भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नवगठित ब्रज क्षेत्रीय टीम में शामिल हुए पदाधिकारियों को लेकर सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। संगठन में पद मिलने के बाद जहां एक ओर नेताओं के समर्थक इसे उनका कद बढ़ना बता रहे हैं। वहीं दूसरी ओर विरोधी खेमे में चर्चा है कि पार्टी ने इन दिग्गजों को संगठनात्मक जिम्मेदारियों में बांधकर विधानसभा चुनाव के लिए उनके रास्ते लगभग बंद कर दिए हैं।
दरअसल, क्षेत्रीय टीम में जगह पाने वाले कई पदाधिकारी लंबे समय से अलग-अलग विधानसभा सीटों पर अपनी प्रबल दावेदारी ठोक रहे थे। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो जो नेता चुनाव लड़ने का सपना संजोए बैठे थे, उन्हें क्षेत्रीय संगठन में एडजस्ट कर पार्टी ने एक तीर से दो निशाने साधे हैं। संगठन को मजबूती भी मिल गई और चुनावी दावेदारी की खींचतान पर भी एक तरह से विराम लगाने की कोशिश की गई है।
सीटवार समीकरणों पर नजर डालें तो प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय के गढ़ माने जाने वाले दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से बीना लवानिया प्रबल दावेदारी पेश कर रही थीं, लेकिन अब क्षेत्रीय टीम में उनके शामिल होने के बाद इस सीट के भावी समीकरणों पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। उधर, आगरा की आरक्षित छावनी सीट से अशोक कुमार पिप्पल अपनी दावेदारी को लेकर काफी सक्रिय थे। इसी तरह आगरा ग्रामीण सीट पर रितु दिवाकर अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रही थीं।
क्षत्रिय बहुल और राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बाह सीट से सुग्रीव सिंह चौहान ताल ठोक रहे थे। इसके अलावा क्षेत्रीय उपाध्यक्ष गिरिराज सिंह कुशवाह खेरागढ़ विधानसभा सीट से टिकट की आस लगाए थे और यादवेंद्र प्रताप सिंह शिक्षक एमएलसी के चुनाव के लिए अपनी दावेदारी पेश कर रहे थे। फिलहाल तो नेताओं को बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। हालांकि माना जा रहा है कि करीबियों के फीडबैक से उनके लिए भी बधाई के लड्डू का स्वाद कुछ फीका हो गया है।







