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अक्सर लोग सोचते हैं कि वैक्सीनेशन सिर्फ बच्चों के लिए जरूरी है, लेकिन बढ़ती उम्र के साथ वयस्कों में भी कई टीकों की जरूरत होती है, जो उन्हें बीमारी के गंभीर होने व लम्बे समय तक अस्पताल में भर्ती होने से बचा सकती है। ऐसे में विश्व टीकाकरण सप्ताह (24 से 30 अप्रैल) पर जानते हैं ऐसे जरूरी टीके, जो वयस्कों के लिए जरूरी है। 1. Tdap/Td टेटनस, डिप्थीरिया, पर्टुसिस किसे लगवानी चाहिए – हर उम्र के वयस्क को शेड्यूल – Tdap की एक डोज। हर 10 साल में बूस्टर। असर – लगभग 85-95% सुरक्षा देती है। क्यों जरूरी है – पर्टुसिस (काली खांसी) वयस्कों में फिर से फैल रहा है। कई लोगों में लक्षण हल्के हो सकते हैं, लेकिन वे इसे बच्चों या बुजुर्ग सदस्यों तक फैला सकते हैं। 2. हेपेटाइटिस B वैक्सीन किसे लगवानी चाहिए – जिन्हें बचपन में नहीं लगी। शेड्यूल – 6 महीनों में तीन डोज (0, 1, और 6 महीने) असर – लगभग 90-95% सुरक्षा देती है। क्यों जरूरी है – हेपेटाइटिस बी एक साइलेंट इन्फेक्शन है जो लिवर पर असर डालता है। बहुत से लोगों को तब पता चलता है, जब यह लिवर की गंभीर बीमारी बन जाता है। 3. न्यूमोकोकल वैक्सीन (निमोनिया) किसे लगवानी चाहिए – 50 से ज्यादा उम्र के वयस्कों और लाइफस्टाइल डिजीज वाले 19-49 साल के लोग। शेड्यूल – वैक्सीन के प्रकार व जोखिम के आधार पर असर – गंभीर न्यूमोकोकल बीमारी से मजबूत सुरक्षा। क्यों जरूरी है – यह स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनिया व ब्लडस्ट्रीम इन्फेक्शन से बचाती है। 4. HPV- ह्यूमन पैपिलोमावायरस वैक्सीन किसे लगवानी चाहिए – 45 साल तक की महिलाएं, 26 साल तक के पुरुष, जोखिम अनुसार 45 तक के पुरुष भी। शेड्यूल – उम्र के आधार पर दो या तीन डोज। असर – सही समय पर लगवाने पर 90% असरदार। क्यों जरूरी है – यह सर्वाइकल कैंसर, मुंह और एनल कैंसर में असरदार है। 5. हर्पीज जोस्टर वैक्सीन (शिंगल्स) किसे लगवानी चाहिए – 50 और उससे ज्यादा उम्र के वयस्क व कमजोर इम्यूनिटी वाले कम उम्र के लोगों को। शेड्यूल – दो डोज, जिनके बीच 2-6 महीने का अंतर हो। असर – लगभग 90% असरदार। क्यों जरूरी है- शिंगल्स में रैशेज और लंबे समय तक नसों में दर्द (पोस्ट-हर्पेटिक न्यूराल्जिया) हो सकता है। 6. टाइफाइड वैक्सीन किसे लगवानी चाहिए- जिन इलाकों में टाइफाइड आम है या फिर जो लोग अक्सर यात्रा करते हैं। शेड्यूल – हर 3 साल में बूस्टर असर – लगभग 50-80% प्रभावित। क्यों जरूरी है – वैक्सीन टाइफाइड से अतिरिक्त सुरक्षा देती है, खासकर जहां संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है।
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