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मन की जलन भी दे सकती है सही दिशा: ईर्ष्या से परेशान होने के बजाय उसकी जड़ पहचानें, तरक्की कर सकेंगे

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न्यूयॉर्क की रहने वाली डॉ. किम दोस्तों की आधुनिक किचन देखकर ईर्ष्या महसूस करती थीं। गहराई से सोचने पर उन्हें समझ आया कि उन्हें आलीशान किचन नहीं, बल्कि तेजी से खाना पकाने की सुविधा चाहिए थी। इसका हल उन्होंने किचन के रेनोवेशन के बजाय एयर फ्रायर खरीदकर निकाल लिया। सोशल मीडिया स्क्रॉल करते हुए किसी दोस्त के शानदार वेकेशन, साथी लेखक की नई किताब या किसी सहकर्मी के प्रमोशन की तस्वीर देखकर अचानक मन में जलन होना बेहद आम है। कई बार तो हम उन चीजों से भी ईर्ष्या करने लगते हैं, जिन्हें असल जिंदगी में पाना भी नहीं चाहते…जैसे किसी को कोई गेम खेलते देख मन मसोस कर रह जाना, भले ही उस खेल में हमारी कोई दिलचस्पी न हो। धार्मिक ग्रंथों और नीतिशास्त्र में ईर्ष्या को ‘पाप’ कहा गया है। पर आधुनिक समाजशास्त्रियों और मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि इंसान के लिए दूसरों से तुलना करना एक बिल्कुल स्वाभाविक प्रक्रिया है। सवाल यह नहीं है कि हमें ईर्ष्या क्यों होती है, बल्कि यह है कि हम इस जलन का इस्तेमाल खुद को बेहतर बनाने के लिए कैसे करते हैं। सामाजिक वैज्ञानिक और लेखक डॉ. स्टेसी एस. किम के अनुसार, जब हम समाज में रहते हैं, तो एक समूह का हिस्सा बनने के लिए सामाजिक तुलना जरूरी हो जाती है। समस्या तब होती है जब हम जलन महसूस करने पर शर्मिंदा हो जाते हैं, उसे दबाने की कोशिश करते हैं। उनके मुताबिक, ईर्ष्या महज दूसरों जैसा बनने की चाहत नहीं, बल्कि अलार्म बेल है, जो हमें समझाती है कि हमारे जीवन में किस चीज का अभाव है और हम वास्तव में क्या चाहते हैं। जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डब्ल्यू. गेरोड पैरट बताते हैं, ‘ईर्ष्या दो तरह की होती है- एक ‘सौम्य’, जो हमें प्रेरित करती है, और दूसरी ‘विद्वेषपूर्ण’, जिसमें व्यक्ति सामने वाले का बुरा चाहने लगता है। विद्वेषपूर्ण ईर्ष्या हमारी मानसिक शांति को पूरी तरह नष्ट कर देती है। अपने किसी परिचित या सहकर्मी के लड़खड़ाने पर मन ही मन खुश होना आध्यात्मिक और भावनात्मक दोनों नजरिए से घातक है।’ सोशल मीडिया की चमक के पीछे की उलझनें समझें – एक्सपर्ट प्रो. पैरट कहते हैं,‘ईर्ष्या की आग में जलने के बजाय इसे रचनात्मक दिशा दें। ईर्ष्या हो, तो रुककर सोचें कि इसके पीछे आपकी कौन सी अधूरी ख्वाहिश छिपी है। किसी की जीवनशैली या कौशल से सीखें, पर इसे अंतहीन मुकाबला न बनाएं। सोशल मीडिया की चुनिंदा चमक-दमक के पीछे की उलझनों को समझें। भरोसेमंद दोस्त या काउंसलर से अपनी इस भावना को साझा करें ताकि वे आपको जीवन की सकारात्मक उपलब्धियों का अहसास करा सकें। ईर्ष्या से डरने या ग्लानि महसूस करने के बजाय अगर उसकी जड़ को समझ लिया जाए, तो वह खुद को संवारने की सबसे मजबूत प्रेरणा बन सकती है।



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