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मैसाचुसेट्स के वाटरटाउन की रहने वालीं एड्रिआना गैलेगोस निजी कंपनी में मैनेजर हैं और बड़ी टीम का नेतृत्व करती हैं। 2024 में जब वे तलाक के दौर से गुजर रही थीं, तो तीन बच्चों की जिम्मेदारी और काम के बोझ के बीच वे बिलों और कागजी कार्रवाई में पिछड़ने लगीं। एड्रिआना कहती हैं,‘तलाक की प्रक्रिया किसी फुल-टाइम जॉब जैसी है। यह न सिर्फ मानसिक रूप से थका देती है, बल्कि इसमें इतने कागजात तैयार करने होते हैं कि आप घबरा जाते हैं।’ तनाव के इसी दौर में उनकी मुलाकात तुलसी वडोदरिया से हुई, जो डेली मनी मैनेजर हैं। तुलसी ने एड्रिआना के बिलों की जिम्मेदारी संभाली, बजट बनाया और उन्हें आर्थिक रूप से स्थिर होने में मदद की। एड्रिआना के लिए तुलसी ‘फरिश्ते’ से कम नहीं थीं। जिस तरह हम घर की साफ-सफाई के लिए हेल्पर और कार सुधारने के लिए मैकेनिक पर भरोसा करते हैं, वैसे ही अब नए तरह के पेशेवर लोगों की मांग बढ़ रही है-‘डेली मनी मैनेजर’। ये लोग घर का बजट संभालते हैं, बिलों का भुगतान करते हैं और सुनिश्चित करते हैं कि आपकी मेहनत की कमाई बेवजह खर्च न हो। ये पेशेवर अक्सर अकाउंटेंट होते हैं। समय पर बिल भुगतान, बैंक स्टेटमेंट जांच कर धोखाधड़ी से बचाना, बजट बनाना और खर्चों पर नियंत्रण रखना इनकी जिम्मेदारी होती है। टॉम बोजूर के लिए यह सेवा ‘कोच’ की तरह है। टॉम को एडीएचडी की समस्या है, इससे वे अक्सर बिल भरना भूल जाते थे। कभी पानी कट जाता तो कभी बीमा पॉलिसी रद्द हो जाती। टॉम कहते हैं,‘मुझे शांत तरीके से याद दिलाने वाले किसी व्यक्ति की जरूरत थी। अब जब मुझे पता है कि कोई खर्चों पर नजर रख रहा है, तो मैं फिजूलखर्ची से बचता हूं।’ यह सेवा सस्ती नहीं है, पर फायदे कहीं बड़े हैं। तुलसी जैसे पेशेवर 5 हजार से 7.5 हजार रुपए प्रति घंटा फीस लेते हैं। वहीं, सुरक्षा के लिहाज से ये मैनेजर्स क्लाइंट के पासवर्ड नहीं लेते, बल्कि ‘रीड-ओनली’ एक्सेस या संयुक्त कॉल के जरिए काम करते हैं। इससे वित्तीय जोखिम नहीं रहता। आप तो परिवार को वक्त दें, पैसों का मामला हम देख लेंगे – मैनेजर तुलसी बताती हैं,‘मैं अक्सर अपने क्लाइंट्स के साथ बैठकर डाक का वह ढेर साफ करती हैं जो हफ्तों से नहीं खुला।’ वे कहती हैं,‘जब हम कुछ सेशन साथ काम कर लेते हैं, तो क्लाइंट की घबराहट खत्म हो जाती है साथ ही उनकी आर्थिक स्थिति पटरी पर आ जाती है।’‘अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ डेली मनी मैनेजर्स’ की अध्यक्ष शेरोन जिसमैन कहती हैं,‘हम बच्चों से कहते हैं कि वे अपने बुजुर्ग माता-पिता और परिवार के साथ समय बिताएं, पैसों की चिंता हम पर छोड़ दें।’ इन मनी मैनेजर्स आर्थिक मामलों में पिछड़ जाना सामान्य है। इसमें शर्मिंदगी महसूस करने जैसी कोई बात नहीं।
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