5 मिनट पहले
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इस नामी क्रिकेटर ने पांच साल बाद वन-डे रैंकिंग में पहली पोजिशन पर वापसी की है। उनके करियर की कुछ सीख, उन्हीं की जुबानी…
जिंदगी में आपका नजरिया समय-समय पर बदलता है… शोहरत के साथ, पैसे के साथ, सफलता के साथ। ऐसे में बहुत सारे लोग आपके करीब आ जाते हैं और कहीं न कहीं आप दिल की गहराई से यह भूलने लगते हैं कि आप असल में हैं कौन। लेकिन मैं हमेशा से ऐसा ही रहा हूं। मेरी जर्नी की सबसे खूबसूरत बात यह रही कि मैं बहुत छोटी उम्र में एक ऐसी अकादमी का हिस्सा था, जिसके बारे में कोई बात ही नहीं करता था। न उस अकादमी की चर्चा थी, न उस क्लब की। ऐसे में मेरे पास ऊपर आने का सिर्फ एक ही तरीका था कि अगर कोई 100 है, तो मुझे 200 होना होगा, वरना कोई मुझे नोटिस ही नहीं करेगा। मेरे अंदर वो आग हमेशा थी और उसी के दम पर मैं ऊपर उठा। मैंने इतने रन बनाए कि लोग मुझे नजरअंदाज ही नहीं कर सके, क्योंकि वही मेरी एकमात्र ताकत और मकसद था। ये जज्बा मुझे मेरे पिता से मिला। जिंदगी में एक वक्त ऐसा आया जब मुझे अंडर-14 दिल्ली टीम के लिए चुना गया, लेकिन रात एक बजे कुछ जटिलताओं के कारण मुझे ड्रॉप कर दिया गया। स्टेट लेवल पर क्या होता है, आप जानते ही हैं… किसी और को मुझ पर तरजीह दे दी गई, कुछ समझौते किए गए। मेरे पिता से कहा गया कि अगर चाहें तो दो मैच बाद टीम में जगह दिलाई जा सकती है। उन्होंने साफ मना कर दिया। कहा, मैं एक पैसा नहीं दूंगा। अगर बेटा अपने टैलेंट पर खेले तो ठीक, वरना ये उसके लिए नहीं है। ये बात मेरी जिंदगी में हमेशा के लिए बैठ गई। तभी से मैंने खुद पर भरोसा किया। जब मेरी पीठ दीवार से लगती है, तो मैं सिर्फ आगे बढ़ता हूं। फिर लड़ता हूं, फिर ऊपर आता हूं। मेरी पूरी यात्रा, वो मैच, वो पारियां, वो लम्हे, जिन्हें देखकर लोग कहते हैं , “मैं भी ऐसा करना चाहता हूं”… असल में ये सब इस खेल के जरिए दूसरों पर असर डालने की मेरी कोशिश है। तभी मुझे समझ आया कि यही मेरी जर्नी है और मुझे चीजें बहुत स्वाभाविक और दिल से करनी है। टीवी पर साफ दिखता है कि कौन दिखावा कर रहा है और कौन दिल से खेल रहा है। जब हालात मुश्किल हों और आपको चुनना पड़े कि आगे बढ़ना है या नहीं, उस पल आगे बढ़ने का फैसला करें। वही फैसला आपकी जिंदगी में फर्क लाएगा।
हर पल को जीना जरूरी खेल आपको हर पल मौजूद रहना सिखाता है। पूरी प्रतिबद्धता के साथ, छोटे-छोटे पहलुओं पर ध्यान देना भी सिखाता है। यही सोच जिंदगी के हर हिस्से में काम आती है। जब आप किसी भी पल में पूरी तरह गुम हो जाते हैं, तो आपका आउटपुट अपने आप बेहतर हो जाता है…फिर चाहे वह खेल हो, काम हो या कुछ और।
कोशिश करना न छोड़ें मेरे लिए लीडरशिप की शुरुआत खुद की जिम्मेदारी लेने से होती है। अगर आप खुद की जिम्मेदारी नहीं ले सकते, तो किसी की नहीं ले सकते। मैंने हमेशा दिल की सुनी और वही दूसरों को भी करने के लिए प्रेरित किया कि मैंने खुद वो रास्ता जिया है…सफल भी हुआ, असफल भी, लेकिन कभी कोशिश करना नहीं छोड़ा। (तमाम इंटरव्यूज में…)








