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19वीं सदी के मशहूर ऑस्ट्रियाई संगीतकार जोसेफ हेडेन की मौत के बाद कब्र से उनकी खोपड़ी इसलिए चुरा ली गई थी ताकि उनकी प्रतिभा का रहस्य जाना जा सके। विशेषज्ञ तब ये मानते थे कि संगीत का हुनर खोपड़ी की बनावट में छिपा है, लेकिन आधुनिक विज्ञान इससे अलग बताता है। अब शोध बताते हैं कि असली ताकत दिमाग की नसों और उनके कनेक्शन में होती है, जो अभ्यास के साथ लगातार मजबूत होती जाती है। दिमाग के लिए ‘वर्कआउट’ जैसा संगीत संगीत बनाना मस्तिष्क के लिए एक तरह का वर्कआउट है, जिसमें दिमाग को ध्वनि, दृश्य और शरीर की गतिविधियों के बीच तालमेल बैठाना पड़ता है। यह प्रक्रिया दिमाग को सक्रिय रख उसे मांसपेशी की तरह मजबूत बनाती है। नियमित अभ्यास से सोचने, समझने और याद रखने की क्षमता बेहतर होती है। यही वजह है कि संगीत से जुड़े लोग अक्सर मानसिक रूप से अधिक फुर्तीले और केंद्रित पाए जाते हैं। ग्रे मैटर बढ़ाकर सोचने की ताकत करता है मजबूत नियमित संगीत अभ्यास मस्तिष्क के ‘ग्रे मैटर’ को बढ़ाता है, जो सोचने, चलने-फिरने और निर्णय लेने से जुड़ा होता है। 2020 के शोध में पाया गया कि संगीतकारों की योजना बनाने और समस्या सुलझाने की क्षमता आम लोगों से बेहतर होती है। 2017 के मेटा-एनालिसिस में उनकी याददाश्त भी अधिक तेज मिली। साथ ही, संगीत सीखने वालों को दर्द कम महसूस होता है, जिससे यह मेंटल हेल्थ के लिए भी सहायक बनता है। एक प्रयोग में जब लोगों को दर्द वाले इंजेक्शन दिए गए, तो संगीत का अनुभव रखने वालों ने आम लोगों से कम दर्द महसूस की। बचपन से बुढ़ापे तक दिमाग को देता सुरक्षा कवच जो बच्चे 7 साल से पहले संगीत सीखते हैं, उनके दिमाग के दोनों हिस्सों को जोड़ने वाला ‘कॉर्पस कैलोसम’ बेहतर विकसित होता है, जिससे दूसरी भाषा सीखने और तर्क करने की क्षमता बढ़ती है। वहीं उम्र बढ़ने पर संगीत याददाश्त को संभालने में मदद करता है। शोध बताते हैं कि वाद्ययंत्र बजाने से मानसिक गिरावट धीमी होती है और डिमेंशिया का खतरा कम होता है, जिससे यह जीवनभर दिमाग के लिए फायदेमंद बना रहता है। हर वाद्ययंत्र दिमाग के अलग-अलग हिस्सों को सक्रिय करता है। प्रोटेक्ट-यूके एजिंग कोहोर्ट की शोध के मुताबिक, पियानो और ब्रास वाद्य बजाने से याददाश्त बेहतर होती है, जबकि वायु-वाद्य यंत्र बजाने वाले योजना व समस्या सुलझाने में माहिर होते हैं। वहीं, गायन करने वालों की मौखिक तर्कशक्ति मजबूत होती है। वाद्य बजाते समय एंडोर्फिन हार्मोन निकलते हैं, जो दर्द कम कर खुशी बढ़ाते हैं। हालांकि कई वाद्य बजाने से अतिरिक्त लाभ नहीं मिला। विशेषज्ञ मानते हैं कि समूह में संगीत बजाना तनाव घटाता और सामाजिक जुड़ाव बढ़ाता है, इसके लिए प्रोफेशनल होना जरूरी नहीं। केवल संगीत सुनना भी सही विकल्प हो सकता है।
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