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10 घंटे पहले
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विराग गुप्ता सुप्रीम कोर्ट के वकील और ‘डिजिटल कानूनों से समृद्ध भारत’ के लेखक
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने कहा है कि उन्हें और दूसरे विपक्षी नेताओं को स्टिंग ऑपरेशन में फंसाने के लिए मेटा के स्मार्ट ग्लास का इस्तेमाल हो रहा है। इसके पहले जंतर-मंतर के सीजेपी आंदोलन में भी ऐसे चश्मों और कैमरों से आंदोलनकारियों के फेशियल सर्विलांस पर विवाद हुआ था।
उस मामले में राज्यसभा सांसद रहीम की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की बेंच सुनवाई कर रही है। ये सच है कि अपराध रोकने के लिए पुलिस को कानूनी प्रक्रिया के तहत निजी जानकारी जुटाने का अधिकार है। नियमों का उल्लंघन होने पर दोषी के खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है। स्मार्ट चश्मे दिव्यांगों के लिए मददगार हैं। लेकिन मेटा, सैमसंग, गूगल, अमेजन जैसी टेक कम्पनियां डेटा जुटाने, मुनाफा बढ़ाने और सोशल मीडिया के विस्तार के लिए स्मार्ट चश्मों के कारोबार को बढ़ा रही हैं। इसके 5 पहलुओं को समझना होगा।
1. कैमरा, माइक्रोफोन, स्पीकर से लैस इन चश्मों से सामने वाले की सहमति के बिना ऑडियो रिकॉर्डिंग या वीडियो बनाकर उसे सोशल मीडिया में वायरल किया जा सकता है। विवाद बढ़ने के बाद इंस्टाग्राम ने कहा कि समुद्रतट, जिम और सड़कों में अनजान महिलाओं के वीडियो वाले कंटेंट पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। पर मेटा व दूसरी कम्पनियां ऐसे दुरुपयोग की कानूनी जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नहीं हैं।
2. गुजरात के 46,000 सरकारी स्कूलों में जेन-जी आंदोलनकारियों को वीडियो बनाने से रोकने के लिए शिक्षा विभाग ने सर्कुलर जारी किया है। संविधान के अनुच्छेद 21 के अनुसार बच्चों की सुरक्षा, निजता के अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ का 2017 का फैसला और डेटा सुरक्षा कानून के प्रावधानों का सरकारी आदेश में जिक्र है। उल्लंघन करने वालों के खिलाफ पॉक्सो और किशोर न्याय अधिनियम के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की बात लिखी है।
3. नीट और अन्य परीक्षाओं में तकनीक के दुरुपयोग से पेपर लीक और नकल का मर्ज लाइलाज हो रहा है। क्रिकेट में सट्टेबाजी के लिए ऐसे चश्मों के दुरुपयोग को रोकने के लिए बीसीसीआई ने खिलाड़ियों को आगाह किया है। निजी जासूसी एजेंसियों को कानून के दायरे में लाने के लिए 2007 में राज्यसभा में बिल पेश हुआ था, जिसे 2020 में वापस ले लिया गया। तलाक के मामले में निजी एजेंसियों द्वारा जासूसी के मामले में सुप्रीम कोर्ट के जज संजय करोल और विपुल पंचोली की पीठ ने जुलाई में आदेश पारित किया है। उसके अनुसार गैर-कानूनी तरीके से एकत्र किए सबूतों की साक्ष्य अधिनियम के तहत वैधता नहीं है।
4. अमेजन के एलेक्सा में डेटा के दुरुपयोग के खिलाफ अमेरिका में क्लास एक्शन सूट के तहत बड़े हर्जाने की मांग हुई थी। अब स्मार्ट चश्मों पर आयरलैंड में डेटा सुरक्षा आयोग ने मेटा को नोटिस जारी किया है। ब्रिटेन की अदालतों, पब और सिनेमाघरों में, नॉर्वे के स्कूलों में और ऑस्ट्रेलिया के सरकारी दफ्तरों में स्मार्ट चश्मों पर रोक लग रही है। अमेरिका में सुरक्षा एजेंसियों ने इनके दुरुपयोग पर चिंता जाहिर की है। जबकि जर्मनी में मेटा और अन्य कम्पनियों के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज हुई है।
5. महिलाओं को चोरी-छिपे देखने, उनका पीछा करने या उनकी वीडियो रिकॉडिंग करने के मामलों में आईपीसी, बीएनएस और आईटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज होने के साथ ही आरोपी की गिरफ्तारी हो जाती है। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार स्मार्ट चश्मों से जासूसी, बच्चों की सुरक्षा और महिलाओं के सम्मान से खिलवाड़ की इजाजत नहीं दी सकती। इनकी बिक्री और दुरुपयोग रोकने के लिए टेक कम्पनियों के खिलाफ कानूनों का अनुपालन नहीं हो रहा है। स्मार्ट चश्मों पर भारत के कानून लागू हों, ये जरूरी है।
स्मार्ट चश्मों से जासूसी, बच्चों की सुरक्षा और महिलाओं के सम्मान से खिलवाड़ की इजाजत नहीं दी सकती। लेकिन इनकी बिक्री और दुरुपयोग रोकने के लिए टेक कम्पनियों के खिलाफ कानूनों का अनुपालन नहीं हो रहा है। (ये लेखक के अपने विचार हैं)






