लिमेंट मिलते हैं, तो वे अपनी पहचान को केवल लुक्स से जोड़ने लगते हैं।

बेटी को यह समझाएं कि खूबसूरती सिर्फ चेहरे, रंग या शरीर तक सीमित नहीं होती। असली खूबसूरती में कई चीजें शामिल होती हैं-

  • आत्मविश्वास
  • व्यवहार
  • दयालुता
  • सोच
  • ईमानदारी
  • दूसरों के प्रति सम्मान

बच्ची को बताएं कि दुनिया में हर इंसान अलग है और यही उसकी सबसे बड़ी खूबी है। इसके साथ ही आप बेटी की दूसरी खूबियों की तारीफ करें। जैसेकि-

  • उसकी मेहनत
  • उसका व्यवहार
  • उसकी समझदारी
  • उसकी क्रिएटिविटी
  • उसकी हॉबी
  • उसकी दयालुता

जब बच्ची समझती है कि उसकी वैल्यू सिर्फ चेहरे या बॉडी से तय नहीं होती, तब उसका आत्मविश्वास मजबूत होता है।

घर का माहौल पॉजिटिव रखें

बच्चे सिर्फ बातें नहीं सुनते, वे घर का माहौल भी महसूस करते हैं। अगर घर में बार-बार वजन, रंग, हाइट या लुक्स को लेकर बातें होती हैं, तो इसका असर बच्चों पर पड़ता है। उदाहरण के लिए-

  • “तुम मोटी लग रही हो।”
  • “थोड़ा गोरा रंग होता तो अच्छा लगता।”
  • “कितना वजन बढ़ गया है।”

ऐसी बातें बच्चे के मन में गहराई तक बैठ सकती हैं। इसलिए कोशिश करें कि घर में-

  • बॉडी शेमिंग बिल्कुल न हो।
  • किसी के रंग या वजन का मजाक न बने।
  • सुंदर होने जैसी सोच को बढ़ावा न मिले।

बच्ची का कॉन्फिडेंस बढाने के लिए ग्राफिक में दी गई कुछ और बातों का ध्यान रखें-

बेटी के साथ क्वालिटी टाइम बिताएं

कई बार बच्चे इसलिए भी ज्यादा इनसिक्योरिटी महसूस करते हैं, क्योंकि उन्हें इमोशनल सपोर्ट की जरूरत होती है। अपनी बेटी के साथ समय बिताएं।

  • उसके साथ वॉक पर जाइए।
  • उसकी हॉबी बढ़ाव दीजिए।
  • उसकी बातों काे ध्यान से सुनिए।
  • साथ खाना बनाइए।

जब बच्चे को लगता है कि उसे बिना किसी जजमेंट के स्वीकार किया जा रहा है, तो उसका आत्मविश्वास धीरे-धीरे बढ़ने लगता है।

कब सतर्क होने की जरूरत है?

अगर बच्ची-

  • खुद को कमतर आंकने लगे।
  • खाना बहुत कम या ज्यादा खाने लगे।
  • लोगों से मिलना-जुलना कम कर दे।
  • हर समय अपनी फोटो को लेकर परेशान रहे।
  • लगातार उदास या चिड़चिड़ी रहने लगे।
  • सोशल मीडिया के बिना बेचैन महसूस करे।

तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए। जरूरत पड़े तो चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट या काउंसलर की मदद लेना बेहतर है।

अंत में यही कहूंगी कि आपकी बेटी को इस समय सबसे ज्यादा जरूरत ‘परफेक्ट दिखने’ की नहीं, बल्कि यह महसूस करने की है कि वह जैसी है, वैसी ही प्यार, सम्मान और स्वीकार्यता की हकदार है। जब घर से उसे भरोसा, भावनात्मक सुरक्षा और बिना शर्त प्यार मिलेगा, तो धीरे-धीरे वह खुद को दूसरों से तुलना करने की बजाय अपनी खूबियों को पहचानना सीख जाएगी।

याद रखिए, बच्चों का आत्मविश्वास एक दिन में नहीं बनता। यह रोज की छोटी-छोटी बातचीत, सपोर्ट और स्वीकार्यता से मजबूत होता है।

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