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मेडिकल रिसर्च बताती हैं कि नमी, बारिश और वायुमंडलीय दबाव के बदलाव से बुजुर्गों में फंगल इंफेक्शन, एलर्जी और चक्कर जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ती हैं। फंगल केराटाइटिस और ओटोमाइकोसिस मानसून में सबसे ज्यादा देखे जाते हैं। 60+ उम्र में यह जोखिम दोगुना तक हो जाता है। ये 5 बातें मानसून के दौरान आंखों को रखेंगी सुरक्षित 1. फंगल केराटाइटिस – बुजुर्गों में आंसू की सुरक्षा परत कमजोर होने से इस संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। बचाव – आंख में कोई स्टेरॉयड या एंटीबायोटिक ड्रॉप बिना डॉक्टर की सलाह के न डालें। 2. माइक्रोस्पोरिडिया – इसका बारिश व नमी से सीधा संबंध है। दक्षिण भारत की एक स्टडी में जुलाई-अक्टूबर में ये संक्रमण अधिक पाया। बचाव – बारिश का पानी आंख में जाने से बचाएं। बाहर जाएं तो चश्मा या गॉगल्स पहनें। 3. एलर्जी – मानसून में मोल्ड बढ़ने से आंखों में जलन, लालिमा और पानी आने का खतरा बढ़ जाता है। बचाव – जब बारिश न हो रही हो तो खिड़कियां खोलें ताकि ताजी हवा का बहाव बना रहे। 4. सर्जरी वाले सतर्क रहें – मोतियाबिंद या आंख की सर्जरी के बाद मानसून में संक्रमण का खतरा सामान्य लोगों से अधिक हो सकता है। बचाव – ड्रॉप बदलने या बंद करने की गलती नहीं करें। डॉक्टर द्वारा लिखी दवा ही लें। 5. दूषित पानी – जलजमाव वाले क्षेत्रों में आंखों में संक्रमण और कॉर्नियल अल्सर का खतरा बढ़ सकता है। बचाव – बाहर से आने पर आंखें धोने के लिए उबालकर ठंडे किए पानी का उपयोग करें। ये 5 बातें बारिश के दौरान कानों को संक्रमण से बचाएंगी 1. कान में पानी जाना – मानसून के दौरान कान में पानी रह जाए तो ये फंगस-बैक्टीरिया के लिए आदर्श माहौल बनाता है। बचाव – झुककर कान से पानी निकालें या रूई की बत्ती अंदर डालें, वह पानी सोख लेगी। 2. ओटोमाइकोसिस – बाहरी कान की नली में होने वाला एक फंगल संक्रमण है। यह मुख्य रूप से गर्म और नमी वाले मौसम में होता है। बचाव – भीगने के बाद कान को ठीक से सुखाएं। कोई भी तेल, माचिस तीली, चाबी नहीं डालें। 3. हियरिंग एड – बारिश और पसीने से हियरिंग एड व कान में नमी के कारण संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है। बचाव – मशीन को सूखा रखें। संक्रमण हो तो लगातार पहनने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें। 4. पीएच अनबैलेंस – मानसून में कान की नली में नमी फंसने से वहां का एसिडिक माहौल बदलता है। इसके कारण संक्रमण का खतरा बढ़ता है। बचाव – नहाने के बाद कान के बाहरी हिस्से को मुलायम, सूखे कपड़े से अच्छी तरह सुखाएं। 5. शुगर पेशेंट सतर्क रहें – डायबिटीज या कमजोर इम्यूनिटी वाले बुजुर्गों में फंगल संक्रमण गंभीर रूप ले लेता है। बचाव – कान सूखे रखें, अंदर कुछ न डालें। डॉक्टर की सलाह के अनुसार शुगर कंट्रोल रखें। डॉ. यामिनी गुप्ता (वरिष्ठ ईएनटी विशेषज्ञ), डॉ. श्वेता वालिया (वरिष्ठ नेत्र रोग सर्जन)
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