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जापान में एक ऐसी कहानी सुनाई जाती है जो समय की हमारी समझ को चुनौती देती है। कहते हैं कि एक बार एक मछुआरे के जाल में एक कछुआ फंस गया। जब उसने कछुए को मुक्त किया, तो कछुआ उसे समुद्र की गहराइयों में स्थित ड्रैगन राज्य ले गया। वहां उसकी भेंट एक अलौकिक राजकुमारी से हुई। दोनों ने केवल कुछ घंटों तक बातें कीं। लेकिन जब वह घर लौटा, तो उसने पाया कि धरती पर कई सदियां बीत चुकी थीं। उसके परिचित सभी लोग अब जीवित नहीं थे। फिर उसने वह डिबिया खोली जो राजकुमारी ने उसे दी थी। डिबिया खोलते ही वह बूढ़ा हो गया और उसका निधन हो गया। आयरलैंड में भी इससे मिलता-जुलता एक आख्यान मिलता है। उसके अनुसार, ओशीन नामक एक वीर युवक ऐसे राज्य में गया जहां के निवासी सदैव युवा रहते थे। उसने वहां कुछ वर्ष बिताए। किंतु जब वह धरती पर लौटा, तो पाया कि कई सदियां बीत चुकी थीं और संसार पूरी तरह बदल चुका था। आयरलैंड अब ईसाई धर्म अपना चुका था। उसे अपने अश्व से नीचे न उतरने की चेतावनी दी गई थी। फिर भी वह अश्व से उतरा और तुरंत वृद्ध हो गया।
इस प्रकार टाइम ट्रेवल की कथाएं विश्वभर के आख्यानों में मिलती हैं। भारत में राजा रैवत की कथा भी उनमें से एक है। रैवत अपनी पुत्री के विवाह के लिए उसे ब्रह्मलोक ले गए। जब वे धरती पर लौटे, तो पाया कि अनेक सदियां बीत चुकी थीं। अब कोई उन्हें पहचान नहीं पाया। यहां तक कि लोगों का कद भी पहले से कम हो गया था। एक अन्य कथा में इंद्रद्युम्न ब्रह्मा को धरती पर एक उत्सव में आमंत्रित करने के लिए ब्रह्मलोक गए। लौटने पर उन्होंने पाया कि धरती पर लाखों वर्ष बीत चुके थे। हिमाचली लोककथाओं में भी टाइम ट्रेवल का उल्लेख मिलता है। एक लोककथा के अनुसार, एक दिन अपनी भेड़-बकरियां चराते समय एक चरवाहे की भेंट शिवजी से हुई। दोनों ने दोपहर भर पासों का खेल खेला। जब चरवाहा घर लौटा, तो उसने देखा कि उसकी पत्नी बूढ़ी हो चुकी है और वह स्वयं परदादा बन चुका है। ईसाई परंपरा में सात शयनकर्ताओं की कथा मिलती है। उसके अनुसार, सात ईसाई युवक बहुदेववादी रोमन शासकों से बचते हुए एक गुफा में शरण लेते हैं। जब वे 300 वर्ष बाद नींद से जागते हैं, तो पाते हैं कि संसार ने ईसाई धर्म अपना लिया है और धार्मिक उत्पीड़न समाप्त हो चुका है। इस्लामी आख्यानों में वर्णन है कि उजैर नामक एक व्यक्ति ने कयामत के दिन मानवता के पुनरुत्थान पर संदेह व्यक्त किया। तब अल्लाह ने उसकी मृत्यु करा दी और सौ वर्ष बाद उसका पुनरुत्थान किया। उजैर अपने पुनर्जीवित गधे पर सवार होकर अपने पुराने गांव में पहुंचा। वहां अधिकांश लोग उसे पहचान नहीं पाए। एक वृद्ध और दृष्टिहीन स्त्री ने उसकी आवाज से उसे पहचाना। फिर उजैर ने अल्लाह से दुआ मांगी कि वे इस महिला की दृष्टि लौटा दें। उसकी दृष्टि लौट आई। उजैर का पुत्र, जो अब आयु में उससे बड़ा हो चुका था, उसके कंधों के बीच स्थित तिल से उसे पहचान सका।
चीनी आख्यानों में वानर राजा की कथा मिलती है, जो अतीत, वर्तमान और भविष्य के बीच यात्रा करते थे। इस समय-यात्रा को चीन के विभिन्न राजवंशों के संदर्भ में समझाया गया है। यह कथा टांग राजवंश के काल में प्रचलित थी। वानर राजा ने इस काल में जीवित एक साधु की भारत यात्रा में सहायता की। जब उन्होंने अतीत की यात्रा की, तो उनका परिचय चिन राजवंश के उस सम्राट से हुआ जिसने चीन का एकीकरण किया था। और जब उन्होंने भविष्य की यात्रा की, तो वे मिंग सम्राट से मिले, जिनके आदेश पर वानर राजा पर आधारित उपन्यास लिखा गया। स्पष्ट है कि टाइम ट्रेवल केवल आधुनिक वैज्ञानिकों या उपन्यासकारों की कल्पना नहीं है। इसका उल्लेख विश्वभर की प्राचीन कथाओं में मिलता है। प्राचीन काल से ही लोगों में यह धारणा रही है कि विभिन्न लोकों में समय की गति भिन्न होती है। देवताओं के लोक का एक क्षण धरती पर सदियों के बराबर हो सकता है। तो क्या इन कथाओं में हमें अलौकिक लोकों के साथ अधिक संपर्क से सावधान रहने का संकेत दिया गया था? क्या इन गैर-मानवीय लोकों से दूरी बनाए रखना ही बुद्धिमानी है?
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