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किताबों से जानिए, आखिर कैसे स्वयं की आलोचना करने से आत्मविश्वास और प्रदर्शन दोनों प्रभावित होते हैं? स्वयं की आलोचना से आत्मविश्वास कम होगा
हमारी प्रगति को रोकने वाली सबसे बड़ी बाधा हमारे मन की वह आवाज होती है जो हर छोटी चूक पर हमें कठोरता से परखती है। स्वयं की आलोचना करने से आत्मविश्वास और प्रदर्शन दोनों प्रभावित होते हैं। जब हम गलतियों को स्वीकार करते हुए खुद पर अनावश्यक दबाव डालना छोड़ देते हैं, तो ध्यान काम पर केंद्रित होता है। (द इनर गेम ऑफ टेनिस -डब्ल्यू.टिमोथी गैलवे) अपने काम को एक अलग सोच के साथ करें
हर व्यक्ति भीड़ का हिस्सा बन सकता है, लेकिन कुछ लोग अपने काम में रचनात्मकता, जिम्मेदारी और अलग सोच जोड़कर अपनी पहचान बनाते हैं। अगर आप केवल नियमों का पालन करते हैं, तो आप आसानी से बदले जा सकते हैं, लेकिन जब आप अपने काम में अनोखा योगदान जोड़ते हैं, तो आप अनिवार्य बन जाते हैं। (लिंचपिन -सेथ गोडिन) छोटे कदमों से बदलेगी आपके जीवन की दिशा
जीवन की दिशा किसी एक बड़े फैसले से नहीं बदलती, उन छोटे चुनावों से तय होती है जो हम हर दिन करते हैं। ये फैसले उस समय भले ही मामूली दिखाई दें, लेकिन समय के साथ उनका प्रभाव गहराता जाता है। एक अच्छी आदत, एक सही कदम या थोड़ी-सी निरंतरता धीरे-धीरे असाधारण परिणामों का आधार बन जाती है। (द स्लाइट एज -जेफ ओल्सन) अलग सोच ही नई संभवनाओं को जन्म देती है, प्रगति देती है
नए विचार शुरुआत में असहज और अलग लगते हैं, इसलिए बहुत लोग उन्हें तुरंत स्वीकार नहीं करते। लेकिन वही विचार समय के साथ बदलाव और प्रगति की नींव बनते हैं। जो लोग भीड़ से अलग सोचने का साहस रखते हैं, वे वास्तविक नवाचार करते हैं। रचनात्मकता का मतलब सिर्फ नियम तोड़ना नहीं है, बेहतर और प्रभावी तरीके खोजने की क्षमता है। अलग सोचना ही नई संभावनाओं को जन्म देता है और यही प्रगति की असली शुरुआत होती है। (ओरिजिनल्स -एडम ग्रांट)
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