9 घंटे पहले
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- भारतीय स्पिनर ने हाल ही में टी-20 गेंदबाजों में टॉप रैंकिंग हासिल की है, सफलता के इंतजार से जुड़े उनके अनुभव, उन्हीं की जुबानी…
26 साल की उम्र में ही मैंने क्रिकेट को थोड़ा गंभीर तरीके से खेलना शुरू किया। बहुत सारे घरेलू मैच खेले हैं। अभी भी जब मैं अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट नहीं खेल रहा होता, तब मैं घरेलू मैच खेल रहा होता हूं। मेरा मानना है आपको लगातार चुस्त रहना होता है, इसके लिए फर्स्ट क्लास क्रिकेट मददगार है। फिटनेस को हल्के में लेने की कोई गुंजाइश नहीं है। मेरे लिए यही असली तैयारी का मैदान है। 2021 में मैंने भारत के लिए तीन मैच खेले थे, लेकिन एक भी विकेट नहीं ले पाया। मैं दुबई में पाकिस्तान के खिलाफ खेले गए उस मैच का भी हिस्सा था, जिसमें हम 10 विकेट से हारे थे। यह विश्व कप में भारत की पाकिस्तान से पहली हार थी। वह मेरे लिए अंधकार से भरा समय था। मैं डिप्रेशन में चला गया क्योंकि मुझे लगा कि मैं बहुत हाइप के साथ चुने जाने के बाद भी न्याय नहीं कर पाया। इसके बाद तीन साल तक मुझे टीम में नहीं चुना गया। इसलिए, मुझे ऐसा लगता है कि टीम में वापसी करना मेरे लिए शुरुआत करने के रास्ते से ज्यादा कठिन था।
मैंने निराशा झेली है और मैं जानता हूं कि आलोचना कितनी बुरी हो सकती है। 2021 विश्व कप के बाद मुझे धमकी भरे फोन भी मिले कि ‘भारत मत आना…।’ लोग मेरे घर तक पहुंचे, मुझे कभी-कभी छिपना भी पड़ा। जब मैं एयरपोर्ट से लौट रहा था, तो कुछ लोग बाइक पर मेरे पीछे भी आए। ऐसा होता है। मैं समझ सकता हूं कि फैन्स बेहद भावुक हो जाते हैं।
मैं निश्चित रूप से लॉन्ग टर्म प्लानिंग में यकीन रखता हूं। इसकी नींव 2021 में पड़ी थी, जब मैंने अपना बॉलिंग स्टाइल साइड-स्पिन से ओवर-स्पिन में बदल दिया था। यह यात्रा चार साल पहले शुरू हुई थी और मुझे लगता है कि कुछ महीनों में मैं अपने पीक पर पहुंच जाऊंगा। उसके बाद जहां भी जिंदगी ले जाएगी, मैं उसके लिए ओपन रहूंगा। अभी मेरी प्राथमिकता बॉलिंग है। अगर मैं अच्छी तरह गेंदबाजी नहीं करूंगा, तो चाहे मैं कितना भी फिट रहूं या बैटिंग में कितना भी सुधार कर लूं, वह मायने नहीं रखेगा। मुझे अपने आप को सर्वोत्तम गेंदबाज बनाना होगा। तभी मैं बाकी चीजों को विकसित कर पाऊंगा।
जब मैंने शुरू किया था, तब मैं रोज दो-तीन घंटे प्रैक्टिस करता था। रोज 200-300 गेंदें फेंकता था। हर दिन सुबह 5:30 बजे उठकर अभ्यास के लिए निकलता। 2021 के बाद मैं नहीं जानता था कि मुझे फिर कभी भारतीय टीम का बुलावा मिलेगा या नहीं। उस समय मेरे पास कोई स्पष्ट दिशा नहीं थी। लेकिन मैंने खुद को धक्का दिया। सोचता था कि मैं इस नई टेक्नीक को सही कर लूं तो मैं ज्यादा प्रभावशाली गेंदबाज बन सकता हूं। मेरा लक्ष्य एक बेहतर गेंदबाज बनने का था। अब तक भी यही काम कर रहा हूं।
चिंता करने से कुछ नहीं होता, सुधार करना होगा काफी समय तक मैं अपने बुरे दौर के बारे में बहुत ज्यादा सोचता रहता था। समय के साथ मुझे समझ आया कि ये सब मेरे बस में नहीं है, मैं केवल अपना खेल सुधार सकता हूं। अब मैं इसके बारे में चिंता नहीं करता। केवल अपने खेल के बारे में ही सोचता हूं और मेहनत करता हूं। मेरा मन हमेशा पिछले मैच में अटका रहता है और उसमें मैं किस तरह से सुधार कर सकता हूं, बस यही मैं सोचता हूं। (तमाम इंटरव्यूज में…)








