अमेरिका में लाइन डांस का जुनून:  सबरीना-बेयोन्से जैसे कलाकार इसके मुरीद, देहाती कहकर जिसका मजाक उड़ाते थे, उसी लय पर झूम रहे; हाथ थामे बिना मन जोड़ने का जरिया बना
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अमेरिका में लाइन डांस का जुनून: सबरीना-बेयोन्से जैसे कलाकार इसके मुरीद, देहाती कहकर जिसका मजाक उड़ाते थे, उसी लय पर झूम रहे; हाथ थामे बिना मन जोड़ने का जरिया बना

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न्यूयॉर्क2 घंटे पहले

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इन दिनों ब्रुकलिन से मैनहट्टन तक लाइन डा​सिंग की क्लास हाउसफुल चल रही हैं। - Dainik Bhaskar

इन दिनों ब्रुकलिन से मैनहट्टन तक लाइन डा​सिंग की क्लास हाउसफुल चल रही हैं।

बाहर बर्फ की चादर बिछी है और कड़ाके की ठंड है, लेकिन ब्रुकलिन के ‘डेजर्ट 5 स्पॉट’ रेस्त्रां के अंदर का नजारा कुछ और ही है। यहां काउबॉय बूट्स पहने युवाओं की भीड़ लाइन डांस ‘टेक्सास टाइम’ के स्टेप्स सीख रही है। कभी गांवों और छोटे कस्बों तक सीमित रहने वाला यह डांस आज न्यूयॉर्क, वॉशिंगटन और लॉस एंजेलिस जैसे महानगरों के युवाओं के लिए स्टाइल का नया ट्रेंड बन गया है।

एक दशक पहले तक लोग लाइन डांस को देहाती, पुराना और बोरिंग मानते थे, पर अब सोच बदल गई है। दरअसल, लाइन डांस एक ऐसा सामूहिक नृत्य है, जिसमें डांसर बिना किसी साथी के, एक या अधिक पंक्तियों में एक ही दिशा की ओर मुंह करके एक साथ डांस करते हैं। लॉस एंजेलिस के स्टड कंट्री के को-फाउंडर सीन मोनाघन कहते हैं कि पहले इसका मजाक उड़ाया जाता था, पर अब यह रुतबे से जोड़कर देखा जाने लगा है। गूगल पर भी इसे लेकर लगातार सर्च बढ़ रही है। इस बदलाव में पॉप संस्कृति की बड़ी भूमिका है। सबरीना कारपेंटर जैसे कलाकार अपने वीडियो में लाइन डांस दिखा रहे हैं। वहीं, बेयोन्से ने कंट्री म्यूजिक को नई पहचान दी है।

2025 में अमेरिका में कंट्री सॉन्ग 122.5 अरब बार सुने गए। जो इसकी बढ़ती लोकप्रियता दिखाता है। सोशल मीडिया पर इस ट्रेंड को हर घर तक पहुंचा दिया है। लाइन डांस के स्टेप छोटे व तेज होते हैं, इसलिए 30 सेकंड के ​वीडियो के लिए सही रहते हैं। राल्फ लॉरेन, लुई वितों और प्राडा जैसे ब्रांड काउबॉय स्टाइल के कपड़े ला रहे हैं। इससे युवाओं में इसका क्रेज बढ़ रहा है। इन इवेंट्स में डांस फ्लोर पर ड्रिंक ले जाना मना है। ताकि कोई​ फिसले नहीं। युवाओं को यह नियम पसंद है। डांस इंस्ट्रक्टर ‘स्पिटफायर’का कहना है ज्यादातर युवा शराब से दूरी बनाने लगे हैं।

24 साल की बायली और उनके जैसे युवा यहां अकेले आते हैं, पर जाते समय उन्हें नए दोस्त और अपना सा समूह मिल जाता है। एक साथ उठते कदम, घूमते बूट और खुशनुमा आवाजें ऐसा माहौल बनाती हैं, जो मोबाइल और इंटरनेट की अकेली दुनिया में सच्चा अपनापन महसूस कराता है। जब सैकड़ों लोग एक ही लय पर पैर थिरकाते हैं तो वह ऊर्जा उन्हें एक-दूसरे से जोड़ देती है। इन दिनों ब्रुकलिन से मैनहट्टन तक लाइन डा​सिंग की क्लास हाउसफुल चल रही हैं। मोनाघन कहते हैं, ‘लाइन पर चलना पहले कभी इतना मजेदार नहीं था।’

इस डांस के स्टेप भारत के लेजिम और डांडिया जैसे ही हैं

लाइन डांस में डांस करने वाले एक-दूसरे का हाथ नहीं पकड़ते, जिससे सीखना आसान होता है। यह भारत के लेजिम व डांडिया के समान है क्योंकि इनमें भी लोग पंक्तियों में तालमेल के साथ डांस करते हैं। इनमें जोड़ी नहीं होती, बल्कि पूरी भीड़ साथ थिरकती है। जो एकता और सामुदायिक जुड़ाव का एहसास करवाती है।



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