3 घंटे पहले
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कई कंपनियां मिलेनियल प्रतिभाओं को बनाए रखने और युवा उपभोक्ताओं के बीच प्रासंगिक बने रहने को लेकर संघर्ष कर रही हैं। इसी चुनौती के समाधान के रूप में, दुनिया भर की बड़ी कंपनियों की लीडरशिप टीमें रिवर्स मेंटरिंग कार्यक्रम लागू कर रही हैं। रिवर्स मेंटरिंग में युवा कर्मचारियों को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ जोड़ा जाता है, जहां वे रणनीतिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण विषयों पर उन्हें मार्गदर्शन देते हैं। रिवर्स मेंटरिंग के लाभ पाने के लिए इन बिंदुओं का पालन किया जा सकता है…
1) सही जोड़ी बनाना है अत्यंत महत्वपूर्ण सबसे पहले, विविधता पर जोर दें। क्षेत्र, विभाग और स्थान के अनुसार अलग-अलग लोगों को जोड़ें। साथ ही, व्यक्तित्व की विविधता का भी ध्यान रखें। दूसरे, जोड़ी को औपचारिक रूप देने से पहले मेंटी (मार्गदर्शन पाने वाले) से परामर्श करें। जहां अधिकांश मिलेनियल मेंटर्स किसी भी जोड़ी को स्वीकार कर लेते थे (बशर्ते मेंटी प्रतिबद्ध हो), वहीं वरिष्ठ अधिकारी अधिक चयनशील होते थे, क्योंकि उन्हें निगरानी रखने की सीमाएं पार होने और हितों के टकराव की आशंका रहती थी।
2) मेंटी के डर और अविश्वास को दूर करें कई वरिष्ठ अधिकारी जूनियर कर्मचारियों के सामने अपनी जानकारी की कमी को उजागर करने से बहुत ज्यादा ही डरा करते हैं। लेकिन यदि इन आशंकाओं पर खुलकर बात की जाए, तो पारदर्शी संवाद उनके लिए बेहद लाभकारी भी सिद्ध हो सकता है। कुछ मेंटी इस बात से भी डरा करते हैं कि कहीं जूनियर कर्मचारी उनकी कोई गोपनीय या संवेदनशील जानकारी सहकर्मियों से साझा न कर दें। हालांकि, व्यवहार में गोपनीयता समाप्त होने की समस्या कहीं दिखाई नहीं दी है।
3) मेंटी की मजबूत प्रतिबद्धता सुनिश्चित करें रिवर्स मेंटरिंग कार्यक्रम के असफल होने का एक सबसे अहम और बड़ा कारण यह भी हो सकता है कि वरिष्ठ अधिकारी इस संबंध को जरा भी प्राथमिकता ही नहीं देते। कुछ सत्रों के रद्द होने के बाद ही कार्यक्रम की गति धीमी पड़ जाती है। ऐसे में मिलेनियल मेंटर्स को ही कमान थामनी पड़ सकती है। उन्हें सर्वोत्तम प्रथाएं साझा कर, नए समूहों के चयन में मदद कर और मेंटर्स को प्रशिक्षित कर कार्यक्रम को आगे बढ़ाना चाहिए। इस तरह मेंटी की प्रतिबद्धता को सुनिश्चित किया जा सकता है।
4) शैडो बोर्ड, रिवर्स मेंटरिंग को मिलाएं नहीं मिलेनियल्स को संगठन से जोड़ने का एक और अहम व असरदार तरीका हो सकता है शैडो बोर्ड। कुछ कंपनियों ने एक ही समूह में दोनों कार्यक्रम शुरू करने की कोशिश की है, जो कि ठीक नहीं है। इसका परिणाम यह हुआ कि दोनों में से कोई एक कार्यक्रम ही सफल हो पाया। दोनों कार्यक्रम कभी भी एक साथ प्रभावी नहीं हो सके। एेसा नहीं होना चाहिए था। शैडो बोर्ड और रिवर्स मेंटरिंग कार्यक्रम को एकसाथ न मिलाएं।







