साइलेंट को-वर्किंग स्पेस का बढ़ता ट्रेंड:  2-3 घंटे का सेशन, साथ बैठना जरूरी है, बात करना नहीं
अअनुबंधित

साइलेंट को-वर्किंग स्पेस का बढ़ता ट्रेंड: 2-3 घंटे का सेशन, साथ बैठना जरूरी है, बात करना नहीं

Spread the love




वर्क फ्रॉम होम ने आजादी दी। ट्रैफिक से छुटकारा, ड्रेस कोड का झंझट नहीं, अपने टाइम से काम। लेकिन कुछ साल बाद एक और सच्चाई सामने आई… अकेलापन। जूम कॉल्स हैं, स्लैक मैसेज हैं, लेकिन दिन के 8-10 घंटे अक्सर एक ही कमरे में चुपचाप बीत जाते हैं। इसी खालीपन से निकला है नया ट्रेंड ‘साइलेंट को-वर्किंग स्पेस’। 2-3 घंटे के तय ‘साइलेंट सेशन’ मॉडल सीधा है। लोग लैपटॉप लेकर आते हैं, अपनी-अपनी सीट पर बैठते हैं, हेडफोन लगाते हैं और 2-3 घंटे का तय ‘साइलेंट सेशन’। बीच में छोटा ब्रेक-कॉफी, पानी, हल्की स्ट्रेचिंग। कई जगह इसे वर्क जैम या फोकस स्पिरंट जैसे नामों से चलाया जा रहा है। यहां साथ बैठना जरूरी है, बात करना नहीं। किन स्पेसेस में दिख रहा है यह ट्रेंड? भारत में बड़े को-वर्किंग ब्रांड भी अब ऐसे मॉडल की ओर बढ़ रहे हैं, कुछ शहरों में ये पॉपुलर हैं। – Springboard पैन इंडिया मौजूदगी – WeWork India मेट्रो शहरों में मजबूत नेटवर्क – The Hive चेन्नई और मुंबई में लोकप्रिय



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *