रूमी जाफरी4 घंटे पहले
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फिल्म जुड़वा के गाने ‘ईस्ट ऑर वेस्ट, इंडिया इज द बेस्ट…’ के एक दृश्य में सलमान खान।
सभी प्रिय पाठकों को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं। नया साल हम सबके जीवन में नई ऊर्जा, नया उत्साह, नई खुशियां लेकर आए। हमारे देश और पूरे विश्व में प्रेम और सद्भावना बनी रहे, इन्हीं शुभकामनाओं के साथ मेरे जहन में पिछले बहुत सारे सालों में मनाए गए न्यू ईयर के कई किस्से याद आ रहे हैं। सोचा, वो आपके साथ भी साझा करूं।
हमारे बचपन में न्यू ईयर का कोई खास सेलिब्रेशन नहीं होता था। फिर 1982 में भोपाल में टीवी आया। 31 दिसंबर की रात को टीवी पर मनोरंजन से भरे प्रोग्राम आते थे। आसपास के लोग हमारे घर आ जाते थे, क्योंकि तब मोहल्ले में टीवी दो-चार लोगों के घर ही हुआ करता था। सब बैठकर प्रोग्राम देखते थे। नव वर्ष शुरू होते ही सब एक-दूसरे को मुबारकबाद देते थे और फिर अपने-अपने घर चले जाते थे। बस इसी तरह नया साल मनाया जाता था।
अब मैं आपको मुंबई में अपने पहले न्यू ईयर का किस्सा सुनाता हूं, जो मेरे जीवन के बहुत यादगार किस्सों में से एक है। बात 31 दिसंबर 1986 की है। मैं नया-नया मुंबई पहुंचा था। लोगों से जान-पहचान बना रहा था। वहां भोपाल के मेरे एक दोस्त थे, दोस्त क्या बड़े भाई कहिए, नाम था कमल शुक्ला। उन्होंने कहा कि तुम रात को आ जाना, मैं तुम्हें न्यू ईयर पार्टी में ले चलूंगा और बंबई का न्यू ईयर दिखाऊंगा। मैं जुहू से बस में बैठा और बांद्रा की तरफ रवाना हुआ। मैं पीछे की जेब में बटुआ रखता था। पैसे के साथ-साथ लोगों के विजिटिंग कार्ड और एक छोटी डायरी भी होती थी, जिसमें मुंबई में जिन लोगों से मैं मिल रहा था, उनके फोन नंबर लिखे होते थे, जो मेरे लिए बहुत कीमती थे। मैं बार-बार हाथ से बस में उसे चेक करता रहता था कि बटुआ है या नहीं। मैं लिंकिंग रोड के पीछे की तरफ एस वी रोड पर पहुंचा। वहां मैंने अपनी जेब में हाथ लगाया तो मेरा बटुआ गायब था। मैं हैरान रह गया। मैंने फौरन चिल्लाया, मेरी जेब कट गई, मेरी जेब कट गई। मैंने चिल्लाकर कहा कि बस रोको। तो कंडक्टर बोला, अरे बस रोकने से क्या तेरा बटुआ मिल जाएगा। मैंने कहा, अभी तक तो था मेरा बटुआ। अभी कटा है। मतलब मेरा बटुआ और जेब काटने वाला दोनों बस के अंदर ही हैं।
तो फिर एक आदमी चिल्लाया कि क्या एक-एक की तलाशी लेगा, पूरी बस इतनी भरी हुई है। मैंने कहा, मैं वो नहीं जानता, मेरी जेब बस में कटी है, तुम पुलिस स्टेशन लेकर चलो। बस ड्राइवर ने इससे मना कर दिया। मैंने कहा कि अगर तुम बस लेकर नहीं जाओगे, तो मैं तुम्हें रिपोर्ट करके सस्पेंड करा दूंगा। उस वक्त भोपाल के एक अखबार के संवाददाता का कार्ड भी मेरे पास था। मैंने वो दिखाया। तब कंडक्टर और ड्राइवर ने आपस में मराठी में कुछ बातचीत की और कहा, ठीक है, इसमें हमारा क्या जाता है, हम तो ड्यूटी पर हैं। चलो लेकर चलते हैं पुलिस स्टेशन।
इस बात पर बस में हल्ला मच गया। सब कहने लगे कि हमें उतरने दो। मैंने कहा कि पीछे के लोग उतर जाएं। जहां मैं खड़ा हूं, यहां से कोई नहीं उतरेगा। इतनी बात हुई ही थी कि एक बदमाश-सा दिखने वाला लड़का बोला, अरे बस में ढूंढ ना, गिरा दिया होगा। फिर सबने कहा, ढूंढो ढूंढो। उसी ने दिखाया कि उधर पड़ा है। तो मैं समझ गया कि पर्स इसी ने उड़ाया था और पुलिस स्टेशन जाने के नाम पर इसने उसे फेंक दिया। मैंने कहा, चलो अब ठीक है। जब मैंने पर्स उठाया तो एक दाढ़ी वाले बुजुर्ग ने कहा, नए आए हो बंबई में? मैंने कहा, जी। तो वो बोले, बंबई में जेब कट जाए या सामान चोरी हो जाए तो कभी वापस नहीं मिलता। तुम्हारा खोया हुआ बटुआ तुम्हें वापस मिल गया है, तुम बंबई में जरूर कुछ बनोगे। ये बात आज तक मेरे कानों में गूंजती है। और देखो, ऊपर वाले के करम से मैं कुछ बन भी गया। मैंने ये किस्सा फिल्म ‘स्वर्ग’ में भी इस्तेमाल किया था। इसी बात पर मुझे बशीर बद्र का शेर याद आ रहा है :
कभी मैं अपने हाथों की लकीरों से नहीं उलझा मुझे मालूम है किस्मत का लिक्खा भी बदलता है।
फिर धीरे-धीरे दोस्त बनते गए, मेरा सर्किल बढ़ता गया। फिल्में मिलती गईं, कामयाबी भी मिली। फिर हर साल देश में, विदेश में, फिल्मी पार्टियों में नया साल मनाता रहा। मगर मेरे सभी यादगार न्यू ईयर्स में से एक न्यू ईयर है 2023 का। न्यू ईयर सेलिब्रेट करने के लिए मैं, मेरी वाइफ, डेविड धवन साहब, उनकी वाइफ लाली भाभी, मेरे दोस्त शशि रंजन और उनकी वाइफ अनुरंजन तुर्की के इस्तांबुल गए। वहां हमने एक मशहूर रेस्टोरेंट में अपनी टेबल बुक की और सोचा कि वहीं न्यू ईयर मनाएंगे। जब हम वहां पहुंचे और वो लोग हमें टेबल पर लेकर गए तो हमने देखा कि टेबल के ऊपर हमारा तिरंगा लगा हुआ था। फिर उन्होंने हमारे देश का म्यूजिक बजाया, हमारी फिल्मों के गाने बजाए। हमारे हिंदुस्तानी गानों पर हमने और सारे विदेशियों ने खूब डांस किया। विदेश की धरती पर, विदेशियों के बीच अपने देश का झंडा देखकर, अपना गाना सुनकर नया साल मनाना बहुत ही जज्बाती, बहुत ही खुशियों से भरा और बहुत ही शानदार अनुभव रहा।
इसी बात पर मेरी फिल्म ‘जुड़वा’ का ये गाना सुनिए, अपना ख्याल रखिए और खुश रहिए।
ईस्ट ऑर वेस्ट, इंडिया इज द बेस्ट…








