अंगारक चतुर्थी व्रत आज:  गणेश जी को चढ़ाएं दूर्वा, हनुमान जी के सामने दीपक जलाकर करें हनुमान चालीसा का पाठ, शिव जी को चढ़ाएं लाल फूल
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अंगारक चतुर्थी व्रत आज: गणेश जी को चढ़ाएं दूर्वा, हनुमान जी के सामने दीपक जलाकर करें हनुमान चालीसा का पाठ, शिव जी को चढ़ाएं लाल फूल

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5 घंटे पहले

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आज (मंगलवार, 5 मई) ज्येष्ठ महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी है। इस दिन को धार्मिक रूप से बहुत खास माना जाता है। इसे अंगारक चतुर्थी कहा जाता है, क्योंकि यह चतुर्थी मंगलवार के दिन पड़ रही है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मंगलवार का संबंध मंगल ग्रह और हनुमान जी से है, इसलिए इस दिन गणेश जी के साथ हनुमान जी और मंगल देव की पूजा भी करनी चाहिए।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, अंगारक चतुर्थी व्रत घर में सुख-शांति, धन-समृद्धि और बाधाओं को दूर करने के लिए रखा जाता है। माना जाता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने पर जीवन की परेशानियां धीरे-धीरे कम होने लगती हैं।

चतुर्थी तिथि का महत्व – चतुर्थी तिथि के देवता गणेश जी हैं। मान्यता के अनुसार गणेश जी का जन्म भी इसी तिथि को हुआ था। हर महीने दो चतुर्थी आती हैं। एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में और दोनों का धार्मिक महत्व है। गणेश जी के भक्त इन दोनों चतुर्थियों पर व्रत रखते हैं। इस दिन लोग दिनभर उपवास रखते हैं और शाम को चंद्र दर्शन के बाद गणेश पूजा करके व्रत पूरा करते हैं। चंद्र दर्शन के बिना व्रत अधूरा माना जाता है।

अंगारक चतुर्थी क्यों खास है?

जब चतुर्थी मंगलवार को आती है, तो उसे अंगारक चतुर्थी कहा जाता है। यह दिन साधारण चतुर्थी से ज्यादा शुभ माना जाता है। इस दिन की गई पूजा जल्दी सफल होती है और जीवन में आने वाली रुकावटें दूर होती हैं। इस दिन गणेश जी के साथ-साथ हनुमान जी और मंगल ग्रह की पूजा करने से विशेष लाभ मिलता है, खासकर उन लोगों को जिन्हें क्रोध, कर्ज, विवाद या स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां होती हैं।

गणेश पूजन विधि

  • घर के मंदिर में गणेश जी की मूर्ति या चित्र रखें।
  • पहले जल से स्नान कराएं, फिर दूध से और फिर दोबारा जल से स्नान कराएं।
  • लाल या पीले फूल, दूर्वा घास और चावल चढ़ाएं।
  • चंदन का तिलक लगाएं और वस्त्र अर्पित करें।
  • मोदक, लड्डू, दूध से बनी मिठाई और फल का भोग लगाएं।
  • इसके बाद गणेश जी के मंत्रों का जप करें- श्री गणेशाय नम:, ऊँ सुमुखाय नम:, ऊँ एकदंताय नम:, ऊँ गजकर्णाय नम:, ऊँ लंबोदराय नम:, ऊँ विघ्ननाशाय नम:, वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।।
  • अंत में धूप और दीप जलाकर आरती करें और अपनी गलतियों के लिए भगवान से क्षमा मांगें। फिर प्रसाद बांट दें।

हनुमान जी की पूजा विधि

मान्यता है कि मंगलवार को ही हनुमान जी अवतरित हुए थे। इसीलिए इस हनुमान जी की विशेष पूजा की जाती है। इनकी पूजा करने से डर, तनाव और नकारात्मकता दूर होती है।

इस दिन हनुमान जी के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए और हनुमान चालीसा, सुंदरकांड का पाठ करना चाहिए। राम नाम का जप भी कर सकते हैं। इससे मानसिक शक्ति और आत्मविश्वास बढ़ता है।

शिवलिंग रूप में की जाती है मंगल की पूजा

ज्योतिष में मंगल ग्रह को सेनापति ग्रह कहा जाता है। यह मेष और वृश्चिक राशि का स्वामी माना जाता है। मंगल ग्रह को ऊर्जा, साहस और गुस्से का कारक माना जाता है।

मंगल ग्रह की पूजा शिवलिंग के रूप में की जाती है। इसलिए अंगारक चतुर्थी के दिन शिवलिंग पर जल, दूध, बिल्व पत्र, धतूरा और लाल फूल चढ़ाएं। लाल चंदन या लाल गुलाल भी चढ़ाएं। इसके साथ “ऊँ अं अंगारकाय नम:” मंत्र का जप करना शुभ माना जाता है।

जिन लोगों की कुंडली में मंगल दोष है, उनके जीवन में शादी, नौकरी या रिश्तों में परेशानी आ सकती है। ऐसे लोग आज लाल मसूर दाल का दान करें। जरूरतमंदों को भोजन कराएं। हनुमान जी के मंदिर में जाकर प्रसाद चढ़ाएं।

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