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सेरेना विलियम्स करीब चार साल बाद प्रोफेशनल टेनिस में वापसी कर रही हैं। प्रेरित करने वाली बातें, उन्हीं की जुबानी… मेरी पूरी जिंदगी टेनिस के इर्द-गिर्द घूमती रही। मेरे पिता कहते हैं कि मैंने तीन साल की उम्र में पहली बार रैकेट पकड़ा था, लेकिन मुझे लगता है मेरा रिश्ता टेनिस से उससे भी पहले शुरू हो गया था। बचपन से ही मेरे अंदर एक बात बहुत गहरी थी। मैं जो भी करती थी, उसे सबसे बेहतर करना चाहती थी। मुझे याद है कि मैं स्कूल जाने से पहले वर्णमाला लिखना सीख रही थी। एक दिन मैं अंग्रेजी का ‘A’ बिल्कुल सही नहीं लिख पाई। मैं इतनी परेशान हो गई कि रातभर रोती रही। बार-बार उसे मिटाती, फिर लिखती। मेरी बहनें सो गई थीं, लेकिन मैं जाग रही थी। मुझे तब तक चैन नहीं मिला, जब तक मैंने उसे सही नहीं कर लिया। शायद वहीं से मेरे भीतर उत्कृष्टता की तलाश शुरू हुई।
मैं जानती हूं कि परफेक्ट जैसी कोई चीज नहीं होती। कोई भी इंसान परफेक्ट नहीं होता। लेकिन मैंने हमेशा अपने लिए सबसे ऊंचा लक्ष्य तय किया। मैं तब तक कोशिश करती रही, जब तक अपने सर्वश्रेष्ठ तक नहीं पहुंच गई। मेरी जिंदगी में बहुत से ऐसे लोग आए जिन्होंने कहा कि मैं यह नहीं कर सकती। कई लोगों ने मुझे कम आंका। कई बार मुझे बताया गया कि मेरी सीमाएं क्या हैं। लेकिन मैंने एक बात सीखी…दूसरों के संदेह को अपनी ताकत में बदलना है।
मैंने आलोचना से ताकत लेना सीख लिया है। मैंने नकारात्मकता को ऊर्जा में बदलना भी सीख लिया है। कई मुकाबले मैंने सिर्फ इसलिए जीते क्योंकि किसी ने मुझे कमजोर समझ लिया था। किसी ने मुझे गिनती में नहीं रखा था। उन्हीं पलों ने मुझे और ज्यादा मजबूत बना दिया।
अगर जिंदगी आपको चुनौती दे रही है, लोग आप पर भरोसा नहीं कर रहे हैं, तो याद रखें…कभी-कभी वही बातें आपकी सबसे बड़ी ताकत भी बन सकती हैं। लेकिन सफलता का सफर केवल जीत की कहानी नहीं होती। मेरे जीवन में ऐसे क्षण भी आए जब मुझे कठिन फैसले लेने पड़े। मेरे जीवन में एक और बड़ा संघर्ष तब आया जब मैं मां बनने के बाद वापस कोर्ट पर लौटी। मैंने सी-सेक्शन झेला, गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना किया, फीडिंग के दौरान खेला, प्रसव के बाद आने वाली मानसिक चुनौतियों का सामना किया और फिर भी ग्रैंड स्लैम फाइनल तक पहुंची। लेकिन क्या मैं हर लक्ष्य हासिल कर पाई? नहीं। क्या मैंने हर सपना पूरा किया? नहीं। क्या मैंने हर रिकॉर्ड तोड़ा? नहीं। लेकिन मैंने कोशिश की। मैंने हार नहीं मानी। कई बार यही सबसे बड़ी जीत होती है। हम अक्सर अपनी जिंदगी को उन चीजों से आंकते हैं, जो हमें नहीं मिलीं। लेकिन हमें उन चीजों को भी देखना चाहिए जो हमने हासिल कर ली हैं। जीवन केवल इस बात का हिसाब नहीं है कि आपने क्या खोया। यह इस बात का उत्सव भी है कि आपने क्या पाया है। हम बदलते हैं, आगे बढ़ते हैं, ग्रो करते हैं
कई बार हम उस चीज से दूर जा रहे होते हैं जिसे हम दिल से प्यार करते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हमारी यात्रा खत्म हो रही है। मैं ‘रिटायरमेंट’ शब्द को कभी पसंद नहीं कर पाई। मुझे लगता है जिंदगी कभी रुकती नहीं। हम बदलते हैं, आगे बढ़ते हैं, ग्रो करते हैं।
(तमाम इंटरव्यू में)
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