अल-फलाह ग्रुप चेयरमैन की दिल्ली कोर्ट में सुनवाई 31 को:  मनी लॉन्ड्रिंग को लेकर चार्जशीट दाखिल; ईडी की दलीलों पर दिया फैसला – Faridabad News
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अल-फलाह ग्रुप चेयरमैन की दिल्ली कोर्ट में सुनवाई 31 को: मनी लॉन्ड्रिंग को लेकर चार्जशीट दाखिल; ईडी की दलीलों पर दिया फैसला – Faridabad News

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दिल्ली ब्लास्ट के बाद चर्चा में आई फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी व अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी और अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दाखिल मनी लॉन्ड्रिंग की चार्जशीट पर संज्ञान लेने के लिए दिल्ली की साकेत कोर्ट में 31 जनवरी को सुनवाई की जाएगी। कोर्ट ने ये फैसला ईडी की दलीलें सुनने के बाद दिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार को दिल्ली ब्लास्ट केस से जुड़ी फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी की करीब 140 करोड़ रुपए की संपत्तियां अटैच की थी। साथ ही अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी और उसके ट्रस्ट के खिलाफ दिल्ली की अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। अटैच की गई संपत्तियों में फरीदाबाद के धौज क्षेत्र में 54 एकड़ जमीन, यूनिवर्सिटी की इमारत, स्कूलों और विभागों की इमारतें और हॉस्टल शामिल हैं। ED ने इन्हें अपराध की आय की श्रेणी में रखा है। ये कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की गई है। चार्जशीट में पर्याप्त सामग्री का दावा ऐडिशनल सेशन जज (ASJ) शीतल चौधरी प्रधान ने Special Public Prosecutor (SPP) साइमन बेंजामिन की दलीलें सुनने के बाद मामले को विचार के लिए सूचीबद्ध किया था। सुनवाई के दौरान जवाद अहमद सिद्दीकी भी कोर्ट में मौजूद रहे। ईडी की ओर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए Special Public Prosecutor (SPP) ने कोर्ट को बताया कि चार्जशीट में पर्याप्त सामग्री मौजूद है, जिसके आधार पर संज्ञान लिया जा सकता है। एजेंसी के अनुसार आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का स्पष्ट मामला बनता है। NAAC से मान्यता होने का झूठा दावा ईडी की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि यह जांच दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच द्वारा दर्ज दो एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। इन एफआईआर में आरोप है कि अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने नेशनल असेसमेंट एंड एक्रेडिटेशन काउंसिल (NAAC) से मान्यता होने का झूठा दावा किया था। एजेंसी ने जानकारी दी, कि जांच के दौरान प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत कुछ संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया गया है। ईडी का आरोप है कि यूनिवर्सिटी​​​​​ और उससे जुड़े संस्थानों ने समाप्त हो चुकी NAAC मान्यता को दिखाकर छात्रों और अभिभावकों को गुमराह किया और इसी आधार पर दाखिले लेकर फीस वसूली गई। ED ने कहा था- झूठी मान्यता से आय अर्जित ED ने 18 नवंबर को अल-फलाह ग्रुप से जुड़े ठिकानों पर रेड की थी। 12 घंटे चले सर्च के बाद ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को गिरफ्तार किया गया था। इस दौरान ED ने कोर्ट में बताया था कि यूनिवर्सिटी और उसके नियंत्रण वाले ट्रस्ट ने झूठी मान्यता और पहचान के दावे कर स्टूडेंट्स और पेरेंट्स को धोखे में रखा। इस तरह 415.10 करोड़ रुपए की अपराध की आय अर्जित की। नकदी, डिजिटल डिवाइस और वित्तीय दस्तावेज बरामद ईडी ने बताया कि दिल्ली ब्लास्ट के बाद अल-फलाह ग्रुप कई ठिकानों पर छापेमारी की गई। जहां से नकदी, डिजिटल डिवाइस और वित्तीय दस्तावेज बरामद किए गए। ईडी का आरोप है कि कुछ ठेके आरोपी के परिवार से जुड़ी संस्थाओं को दिए गए और वरिष्ठ अधिकारियों ने सिद्दीकी की भूमिका को अहम वित्तीय फैसलों में मंजूरी देने वाला बताया है। इसके अलावा फंड की लेयरिंग कर मनी ट्रेल छिपाने के भी आरोप लगाए गए हैं।



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