देवदत्त पट्टनायक1 घंटे पहले कॉपी लिंक लगभग 2,500 वर्ष पहले बुद्ध ने निर्वाण प्राप्त किया था। इसके बाद बुद्ध के लगभग समकक्ष महिमा वाली एक देवी के उदय में करीब 1,000 वर्ष लग गए। उससे पहले बौद्ध साहित्य में धन की देवी ‘श्री’ ही एकमात्र प्रमुख देवी थीं, जिनका कला में भी चित्रण मिलता है। […]
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रसरंग में मायथोलॉजी: बुद्ध की करुणा से जन्मी तारा किस तरह बनीं बौद्ध धर्म की देवी!
देवदत्त पट्टनायक3 घंटे पहले कॉपी लिंक लगभग 2,500 वर्ष पहले बुद्ध ने निर्वाण प्राप्त किया था। इसके बाद बुद्ध के लगभग समकक्ष महिमा वाली एक देवी के उदय में करीब 1,000 वर्ष लग गए। उससे पहले बौद्ध साहित्य में धन की देवी ‘श्री’ ही एकमात्र प्रमुख देवी थीं, जिनका कला में भी चित्रण मिलता है। […]
हमारी पौराणिक कथाएं कभी पुरानी नहीं हुईं:‘नागबंधम’ की स्टार कास्ट बोली- अब उन्हें बड़े पर्दे पर भव्य तरीके से दिखाने का समय आया है
रहस्य, रोमांच, पौराणिक इतिहास और बड़े विजुअल्स से सजी पैन इंडिया फिल्म ‘नागबंधम’ तीन जुलाई को रिलीज होगी। फिल्म में विराट कर्ण, नभा नटेश और ऋषभ साहनी मुख्य भूमिकाओं में हैं। निर्माता निशिता नागिरेड्डी हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में टीम ने फिल्म की कहानी, सनातन संस्कृति, दक्षिण भारतीय सिनेमा, बॉलीवुड और किरदारों पर बात […]
हमारी पौराणिक कथाएं कभी पुरानी नहीं हुईं:‘नागबंधम’ की स्टार कास्ट बोली- अब उन्हें बड़े पर्दे पर भव्य तरीके से दिखाने का समय आया है
रहस्य, रोमांच, पौराणिक इतिहास और बड़े विजुअल्स से सजी पैन इंडिया फिल्म ‘नागबंधम’ तीन जुलाई को रिलीज होगी। फिल्म में विराट कर्ण, नभा नटेश और ऋषभ साहनी मुख्य भूमिकाओं में हैं। निर्माता निशिता नागिरेड्डी हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में टीम ने फिल्म की कहानी, सनातन संस्कृति, दक्षिण भारतीय सिनेमा, बॉलीवुड और किरदारों पर बात […]
रसरंग में मायथोलॉजी: प्राचीन भारतीय संस्कृति का हिस्सा रही है लैंगिक विविधता
महाभारत के कुरुक्षेत्र युद्ध में भीष्म ने शिखण्डी से युद्ध करने से इनकार कर दिया था। उनके अनुसार, चूंकि शिखण्डी का जन्म स्त्री के रूप में हुआ था, इसलिए वह स्त्री ही था। दूसरी ओर कृष्ण का दृष्टिकोण अलग था। उनका मानना था कि यदि शिखण्डी स्वयं को पुरुष मानता है, तो वह पुरुष है। […]
ऋषि दुर्वासा और देवराज इंद्र की कथा की सीख: उपहार की कीमत उसके मूल्य से नहीं, बल्कि देने वाले की भावना से होती है, किसी के उपहार का अपमान न करें
Hindi News Jeevan mantra Dharm Durvasa Rishi And Devraj Indra Story, Life Management Tips About Happiness In Life, Durvasa Gift Divine Mala To Indra 12 घंटे पहले कॉपी लिंक एक पौराणिक कथा है, पुराने समय में ऋषि दुर्वासा हमेशा ज्ञान की खोज और धर्म के संदेश फैलाने के लिए यात्राएं किया करते थे। ऋषि दुर्वासा […]
रसरंग में मायथोलॉजी: धागों में छिपी हैं मनुष्यों और देवताओं की कथाएं
प्राणी जगत में केवल मनुष्य ही बुनाई करके कपड़े पहनते हैं। शुरुआत में हम जानवरों की खाल से अपने शरीर को ढकते थे। समय के साथ हम पेड़-पौधों की छाल और पत्तों का उपयोग करने लगे। फिर पौधों के तंतुओं को हल्के से गूंथकर पहनने की परंपरा शुरू हुई। अंततः हममें बुनाई की कला विकसित […]
रसरंग में मायथोलॉजी: महाभारत से हड़प्पा तक, हर जगह दर्ज है यह प्राणी
एक सींग वाला गैंडा असम का राजकीय प्राणी है। तराई क्षेत्र की लोककथाओं के अनुसार, दिव्य शिल्पकार विश्वकर्मा ने हाथी की त्वचा, घोड़े के खुर, मगरमच्छ की आंखें, भालू के मस्तिष्क, सिंह के हृदय और वृषभ के सींग को मिलाकर गैंडे की रचना की थी। लगभग 4,500 वर्ष पूर्व सिंधु नदी के उत्तर-पश्चिमी तट पर […]
रसरंग में मायथोलॉजी: वृक्षों के मूल निवासी हैं देवता, फिर भी क्यों जारी है पेड़ों का विनाश?
देश के तमाम भागों में विकास के नाम पर बड़ी आसानी से पेड़ों की बलि दे दी जाती है। लेकिन क्या पेड़ को काटते समय हमें यह ध्यान रहता है कि भारतीय उपमहाद्वीप में मंदिरों से पहले वन ही हमारे पवित्र स्थल रहे हैं? वास्तव में भारतीय धार्मिक कल्पना की सबसे प्राचीन दिव्य मौजूदगियों में […]
रसरंग में मायथोलॉजी: पुरी से महाभारत तक, ऐसी है नागार्जुन की यह अनकही कथा
जब भी कोई नागार्जुन का उल्लेख करता है, तब अधिकांश लोगों के दिमाग में उसी नाम के लोकप्रिय तेलुगु अभिनेता की छवि घूमने लगती है। बहुत कम लोग जानते होंगे कि महाभारत से जुड़ी लोककथाओं में भी नागार्जुन नाम का एक पात्र है। यह अर्जुन का पुत्र है, जो एक गेंडे को बचाने के लिए […]
उत्तराखंड में 2455 मीटर पर ‘मौत का ताल’: सुबह चार बजे परियां करती हैं स्नान, नचिकेता ने यमराज से यहीं जाना जीवन का रहस्य – Uttarkashi News
उत्तराखंड में 2455 मीटर की ऊंचाई पर स्थित नचिकेता ताल को ‘मौत का ताल’ कहा जाता है, यहां स्थानीय मान्यता के अनुसार सुबह चार बजे परियां स्नान करने आती हैं और यहीं नचिकेता ने यमराज से जीवन के रहस्यों का ज्ञान प्राप्त किया था। प्राकृतिक खूबसूरती से घिरा यह ताल पौराणिक कथाओं और रहस्यमयी यमगुफा […]
रसरंग में मायथोलॉजी: दक्षिण भारत से लेकर यूनान तक, किस तरह फैला जैन धर्म
हम अक्सर धर्म को इतिहास, अर्थात समय के नजरिए से समझते हैं, न कि भूगोल यानी स्थान के दृष्टिकोण से। जैन धर्म का ही उदाहरण लेते हैं। हम जानते हैं कि इसका उद्गम भारत में हुआ, लेकिन यह किस क्षेत्र में जन्मा, वहां से कहां-कहां फैला और किन कारणों से इसका विस्तार हुआ, इन प्रश्नों […]
रसरंग में मायथोलॉजी: दक्षिण-पूर्वी एशिया के देशों में मिलती हैं धान देवी की कथाएं
भारत में धान से जुड़ा सबसे प्राचीन आख्यान ओडिशा में रहने वाली बोंडा जनजाति में पाया जाता है। यह जनजाति 4,000 वर्षों से भी पहले दक्षिण-पूर्वी एशिया से भारत में आए मुंडा तथा ऑस्ट्रो-एशियाई समुदायों से जुड़ी है। धान को उगाने का ज्ञान उनके साथ ही भारत आया। बोंडा जनजाति की एक कथा के अनुसार, […]
रसरंग में मायथोलॉजी: हनुमान की तरह चीन में पूजे जाते हैं वानर राजा
जापान में एक ऐसी कहानी सुनाई जाती है जो समय की हमारी समझ को चुनौती देती है। कहते हैं कि एक बार एक मछुआरे के जाल में एक कछुआ फंस गया। जब उसने कछुए को मुक्त किया, तो कछुआ उसे समुद्र की गहराइयों में स्थित ड्रैगन राज्य ले गया। वहां उसकी भेंट एक अलौकिक राजकुमारी […]
रसरंग में मायथोलॉजी: प्रत्येक आख्यान में हैं जल-प्लावन की अलग-अलग कथाएं
बाढ़, जल-प्लावन या प्रलय-संबंधी आख्यान विश्वभर की अनेक संस्कृतियों में मिलते हैं। यद्यपि इन कथाओं में जल-प्लावन की घटना समान प्रतीत होती है, किंतु इनके अर्थ, कारण और दार्शनिक आधार एक-दूसरे से भिन्न हैं। आइए, आज इन अंतरों को समझने का प्रयास करते हैं। सबसे प्रसिद्ध बाढ़-वृत्तांत बाइबल के ओल्ड टेस्टामेंट में मिलता है। इसके […]
रसरंग में मायथोलॉजी: इस प्राणी का भारतीय सभ्यता से है गहरा नाता
पिछले कुछ दशकों में भारत में गर्दभों (गधों) की संख्या में भारी गिरावट आई है। यह दुखद है, क्योंकि सदियों से गुजरात, मध्य प्रदेश, पंजाब और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में गर्दभों के वार्षिक मेले आयोजित होते रहे हैं। यद्यपि हम गर्दभ को अपनी संस्कृति का महत्वपूर्ण अंग शायद ही मानते हैं, लेकिन वास्तविकता इससे […]
रसरंग में मायथोलॉजी: आर्यावर्त का ‘भारतवर्ष’ के रूप में किस तरह हुआ विस्तार?
ऋग्वेद का अंतिम संकलन लगभग 1000 ईसा पूर्व में किया गया माना जाता है। इसमें कुरु कुल के सदस्यों के लिए ‘भरत’ शब्द का प्रयोग हुआ है। इस कुल के सदस्य सिंधु नदी की द्रोणी से लेकर गंगा के पश्चिमी तट तक फैले क्षेत्र पर नियंत्रण रखते थे। यह भूभाग आज पंजाब और हरियाणा कहलाता […]
रसरंग में मायथोलॉजी: हिंदू देवता: युद्ध के ही नहीं, कला व सौंदर्य के भी प्रतीक
आज की सनातनी हिंदुत्ववादी सोच में युद्ध की धारणा को अत्यधिक महत्व दिया जाता है। परिणामस्वरूप, जीवन की लगभग हर गतिविधि को संघर्ष और युद्ध के प्रतीकों में ढाल दिया जाता है, जैसे परीक्षा योद्धा, चुनाव योद्धा, यहां तक कि कोरोना योद्धा भी। और यही सोच हमारे देवी-देवताओं पर भी लागू कर दी जाती है। […]
‘महादेव एंड संस’ में प्यार, नफरत और परिवार की परीक्षा:25 साल की कहानी में नए ट्विस्ट, भानु का धोखा और बहुओं की एंट्री
महादेव एंड संस एक भावनात्मक पारिवारिक ड्रामा है, जो रिश्तों, संघर्ष और संस्कारों की कहानी कहता है। यह शो एक ऐसे व्यक्ति की यात्रा दिखाता है, जो अनाथ होने से लेकर परिवार के मुखिया बनने तक का सफर तय करता है। महादेव और विद्या का अटूट प्रेम, त्याग और समझ इस कहानी की आत्मा है। […]
रसरंग में मायथोलॉजी: उत्तर से दक्षिण तक ऐसे फैलीं पुराणों की कथाएं
तटवर्ती आंध्र प्रदेश में ऐसे पांच मंदिर हैं, जिनका संबंध तारकासुर से है। तारकासुर का वध कार्तिकेय के हाथों हुआ था। चूंकि वह शिव भक्त भी था, इसलिए उसके सिर के भाग जहां-जहां गिरे वहां-वहां शिव मंदिर स्थापित किए गए। इन मंदिरों को पंचराम क्षेत्र कहा जाता है। तमिलनाडु में पलनी के पहाड़ स्थित हैं। […]
रसरंग में मायथोलॉजी: जब इंडोनेशिया के जावा में बनाए गए थे तांत्रिक पुण्य स्थल
देवदत्त पट्टनायक38 मिनट पहले कॉपी लिंक जावा में स्थित विशाल प्रम्बनन मंदिर परिसर। इसका निर्माण 850 में हुआ माना जाता है। आज यह यूनेस्को का विश्व धरोहर स्थल है। आज बाली द्वीप को छोड़कर इंडोनेशिया पूर्णतः इस्लामी देश है। लेकिन 1000 वर्ष पहले इंडोनेशिया के जावा द्वीप में तांत्रिक बौद्ध धर्म और तांत्रिक हिंदू धर्म […]
रसरंग में मायथोलॉजी: दक्षिण का कुम्भ: हर 12 साल में कुम्भकोणम में होता है ‘महामहम’
देवदत्त पट्टनायक5 घंटे पहले कॉपी लिंक तमिलनाडु के कुम्भकोणम में भी हर 12 साल में कुम्भ की तरह का एक आयोजन होता है, जिसे ‘महामहम’ कहते हैं। इसमें एक पवित्र तालाब महामहम में डुबकी लगाई जाती है। पिछली बार यह साल 2016 में हुआ था। अगली बार 2028 में आयोजित होगा। कुम्भ मेले का अमृत […]
रसरंग में मायथोलॉजी: कुम्भ मेले: वेदों में नहीं, किंतु पुराणों और महाभारत में है उल्लेख
देवदत्त पट्टनायक5 घंटे पहले कॉपी लिंक 1954 के प्रयागराज कुम्भ (तब इलाहाबाद कुम्भ) की एक तस्वीर। फोटो साभार : जेम्स बुरके, स्रोत : लाइफ आर्काइव्स। लोग नदियों के संगम अर्थात प्रयाग पर हजारों वर्षों से एकत्रित होते आए हैं। उत्तराखंड में पांच ऐसे प्रयाग हैं जिनसे गंगा नदी उत्पन्न होती है। प्रयागराज को यह नाम […]


























