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आज की डिजिटल दुनिया में स्मार्टफोन लोगों की जिंदगी का सबसे अहम हिस्सा बन चुका है। सुबह से लेकर रात को सोने तक नजरें स्क्रीन पर लगी रहती हैं। लेकिन अब ‘स्क्रीन एडिक्शन’ (फोन की लत) से बाहर निकलने की छटपटाहट दिखने लगी है। अब युवा स्क्रीन से दूरी बनाने के लिए फ्रीडम, ओपल और वनसेक जैसे एप्स का सब्सक्रिप्शन ले रहे हैं, जो तय समय में फोन लॉक करते हैं। खर्च 3 हजार से 16 हजार रु. तक है। स्क्रीन से पीछा छुड़ाने की यह अनूठी क्रांति डिजिटल युग में पैदा हुई पीढ़ी यानी जेन-जी कर रहे हैं। आज के युवाओं की बचपन की तस्वीरें उनकी समझ विकसित होने से पहले सोशल मीडिया पर थीं। वे ‘डिजिटल निगरानी’ में बड़े हुए हैं। लेकिन अब काम-धंधे की दुनिया में कदम रख रहे हैं। उन्हें एहसास हो रहा है कि वे चौबीसों घंटे इस इलेक्ट्रॉनिक जंजीर से बंध नहीं सकते। वे स्क्रीन से दूर असल दुनिया में अपनी जिंदगी जीना चाहते हैं। डेटा बताते हैं कि लगातार नोटिफिकेशन और स्क्रॉलिंग से परेशान करीब 63% जेन-जी युवा जानबूझकर अपने फोन और डिजिटल डिवाइस से दूरी बना रहे हैं। इस ट्रेंड को ‘क्विट रिवॉल्यूशन’ कहा जा रहा है। उन्हें लग रहा है कि लगातार नोटिफिकेशन, स्क्रॉलिंग और ऑनलाइन मौजूदगी ने उनके ध्यान, सुकून और असल रिश्तों पर असर डाला है। इस सोच के चलते युवाओं में एक नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है- ‘कीपैड’ या फ्लिप फोन की वापसी – युवा अब महंगे और हाइटेक स्मार्टफोन को छोड़कर पुराने जमाने के साधारण ‘फ्लिप फोन’ (डंप फोन) इस्तेमाल कर रहे हैं, ताकि सिर्फ काम की कॉल या मैसेज ही आ सकें। दोस्तों से मिलने पर नो-फोन रूल- जब वे आपस में मिलते हैं या पार्टी करते हैं, तो सब अपने-अपने फोन एक तरफ रख देते हैं। डिजिटल लॉक का सहारा – फोन में खुद को लॉक कर देने वाले एप्स और गैजेट्स का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ा है। एक नया बाजार और नई सोच – दिलचस्प बात यह है कि युवाओं की इस जरूरत को देखते हुए अब बाजार में एक नया उद्योग खड़ा हो गया है। यह इंडस्ट्री लोगों को फोन की लत छुड़ाने के लिए ‘स्मार्टफोन लॉक’, सब्सक्रिप्शन सर्विस और ‘डिजिटल डिटॉक्स’ गैजेट्स बेच रही है। डिजिटल डिटॉक्स एप्स बाजार 12-16% सालाना दर से बढ़ रहा डिजिटल तिजोरी – इसे फिजिकल टाइम्ड लॉकबॉक्स कहते हैं। इसमें स्मार्टफोन डाल देते हैं और एक टाइमर (2 या 4 घंटे) सेट कर देते हैं। एक बार टाइमर चालू हो गया, तो चाहकर भी टाइम पूरा होने से पहले फोन बाहर नहीं निकाल सकते। डिटॉक्स एप्स – ऐसे कई एप्स और पेड सब्सक्रिप्शन आ चुके हैं, जो फोन को निश्चित समय तक लॉक कर देते हैं। ‘डेटाइनसाइट’ के अनुसार, 2025 में डिजिटल डिटॉक्स एप्स मार्केट लगभग 3,600 करोड़ रु. का था। 2026 में यह लगभग 7,900 करोड़ रु. तक पहुंचेगा और 2032 तक लगभग 14,700 करोड़ रु. पहुंचने की उम्मीद है। इसका बाजार 12 से 16% की सालाना दर से बढ़ रहा है।
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