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कई लोग खुद को अच्छा श्रोता मानते हैं, लेकिन हकीकत अक्सर अलग होती है। बातचीत के दौरान हमारा चेहरा, बॉडी लैंग्वेज और ध्यान यह साफ कर देते हैं कि हम सच में सुन रहे हैं या सिर्फ औपचारिकता निभा रहे हैं। आज के समय में ‘लाउड लिसनिंग’ यानी अपने हाव-भाव से यह जताना कि आप पूरी तरह ध्यान दे रहे हैं, जरूरी स्किल बन चुका है। अच्छा श्रोता बनने के लिए क्या करें? अपने सभी पूर्वाग्रह दरकिनार कर वक्ता को ऐसे सुनें जैसे आप पहली बार उनकी बात सुन रहे हों। इससे आपकी जिज्ञासा बनी रहती है। उनकी भावनाओं को समझने की कोशिश करें। अपने चेहरे के भावों से उनकी कही बातों को प्रतिबिंबित करें। अगर उनकी बातों में कोई चिंता झलक रही है तो आपको भी गंभीर और चिंतित दिखना चाहिए। बातचीत के दौरान हल्के-हल्के तीन बार सिर हिलाना इस बात का संकेत है कि आप उनकी बात को तवज्जो दे रहे हैं। भौंहें उठाना या कान आगे करते हुए थोड़ा आगे झुकना यह दिखाता है कि आप ध्यानपूर्वक सुन रहे हैं। अच्छे श्रोता बनने के बहुत फायदे हैं एक कहावत है कि ‘एक अच्छा श्रोता ही अच्छा वक्ता हो सकता है।’ ध्यान से सुनने से आपका ज्ञान बढ़ता है, निर्णय लेने की क्षमता सुधरती है और मानसिक तनाव भी कम होता है। यह आपकी लीडरशिप क्वालिटी को बेहतर बनाता है और गलतफहमियां कम करता है। सबसे बड़ी बात लोग आपको ज्यादा सम्मान देने लगते हैं।
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