शोर अब गंभीर स्वास्थ्य संकट:  चेतावनी के बजाय भाषा की तरह प्रयोग हो रहा हॉर्न, बच्चों की याद्दाश्त तक धीमी हो रही
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शोर अब गंभीर स्वास्थ्य संकट: चेतावनी के बजाय भाषा की तरह प्रयोग हो रहा हॉर्न, बच्चों की याद्दाश्त तक धीमी हो रही

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चांदनी चौक की तंग गलियों में एक छोटी सी दुकान है- ‘डायमंड हॉर्न पैलेस’। कहने को तो यहां हॉर्न व गाड़ियों का सामान मिलता है, पर मालिक मुस्तफा अहमद इसे ‘जादुई केंद्र’ मानते हैं। वे कहते हैं,‘लोग लाखों की बाइक व कार खरीदते हैं, लेकिन दो महीने बाद उन्हें लगता है कि हॉर्न की आवाज में वह ‘दम’ नहीं रहा। मैं उन्हें कौड़ियों के भाव ऐसा हॉर्न लगा कर देता हूं कि लोग सहम जाएं…।’ मुस्तफा का बढ़ता कारोबार भारत के लिए खतरे की घंटी है, जिसकी आवाज शायद हॉर्न के शोर में दब गई है। यूएन के मुताबिक, भारतीय शहर दुनिया के सबसे शोरगुल वाले शहरों में शामिल हैं। यह गंभीर स्वास्थ्य संकट बन चुका है। देश में 6 करोड़ से ज्यादा लोग सुनने की क्षमता खो चुके हैं। हॉर्न चेतावनी का संकेत नहीं रहा, बल्कि बातचीत का तरीका बन गया है। मुड़ना हो, रास्ता मांगना हो और अपनी मौजूदगी जताने के लिए हॉर्न ही दमदार विकल्प बन गया है। यह अब भाषा की तरह इस्तेमाल होता है। बार्सिलोना की स्टडी कहती है-ट्रैफिक शोर में 5 डेसिबल की वृद्धि बच्चों की याददाश्त का विकास 11% तक धीमा कर देती है। आइजोल से सबक आइजोल देश का इकलौता ‘नो-हॉन्किंग’ शहर है, जो कड़े कानून से नहीं बल्कि स्थानीय लोगों की पहल और आपसी समझ से बना है। यहां की संकरी, पहाड़ी सड़कों पर 1.25 लाख वाहन चलते हैं, फिर भी ड्राइवर जाम में फंसने पर भी हॉर्न नहीं बजाते। इसे असभ्यता माना जाता है। लोग धैर्य से अपनी बारी का इंतजार करते हैं और दूसरों को रास्ता देते हैं। इससे ध्वनि प्रदूषण घटा और शहर का माहौल शांत व तनावमुक्त बन गया। समाधान ये भी… व्यवहार-विज्ञान एक्सपर्ट आनंद दमानी ने डैशबोर्ड डिवाइस बनाया था जो ड्राइवर के हॉर्न बजाने पर हर बार बीप व फ्लैश करता था। इसे शांत करने के लिए एक बटन दबाना पड़ता है। इस कोशिश ने ड्राइवरों को ‘ऑटोपायलट’ मोड से हटाकर सचेत सोच में डाल दिया। छह महीनों में, प्रतिभागियों ने यातायात की स्थितियों को नियंत्रित करने के बाद भी अपने हॉर्न बजाने में 61% की कमी की। ‘क्वाइट इंडिया’ एनजीओ की सविता राव मानती हैं कि असली समाधान शिक्षा और व्यवहार में बदलाव है, क्योंकि पुलिस हर हॉर्न बजाने वाले को नहीं पकड़ सकती। लोगों को खुद समझना होगा कि यह शोर उनकी उम्र कम कर रहा है। हॉर्न कम बजाने पर बीमा छूट, शोर मचाने पर स्वत: चालान हॉन्किंग की समस्या से निपटने के लिए चीन ने साउंड बैरियर, शोर कम करने वाली सड़कें और ईवी बढ़ाए हैं। वियतनाम में एप व सेंसर ड्राइवरों को ट्रैक करते हैं; कम हॉर्न बजाने वालों को बीमा छूट व रिवॉर्ड मिलते हैं। पेरिस ने नॉइज रडार बनाया है, जो तेज हॉर्न वाले वाहनों की फोटो लेकर चालान भेज देता है। नीदरलैंड्स ने छिद्र वाली डामर वाली सड़कें बनाई हैं, जो टायर व सड़क के घर्षण से पैदा शोर सोखकर, इसे 3-5 डेसिबल घटाती हैं।



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